'नरक में स्वागत, ताबूत में वापस जाएंगे अमेरिकी सैनिक,' ईरानी अखबार की चेतावनी, हूती भी जंग में उतरे
अमेरिका ने West Asia में करीब 3,500 सैनिक तैनात कर दिए हैं. वहीं, यमन के ईरान-समर्थित Houthis विद्रोही भी जंग में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने Israel पर मिसाइल हमले की जिम्मेदारी ली है.

पश्चिम एशिया में जंग तेज होने के आसार हैं. अमेरिका ने इस इलाके में करीब 3,500 सैनिक तैनात कर दिए हैं. वहीं, यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोही भी जंग में शामिल हो गए हैं. हूती ने इजरायल पर मिसाइल हमले की जिम्मेदारी ली है. ईरान के अंग्रेजी अखबार 'तेहरान टाइम्स' ने अमेरिका को एक सख्त चेतावनी भी दी. अखबार ने कहा कि जो भी अमेरिकी सैनिक ईरान की जमीन पर कदम रखेंगे, वे ‘सिर्फ ताबूत में ही वापस जाएंगे’.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, USS त्रिपोली पर सवार लगभग 3,500 नौसैनिक और मरीन अब अपने ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुके हैं. USS त्रिपोली एक मॉडर्न ‘एम्फीबियस असॉल्ट शिप’ है, जो F-35 स्टील्थ फाइटर जेट और ऑस्प्रे जैसे एडवांस्ड एयरक्राफ्ट ऑपरेट करने में सक्षम है. इसे लगभग दो हफ्ते पहले तैनाती आदेश मिलने से पहले जापान में तैनात किया गया था. सैन डिएगो से USS बॉक्सर और दूसरी नौसैनिक इकाइयों समेत और भी मदद इस इलाके में भेजी जा रही है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ईरान में कई हफ्तों तक चलने वाले संभावित ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है. हालांकि, द वाशिंगटन पोस्ट ने अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए अपनी रिपोर्ट में बताया कि अभी भी साफ नहीं है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ईरान की जमीन पर सैनिकों की तैनाती को मंजूरी देंगे या नहीं.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वॉशिंगटन का मकसद जमीनी सेना भेजे बिना अपने मकसद पूरे करना है. साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप को बदलते हालात के लिए तैयार रहना चाहिए.
'नरक में आपका स्वागत है'
ईरान के अंग्रेजी अखबार ‘तेहरान टाइम्स’ ने 28 मार्च को ईरान पर किसी भी संभावित जमीनी हमले के खिलाफ अमेरिका को साफ चेतावनी दी है. ‘वेलकम टू हेल’ हेडलाइन के तहत पहले पेज पर एक मैसेज छपा है,
"ईरान की जमीन पर पैर रखने वाले अमेरिकी सैनिक सिर्फ ताबूत में ही वापस जाएंगे."

यह मैसेज वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव को दिखाता है, क्योंकि अमेरिका इस इलाके में सैनिकों की तैनाती कर रहा है. वाशिंगटन में सीमित जमीनी ऑपरेशन्स के बारे में चर्चा हो रही है. खबर यह भी है कि प्रेसिडेंट ट्रंप टारगेटेड मिशन्स के लिए ईरान के अंदर कुछ अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने में पर्सनल इंटरेस्ट दिखा रहे हैं, हालांकि अभी कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है.
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हूती विद्रोही जंग में शामिल
यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के इस जंग में शामिल होने से हालात और भी मुश्किल हो गए हैं. उन्होंने इजरायल की तरफ मिसाइल दागने की जिम्मेदारी ली है. हूतियों ने कहा कि वे तब तक अपना ऑपरेशन जारी रखेंगे जब तक सभी मोर्चों पर हमले खत्म नहीं हो जाते.
हूती विद्रोहियों के इस जंग में शामिल होने से ‘बाब अल-मंडेब स्ट्रेट’ की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, जो स्वेज नहर तक जाने वाला ग्लोबल ट्रेड का एक अहम समुद्री रास्ता है. दूसरी तरफ ‘होर्मुज स्ट्रेट’ अभी भी पूरी तरह से बंद है. एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि हूती समूह कमर्शियल जहाजों पर हमले कर सकते हैं. इससे दुनिया भर में एनर्जी की कीमतें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं.
वीडियो: दुनियादारी: अमेरिका ने हूती ठिकानों पर हमले क्यों शुरू किए?

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