सेना के तीनों अंगों के मुखिया में ये एक बात कॉमन है
ऐसा सिर्फ दूसरी बार हुआ है.
Advertisement

तीनों सेनाओं के चीफ़ NDA के सेम बैच से निकले हैं.
Quick AI Highlights
Click here to view more
लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवने 31 दिसंबर को देश के नए आर्मी चीफ़ बन गए. उन्होंने जनरल बिपिन रावत की जगह ली है. जनरल बिपिन रावत को नई जिम्मेदारी मिली है. वो देश के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़(CDS) बनाए गए हैं.
नरवने श्रीलंका गई शांति सेना का हिस्सा थे. उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी काफी समय तक काम किया है. पुणे के रहने वाले लेफ्टिनेंट जनरल नरवने सिख लाइट इंफेन्ट्री के ऑफिसर हैं. इस रेजिमेंट से आर्मी चीफ़ के पद तक पहुंचने वाले वो तीसरे अधिकारी है. जनरल वीपी मलिक और बिक्रम सिंह के बाद.

नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी की बिल्डिंग.
लेफ्टिनेंट जनरल मनोज नरवने के आर्मी चीफ़ बनने के साथ ही एक अनोखा संयोग बना है. अब देश की तीनों सेनाओं के मुखिया नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी (NDA) के एक ही बैच के ट्रेनी हैं. नौसेना के चीफ़ एडमिरल करमबीर सिंह, एयरफोर्स चीफ़ राकेश कुमार सिंह भदौरिया और आर्मी चीफ़ मनोज नरवने 1976 में एकसाथ NDA पहुंचे थे.
NDA इंडियन आर्म्ड फोर्सेज की संयुक्त ट्रेनिंग एकेडमी है, जहां थलसेना, नौसेना और वायुसेना के कैडेट तैयार किए जाते हैं. इसके बाद उन्हें संबंधित सेनाओं की ट्रेनिंग के लिए दूसरी एकेडमी में भेजा जाता है. NDA पुणे के पास खडकवासला में है.
एडमिरल करमबीर सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल मनोज नरवने का साथ NDA में आने से पहले का है. ये दोनों साथ में स्कूल में भी पढ़े थे. एडमिरल करमबीर सिंह ने 31 मई, 2019 को नौसेना के मुखिया का कार्यभार संभाला था. जबकि राकेश कुमार सिंह भदौरिया 30 सितंबर, 2019 को एयर चीफ़ मार्शल बने थे.
एयरफोर्स चीफ़ राकेश कुमार सिंह भदौरिया, नौसेना चीफ़ एडमिरल करमबीर सिंह और आर्मी चीफ़ मनोज नरवने (बाएं से दाएं) 1976 में एकसाथ NDA पहुंचे थे.
44 सालों के बाद ये तीनों देश की सेना के तीनों अंगों के सबसे बड़े पद पर पहुंच चुके हैं. NDA में तीन साल का कोर्स पूरा करने के बाद इनकी ट्रेनिंग संबंधित एकेडमी में हुई थी. उसके बाद उन्हें सेना में बतौर ऑफ़िसर कमीशन किया गया था.
इससे पहले ये दुर्लभ संयोग दिसंबर 1991 में हुआ था. जब NDA की पासिंग आउट परेड में जनरल सुनीत फ़्रांसिस रॉड्रिग्स, एडमिरल एल रामदास और एयर चीफ़ मार्शल निर्मल चंद्र सूरी एक साथ हिस्सा ले रहे थे. ये तीनों भी NDA में एक-दूसरे के बैचमेट थे.
वीडियो : इंटिग्रेटेड बैटल ग्रुप: जो दुश्मन देश की सेना पर टुकड़ों-टुकड़ों में हमला करते हैं
नरवने श्रीलंका गई शांति सेना का हिस्सा थे. उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी काफी समय तक काम किया है. पुणे के रहने वाले लेफ्टिनेंट जनरल नरवने सिख लाइट इंफेन्ट्री के ऑफिसर हैं. इस रेजिमेंट से आर्मी चीफ़ के पद तक पहुंचने वाले वो तीसरे अधिकारी है. जनरल वीपी मलिक और बिक्रम सिंह के बाद.

नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी की बिल्डिंग.
लेफ्टिनेंट जनरल मनोज नरवने के आर्मी चीफ़ बनने के साथ ही एक अनोखा संयोग बना है. अब देश की तीनों सेनाओं के मुखिया नेशनल डिफ़ेंस एकेडमी (NDA) के एक ही बैच के ट्रेनी हैं. नौसेना के चीफ़ एडमिरल करमबीर सिंह, एयरफोर्स चीफ़ राकेश कुमार सिंह भदौरिया और आर्मी चीफ़ मनोज नरवने 1976 में एकसाथ NDA पहुंचे थे.
NDA इंडियन आर्म्ड फोर्सेज की संयुक्त ट्रेनिंग एकेडमी है, जहां थलसेना, नौसेना और वायुसेना के कैडेट तैयार किए जाते हैं. इसके बाद उन्हें संबंधित सेनाओं की ट्रेनिंग के लिए दूसरी एकेडमी में भेजा जाता है. NDA पुणे के पास खडकवासला में है.
एडमिरल करमबीर सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल मनोज नरवने का साथ NDA में आने से पहले का है. ये दोनों साथ में स्कूल में भी पढ़े थे. एडमिरल करमबीर सिंह ने 31 मई, 2019 को नौसेना के मुखिया का कार्यभार संभाला था. जबकि राकेश कुमार सिंह भदौरिया 30 सितंबर, 2019 को एयर चीफ़ मार्शल बने थे.
एयरफोर्स चीफ़ राकेश कुमार सिंह भदौरिया, नौसेना चीफ़ एडमिरल करमबीर सिंह और आर्मी चीफ़ मनोज नरवने (बाएं से दाएं) 1976 में एकसाथ NDA पहुंचे थे.44 सालों के बाद ये तीनों देश की सेना के तीनों अंगों के सबसे बड़े पद पर पहुंच चुके हैं. NDA में तीन साल का कोर्स पूरा करने के बाद इनकी ट्रेनिंग संबंधित एकेडमी में हुई थी. उसके बाद उन्हें सेना में बतौर ऑफ़िसर कमीशन किया गया था.
इससे पहले ये दुर्लभ संयोग दिसंबर 1991 में हुआ था. जब NDA की पासिंग आउट परेड में जनरल सुनीत फ़्रांसिस रॉड्रिग्स, एडमिरल एल रामदास और एयर चीफ़ मार्शल निर्मल चंद्र सूरी एक साथ हिस्सा ले रहे थे. ये तीनों भी NDA में एक-दूसरे के बैचमेट थे.
वीडियो : इंटिग्रेटेड बैटल ग्रुप: जो दुश्मन देश की सेना पर टुकड़ों-टुकड़ों में हमला करते हैं

