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UN में पाक ने उठाया कश्मीर का मुद्दा, भारत बोला- 'आतंकी भेजना बंद करो शांति कायम हो जाएगी'

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने फिर से कश्मीर का राग अलापा है.

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India reply to Pakistan on Kashmir
पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ और संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रथम सचिव मिजिटो विनिटो. (ANI)
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धीरज मिश्रा
24 सितंबर 2022 (Updated: 24 सितंबर 2022, 01:13 PM IST)
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भारत ने करारा जवाब दिया है. भारत ने कहा कि जो देश अपने पड़ोसियों के साथ शांति कायम करने का दावा करता हो, वह कभी भी अपनी जमीन पर आतंकवादियों को शरण नहीं देगा और न ही पड़ोसी मुल्क में आतंकवाद के लिए फंडिंग करेगा.

भारत ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ के उस बयान पर ये प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था और कहा था कि भारत को इसका न्यायसंगत और स्थायी समाधान निकालना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव मिजिटो विनिटो ने कहा, 

'अफसोस की बात है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भारत पर झूठे आरोप लगाने के लिए इस महत्वपूर्ण मंच को चुना है. उन्होंने अपने देश के अनैतिक कार्यों को छिपाने और भारत के खिलाफ कार्रवाई को सही ठहराने के लिए ऐसा किया है, जिसे दुनिया अस्वीकार्य मानती है.'

शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में दावा किया था कि पाकिस्तान भारत के साथ शांति चाहता है. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कश्मीर का राग अलापा था. उन्होंने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत कश्मीर मुद्दे के उचित और निष्पक्ष समाधान के माध्यम से ही शांति कायम की जा सकती है.

इस पर भारत ने कहा, 

'जो देश अपने पड़ोसियों के साथ शांति स्थापित करने का दावा करता है, वह कभी भी सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित नहीं करेगा, ना ही वह भयावह मुंबई आतंकी हमले के गुनहगारों को शरण देगा.'

विनिटो ने कहा कि ऐसा देश पड़ोसियों की भूमि हड़पने की कोशिश नहीं करेगा और न ही दूसरे की भूमि को अपना बताकर उस पर कब्जा करने की कोशिश करेगा.

भारतीय प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र में आगे कहा कि यह सिर्फ एक पड़ोसी का मामला नहीं है, जिसके बारे में हमने आज झूठे दावे सुने हैं. यह मानवाधिकारों का मामला है, यह अल्पसंख्यकों के अधिकार और बुनियादी शालीनता का मामला है.

भारत ने आगे कहा, 'हम उस मानसिकता के बारे में क्या ही कह सकते हैं जो (पाकिस्तान) अपने एसोपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के तहत अल्पसंख्यक समुदाय के हजारों युवा महिलाओं को अगवा कर लेता है? भारत ने जोर देकर कहा है कि भारतीय उपमहाद्वीप में शांति, सुरक्षा और प्रगति होनी चाहिए. इसे हर स्तरों पर दोहराया गया है और इसे हकीकत में तब्दील किया जा सकता है.'

भारत ने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति तभी हो सकती है जब क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद खत्म होगा, जब सरकार खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तरों और अपने लोगों के बीच निर्दोष साबित करेगी. उन्होंने कहा कि ये लक्ष्य तभी संभव हो पाएगा जब पड़ोसी मुल्क अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार बंद करेगा और उन्हें प्रताड़ित नहीं किया जाएगा.

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