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ना ढंग की सैलरी, ना ढंग का काम, वापस लौट रहे भारतीय कर्मचारी, इजरायली स्कीम की पोल खुल गई!

Israel ने construction sector में काम करने के लिए भारत से स्किल्ड मजदूर हायर करने का फैसला किया था. इजरायल ने स्किल टेस्ट लेने के बाद भारतीय मजदूरों को कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए चुना था. लेकिन टेस्ट में पास होने के बावजूद कई मजदूरों को कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए योग्य नहीं पाया गया.

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10 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 12 सितंबर 2024, 02:36 PM IST)
Israeli job scheme construction work india israel relation
इजरायल से कई भारतीय मजदूर वापस भारत लौट आए हैं. (फाइल फोटो)
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7 अक्तूबर 2023 को हमास ने इजरायल (Israel Hamas Attack) में घुसकर हमला किया. जिसके बाद से इजरायल ने एक लाख से ज्यादा फिलिस्तीनी मजदूरों को बैन कर दिया. फिलिस्तीन मजदूरों को बैन करने के बाद इजरायल के कंस्ट्रक्शन सेक्टर (israel construction sector) में मजदूरों की कमी हो गई. जिसको पूरा करने के लिए इजरायल ने भारत से मजदूरों को बुलाने की योजना बनाई. लेकिन अब इजरायल सरकार की ये योजना असफल होती दिख रही है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने स्किल टेस्ट लेने के बाद भारतीय मजदूरों को कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए चुना था. लेकिन टेस्ट में पास होने के बावजूद कई मजदूरों को कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए योग्य नहीं पाया गया. जिसके बाद उन्हें अकुशल और इंडस्ट्रियल सेक्टर में मजदूरी करने के लिए शिफ्ट कर दिया गया.

यूपी के जौनपुर के राजमिस्त्री छोटे लाल बिंद लखनऊ में 15 मिनट का प्लास्टरिंग टेस्ट पास करने के बाद इजरायल पहुंचे. लेकिन उन्हें चीनी फोरमैन के साथ विवाद के बाद 12 दिनों के बाद नौकरी से निकाल दिया गया. इसके बाद उन्हें यरुशलम के पास एक कॉस्मेटिक फैक्ट्री में 800 रुपये प्रति घंटे की दर से क्लीनर की नौकरी मिल गई. इसी तरह से यूपी के मऊ से वीना नाथ गुप्ता को भी लखनऊ में स्किल टेस्ट के बाद इजरायल बुलाया गया. और अब वे एक मजदूर के रूप में वहां काम कर रहे हैं.

इजरायली दूतावास के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 5 हजार मजदूरों को दो तरीकों से हायर किया गया था. सरकार-से-सरकार(G2G) जिसे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा संचालित किया जाता है. और दूसरा बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B), जिसके तहत विदेश मंत्रालय की देखरेख में निजी कंपनियों ने भारतीयों को भर्ती किया.

एनएसडीसी ने पहले दौर की भर्ती में फ्रेमवर्क कंस्ट्रक्शन और आयरन वेल्डिंग के लिए तीन-तीन हजार और प्लास्टरिंग और सिरेमिक टाइलिंग के लिए 2-2 हजार लोगों को भर्ती किया था. इन लोगों को (G2G) के माध्यम से हायर किया गया था.

इजरायली कंस्ट्रक्शन अधिकारियों का कहना है कि इन कर्मचारियों में अनुभव की कमी बहुत ज्यादा थी. खास तौर पर (G2G) के द्वारा हायर किए गए लोगों में. इजरायल में कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में विदेशी रोजगार एजेंसियों के संघ के अध्यक्ष एल्दाद नित्जेन ने बताया, 

G2G हायरिंग प्रोसेस में बहुत कम उम्र के भारतीय मजदूर आ गए. जिनमें से कई 20 साल के थे. जिन्होंने कभी कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में काम नहीं किया था. वे भारत में खेती और बाल काटने जैसे काम करते थे. और उनमें कुछ को तो हथौड़ा पकड़ना भी नहीं आता था. 

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एल्दाद नित्जेन के मुताबिक (B2B) मजदूरों का रिस्पांस ठीक था. लेकिन (G2G) के तहत हायर किए गए मजदूरों के चलते स्थिति खराब हो गई. इजरायली बिल्डरों ने उन्हें कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने से मना कर दिया. इससे भारतीय मजदूरों की इमेज खराब हो गई. जिसका असर (B2B) से हायर किए गए मजदूरों पर भी पड़ा. उन्होंने आगे बताया कि 500 से ज्यादा (G2G) मजदूर भारत वापस चले गए हैं.

वीडियो: दुनियादारी: इजरायल की आजादी का भारत से क्या कनेक्शन था?

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