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ईरान की तरफ बढ़ रहा अमेरिकी जंगी जहाज का बेड़ा, अकेले पूरी सेना को निपटा सकता है

US-Iran Tension: अमेरिकी मीडिया के मुताबिक जंगी जहाज के इस बेड़े USS Abraham Lincoln को मध्य पूर्व तक पहुंचने में एक हफ्ते का समय लगेगा. अभी यह साउथ चाइना सी पर तैनात था.

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Iran protests US Strike group 3 reportedly moving towards middle east with cvn 72
यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर का पूरा स्ट्राइक ग्रुप. (File Photo: US Navy)
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सचिन कुमार पांडे
15 जनवरी 2026 (Published: 02:15 PM IST)
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ईरान में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंका के बीच अमेरिका अपना जंगी जहाज का एक बेड़ा मध्य-पूर्व की ओर भेज रहा है. यह कोई आम बेड़ा नहीं है, बल्कि अपने आप में किसी सेना को तबाह करने की क्षमता रखने वाला स्ट्राइक ग्रुप है. इस ग्रुप में दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों में से एक, USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर (CVN-72) भी शामिल है. इसके अलावा फाइटर जेट्स, मिसाइल सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और एंटी सबमरीन वॉरफेयर सिस्टम भी यह बेड़ा साथ लेकर चलता है.

अमेरिकी मीडिया न्यूज नेशन के मुताबिक पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रभाव वाले इलाके में भेज रहा है. इस कमांड के अंतर्गत मध्य-पूर्व भी आता है, जहां ईरान स्थित है. अमेरिकी मीडिया में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस स्ट्राइक ग्रुप को मध्य पूर्व तक पहुंचने में लगभग एक हफ्ते का समय लगेगा. मालूम हो कि ईरान में जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद हालात तेजी से खराब हो रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी ईरान को लगातार धमकी दे रहे हैं कि अगर उसने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की तो अमेरिका बीच में दखल देगा. ऐसे में अमेरिकी जंगी जहाज की मूवमेंट को युद्ध के बढ़ते खतरे के रूप में देखा जा रहा है.

कितना खतरनाक है बेड़ा?

अमेरिका जिस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 को ईरान की तरफ भेज रहा है, वह बेहद खतरनाक माना जाता है. ग्रुप में शामिल USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर (CVN-72), एक निमित्ज-क्लास का सुपरकैरियर है. यह अमेरिका का न्यूक्लियर पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है और दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों में से एक है.

आजतक के मुताबिक इसमें Carrier Air Wing Nine (CVW‑9) भी तैनात है, जिसमें फाइटर जेट के कई स्क्वाड्रन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, सर्विलांस सिस्टम और एंटी सबमरीन शामिल हैं. इसके अलावा स्ट्राइक ग्रुप में कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स हैं, जो दुश्मन के हमलों का मुहतोड़ जवाब देने के लिए काफी होती हैं. साथ ही क्रूजर और न्यूक्लियर अटैक सबमरीन भी इस ग्रुप में शामिल हो सकती हैं, जो टोमहॉक मिसाइलें दाग सकती हैं. बेड़े में कई सपोर्ट जहाज भी सप्लाई और एम्यूनिशन के लिए होते हैं.

यह भी पढ़ें- ईरान ने बंद किया एयरस्पेस, फैसला लागू होने से ठीक पहले इंडिगो की फ्लाइट ने किया एग्जिट

कुल मिलाकर यह स्ट्राइक ग्रुप अकेले ही बहुत ताकतवर है और दुश्मन पर बड़े पैमाने पर हमला कर सकता है. अमेरिका ने फिलहाल इसे साउथ चाइना सी पर तैनात कर रखा था. लेकिन अब इसे मध्य पूर्व की ओर भेज रहा है, जो इलाके में बढ़ते तनाव को दिखाता है. यानी अमेरिका ने संकेत दे दिया है कि अगर ईरान में हालात बिगड़ते हैं तो वह मिलिट्री एक्शन से भी पीछे नहीं हटेगा.

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