'अमेरिका-इजरायल की यूनिवर्सिटी खाली करो, हमला करेंगे,' ईरानी विश्वविद्यालयों पर हमले के बाद बोला ईरान
Israel ने Iran की यूनिवर्सिटीज पर बमबारी की. इसमें कई रिसर्च सेंटर भी बर्बाद हो गए. अब ईरान ने चेतावनी दी है कि वो इजरायल की यूनिवर्सिटीज और पश्चिम एशिया के देशों में अमेरिका से जुड़ी यूनिवर्सिटीज को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई कर सकता है.

ईरान ने इजरायल और अमेरिका पर देश की यूनिवर्सिटीज पर हमले करने का आरोप लगाया है. इन हमलों में तेहरान की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ और इस्फहान की ‘इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी’ को निशाना बनाया गया. अब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी बदला लेने की कसम खाई है. IRGC ने चेतावनी दी कि इजरायल के विश्वविद्यालयों और अरब देशों में बने अमेरिका से जुड़े विश्वविद्यालयों को निशाना बनाया जाएगा.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने युद्ध के दौरान ‘जानबूझकर’ कई विश्वविद्यालयों और रिसर्च सेंटर्स पर हमला किया. X पर उन्होंने लिखा,
“यूनिवर्सिटी, रिसर्च सेंटर, ऐतिहासिक स्मारकों और जाने-माने वैज्ञानिकों को सिस्टमैटिक तरीके से निशाना बनाने का मकसद हमारे देश की वैज्ञानिक नींव और सांस्कृतिक विरासत को कमजोर बनाना था.”
इस्माइल बघाई ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में लगाए गए आरोपों को ‘बहाने’ और ‘महज मनगढ़ंत बातें’ कहकर खारिज कर दिया. गवर्नमेंट इन्फॉर्मेशन काउंसिल के हेड इलियास हजराती ने भी आरोप लगाया कि ‘हमलावर’ यूनिवर्सिटी और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन पर हमला करके ईरान के भविष्य को निशाना बना रहे हैं. X पर अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा,
“हमलावर छात्रों और स्कूली बच्चों का खून बहाकर, ईरान के भविष्य को निशाना बना रहे हैं. हमलों का मकसद ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को निशान बनाना है, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर और उसके अतीत को बर्बाद करके ईरान के वर्तमान को भी नुकसान पहुंचाया जा सके.”
उन्होंने आगे कहा कि ईरान का जवाब ‘दृढ़ और अटूट’ रहेगा.
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IRGC ने दी चेतावनी
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि वह इजरायल की यूनिवर्सिटीज और पश्चिम एशिया के देशों में अमेरिका से जुड़ी यूनिवर्सिटीज को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई कर सकता है. ईरानी सरकार से जुड़ी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने IRGC के हवाले से लिखा,
"इजरायली विश्वविद्यालय और पश्चिम एशिया में बने अमेरिकी विश्वविद्यालय हमारे लिए जायज टारगेट होंगे. इन विश्वविद्यालयों से जुड़े सभी कर्मचारियों, प्रोफेसरों और छात्रों को सलाह देते हैं कि वे अपनी जान बचाने के लिए यूनिवर्सिटीज से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहें."
इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर पर हुए हमले की कड़ी निंदा की थी. यह हमला शजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर किया गया था, जिसमें करीब 170 मासूम छात्रों और टीचर्स की मौत हो गई थी. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में बोलते हुए उन्होंने कहा,
“अगर वो (अमेरिका) यह कहते हैं कि ये हमला जानबूझकर और पहले से प्लान किया गया नहीं था, तो इसे माना नहीं जाना चाहिए. स्कूल को टारगेट करना एक वॉर क्राइम और इंसानियत के खिलाफ एक ऐसा जुर्म है, जिसकी सभी को साफ और बिना शर्त निंदा करनी चाहिए."
'इन अपराधियों को याद रखें'
दक्षिण अफ्रीका में ईरानी दूतावास ने दो अमेरिकी अधिकारियों का नाम जारी करते हुए दावा किया है कि इन अधिकारियों ने ही मीनाब के स्कूल पर मिसाइल दागने का आदेश दिया था. बयान में कहा गया,
“USS स्प्राउंस के कमांडर ली आर टेट और एग्जीक्यूटिव अधिकारी जेफरी ई यॉर्क ने तीन बार टोमाहॉक मिसाइलें दागने का आदेश दिया था, जिसके चलते मीनाब के एक स्कूल में 168 बेकसूर बच्चियों की मौत हो गई थी. क्या उनके अपने बच्चे नहीं हैं?”
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के मुताबिक, युद्ध की वजह से ईरान में कम से कम 600 शैक्षिक जगहों को नुकसान पहुंचा है या वे नष्ट हो गई हैं.
वीडियो: जंग के बीच रिलायंस के ईरान से तेल खरीदने का क्या सच है?

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