'अमेरिका सबको मार देना चाहता था', ईरानी शिप पर टॉरपीडो अटैक की कहानी जिंदा बचे नाविक ने बताई
भारत में ईरान के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया. पोस्ट में हामिद मोमेनेह के इंटरव्यू के क्लीप को शेयर किया गया. जिसमें वो ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम से अमेरिकी हमले के बारे में बात कर रहे थे.

‘अमेरिका का मेन टारगेट हमारे वॉरशिप IRIS Dena के क्रू को मारना था.’ ये बताया है ईरान के IRIS Dena वॉरशिप पर सवार रहे जवान हामिद मोमेनेह ने. वह मार्च 2026 में अमेरिका के टॉरपीडो हमले में बच गए थे. IRIS Dena वही वॉरशिप है, जो भारत से एक नेवी एक्सरसाइज में भाग लेने के बाद ईरान लौट रहा था. बीच रास्ते में भारत की सीमा से सटे श्रीलंका के पानी में अमेरिकी टॉरपीडो का शिकार हो गया. इस हमले में करीब 84 ईरानी नाविकों की मौत हो गई थी.
इस हमले में हामिद मोमेनेह बच गए थे. भारत में ईरान के दूतावास ने ‘एक्स’ पर मोमेनेह के इंटरव्यू का एक क्लिप शेयर किया गया. इसमें वो ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम से अमेरिकी हमले के बारे में बात कर रहे थे. ईरानी दूतावास ने एक्स पर लिखा,
हिंद महासागर में IRIS Dena वॉरशिप पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किए गए एक अन्यायपूर्ण हमले की कहानी. Hamed Momeneh वॉरशिप पर मौजूद नाविकों में से एक हैं. इस जहाज को एक नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए भारत के विशाखापत्तनम बंदरगाह भेजा गया था. घर लौटते समय जब जहाज हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में चल रहा था, तभी उस पर हमला हो गया.

ईरानी दूतावास की ओर से शेयर किए गए वीडियो में हामिद मोमेनेह ने कहा,
सुबह के करीब 3:00 या 3:30 बज रहे थे, जब अचानक हम पर हमला हुआ. एक ऐसा हमला जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पूरी तरह खिलाफ था. यह कोई युद्धक्षेत्र नहीं था. हमें कोई चेतावनी भी नहीं मिली थी. यह हमला एक पनडुब्बी से बिना किसी चेतावनी के किया गया था.
हामिद मोमेनेह ने आगे वीडियो में बताया कि जब पहला टॉरपीडो आकर लगा, तब सभी कर्मचारी अपनी-अपनी जगहों पर तैनात थे. संयोग से उस समय हमें कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ. जहाज पर क्रू मेंबर के 104 सदस्य सवार थे. किसी ने भी जहाज नहीं छोड़ा. हर कोई अंत तक अपनी जगह पर डटा रहा. मोमेनेह ने आगे कहा कि अगर उनका मकसद सिर्फ जहाज को नुकसान पहुंचाना होता, तो वे जहाज के दूसरे हिस्सों को निशाना बना सकते थे लेकिन उनका मुख्य मकसद क्रू मेंबर्स को मारना था.
मोमेनेह ने बताया कि हमला होने के बावजूद वो अंत तक डटे रहे. उनके लिए Dena जहाज ईरान की धरती जैसा था और उसे छोड़कर जाने का कोई मतलब नहीं था. सेनाएं रात 11 बजे तक जहाज के साथ ही रहीं. इसके बाद उन्हें श्रीलंका के तट के पास के इलाकों तक पहुंचने के लिए समुद्र में कुछ दूर तक तैरना पड़ा था.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि ईरान ने 28 फरवरी को अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने के लिए परमिशन माना था. ऐसी खबरें हैं कि जिन जहाजों को डॉक करने के लिए परमिशन मिला था. वे सभी सुरक्षित रहे. 'IRIS Dena' को भी डॉक करने की परमिशन मिली थी. लेकिन उसने आगे का सफर करने का फैसला लिया. इसके बाद उसे अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से निशाना बना दिया.
यह भी पढ़ें: अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को 7 हफ्ते बीते, अभी तक सुपुर्दे-खाक क्यों नहीं हुए?
बता दें कि 'IRIS Dena' के डूबने से भारत में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था. ऐसा इसलिए क्योंकि, यह जहाज विशाखापत्तनम में एक नेवी एक्सरसाइज के बाद लौट रहा था. हालांकि, ये विवाद उस वक्त शांत हुआ, जब यह बात सामने आई कि नई दिल्ली ने ईरान के एक और जहाज को सुरक्षित पनाह दिया था.
वीडियो: दुनियादारी: अमेरिका-पाकिस्तान तैयार, लेकिन क्या ईरान पलट जाएगा?

