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अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को 7 हफ्ते बीते, अभी तक सुपुर्दे-खाक क्यों नहीं हुए?

अमेरिका-इजरायल के साझे हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. खामेनेई का अंतिम संस्कार न होने पर दुनिया भर के राजनीतिक हलकों में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.

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19 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 19 अप्रैल 2026, 11:18 PM IST)
Iran, Ayatollah Ali Khamenei
ईरानी अधिकारी खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक शहर मशहद पर चर्चा कर रहे हैं. (फोटो- इंडिया टुडे)
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ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत को करीब 7 हफ्ते बीत चुके हैं. अभी तक उनके पार्थिव शरीर को ‘सुपुर्द-ए-खाक’ (अंतिम संस्कार) नहीं किया गया है. इतने दिन बीत जाने के बाद भी खामेनेई का अंतिम संस्कार न होने पर दुनिया भर के राजनीतिक हलकों में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. यहां तक कि लोग खामेनेई के जिंदा होने के भी कयास लगाने लगे हैं. इस खबर में हम इन्हीं बातों पर चर्चा करेंगे कि ईरान ने अभी तक अली खामेनेई का अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया? और इसकी क्या वजह हो सकती है.

सबसे पहले बता दें कि अमेरिका-इजरायल के साझे हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. अब समझते हैं कि ईरान ने अभी तक उनका अंतीम संस्कार क्यों नहीं किया? 

इंडिया टुडे ने न्यूयॉर्क पोस्ट के हवाले से बताया, ईरान के बड़े आला-अधिकारी खामेनेई के अभी तक अंतिम संस्कार न करने के पीछे सुरक्षा कारणों और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों का हवाला दे रहे हैं. दरअसल, ईरानी अधिकारी एक बड़े पैमाने पर खामेनेई का अंतिम संस्कार सार्वजनिक रूप से करना चाहता है लेकिन आयोजन से जुड़े खतरों पर विचार कर रहा है. अधिकारियों को ऐसा डर है कि आयोजन में बड़े पैमाने पर लोग इकठ्ठा होंगे. ऐसे में उन्हें इजरायली हमले की आशंका के साथ-साथ भिड़ में अशांति फैल जाने का भी डर है.

न्यूयॉर्क पोस्ट खामेनेई के अंतिम संस्कार पर 'फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज' के बेहनम तालेबलू से बात की. तालेबलू ने अखबार को बताया कि ईरान के मौजूदा हालात को देखते हुए वहां का शासन ऐसा कोई कदम आगे बढ़ाने में हिचकिचाता हुआ नजर आ रहा है. तालेबलू ने आगे कहा,

‘सीधे शब्दों में कहें तो शासन इतना डरा हुआ और कमजोर है कि वह कोई जोखिम उठाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है.’

अपने इस बयान में तालेबलू ने अमेरिका-इजरायल हमले से ईरान में बढ़ी समस्याओं की ओर इशारा किया. बता दें कि खामेनेई की मौत के बाद ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ गया. ऐसे में खामेनेई का अंतिम संस्कार न होना ईरान की इस्लामिक परंपराओं एक अजीब स्थिति नजर आ रही है. ऐसे में तालेबलू ने ईरान के अंदरूनी हालतों और इनफॉर्मेशन के कंट्रोल पर भी चिंताओं की ओर इशारा किया है. 

साथ ही कहा कि ईरानी सरकार किसी भी तरह के सार्वजनिक प्रोग्राम के दौरान होने वाले विरोध प्रदर्शनों या भीड़ इकट्ठा होने पर सतर्कता बरत रही है. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, 4 मार्च 2026 को तीन दिवसीय राजकीय अंतिम संस्कार करने की योजना बनाई थी लेकिन अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले तेज होने की वजह से इसे टाल दिया गया. बाद में अधिकारियों ने कहा कि इस देरी का एक कारण ‘ज्यादा भीड़ जुटने’ की उम्मीद भी थी लेकिन तब से अब तक कोई तारीख तय नहीं हो पाई. बता दें कि ईरानी अधिकारी खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक शहर मशहद पर चर्चा कर रहे हैं. 

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