इमरान खान ने आर्मी और सरकार पर ऐसा क्या कहा, जो अरेस्ट होने की नौबत आ गई
इमरान खान पर ऐंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है.

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर ऐंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. उनके ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी. हालांकि, इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने फिलहाल के लिए उन्हें राहत दे दी है. इमरान की गिरफ़्तारी पर 25 अगस्त तक के लिए रोक लगा दी है.
अब ये समझते हैं कि इमरान पर ये केस लगा क्यों? क्या है इसके पीछे की कहानी?
इस कहानी की शुरुआत हुई थी, 20 अगस्त 2022 को. इमरान खान इस्लामाबाद के फातिमा जिन्ना पार्क में एक रैली को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने इस्लामाबाद पुलिस और एक जज की निंदा की. साथ ही उन्होंने सत्ताधारी नेताओं को चोर कहा. इमरान ने इस दौरान उनके सहयोगी और पार्टी के नेता शाहबाज गिल की गिरफ्तारी की भी निंदा की.
इमरान इतने पर ही नहीं रुके. उन्होंने इसी रैली में पाकिस्तान आर्मी को भी लपेटे में ले लिया. इमरान अक्सर अपने भाषणों में आर्मी के लिए ‘न्यूट्रल्स’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं. इस बार भी उन्होंने यही टर्म इस्तेमाल करते हुए आर्मी की निंदा की. उन्होंने कहा
‘मैं अपने न्यूट्रल्स से कहना चाहता हूं. कि आप पाकिस्तान, उसके लोगों और इन्साफ के लिए खड़े हों. न कि इन चोरों के साथ खड़े हों.’
यहां इमरान का चोरों से मतलब पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं से था. इमरान ने आगे कहा कि आप हमेशा न्यूट्रल होने की बात करते हो, लेकिन क्या आप वाक़ई न्यूट्रल हो?
इस भाषण के बाद इमरान पर आरोप लगा कि उन्होंने देश का माहौल खराब करने की कोशिश की और शांति-व्यवस्था भंग करने की साजिश रची. ये भी कि उन्होंने कई बड़े अधिकारियों को धमकाया भी है.
इसपर बड़ा विवाद हुआ. इस भाषण के लिए उनके ख़िलाफ़ ऐंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. फिर ख़बर आई कि इमरान की गिरफ्तारी होगी.
ख़बर आते ही उनके समर्थक उनके घर के सामने इकट्ठे होने लगे. धमकी दी कि अगर इमरान गिरफ्तार हुए तो इसका सही परिणाम देखने को नहीं मिलेगा. बड़े पैमाने पर आन्दोलन किया जाएगा.
इमरान के घर के पास कुछ पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे. उनका कहना है कि वे कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए यहां तैनात किए गए हैं न कि इमरान खान की गिरफ्तारी के लिए. एंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत गिरफ्तारी होना लगभग तय माना जाता है. इमरान को भी गिरफ्तारी का डर था. इसलिए उन्होंने गिरफ्तारी के पहले ही इस्लामाबाद हाई कोर्ट में ज़मानत की अपील कर दी थी. इस याचिका में कहा गया कि सरकार झूठे आरोपों के तहत इमरान खान की गिरफ्तारी करना चाहती है. गिरफ्तारी के लिए सरकार के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं. ताज़ा अपडेट ये है कि इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इमरान को गुरुवार तक के लिए राहत दे दी है. लेकिन ये राहत कब तक बरकरार रहेगी, दावे से नहीं कहा जा सकता.
सोमालिया भी आज दुनिया की बड़ी ख़बरों में बना रहा. सोमालिया की राजधानी मोगादिशु के होटल हयात में अल-शबाब के आतंकियों ने क़ब्ज़ा कर लिया था. 30 घंटों तक चली मुठभेड़ के बाद होटल को छुड़ा लिया गया है. इस घटना में अब तक 21 लोगों की मौत और 117 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है. ये पुष्टि सोमालिया के स्वास्थ्य मंत्री अली हाजी अदन ने खुद की है. पुलिस की तरफ़ से दी गई जानकारी के अनुसार, ऑपरेशन के बाद 106 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. इस ऑपरेशन में सोमालिया के 10 सैनिक मारे गए. जबकि सभी आतंकियों को ढेर कर दिया गया.
होटल हयात में कब्ज़े की ये वारदात शुक्रवार की शाम से ही शुरू हो गई थी. शुक्रवार की शाम को अल-शबाब ने पहले बम फिस्फोट किया. उसके बाद गोलीबारी की और होटल के अंदर घुसने में कामयाब हुए. अंदर घुसते ही उन्होंने वहां मौजूद लोगों को बंधक बना लिया.
20 अगस्त को इस बात की पुष्टि हुई कि ये कब्ज़ा अल-शबाब ने किया है. अल-शबाब के प्रवक्ता शनिवार को मीडिया को बताया कि हमला उसके लड़ाकों ने किया है.
अल शबाब संगठन 2006 में बना था. इसका पूरा नाम हरकत अल-शबाब अल-मुजाहिद्दीन है. इसका संबंध अल-कायदा से बताया जाता है. इसका मकसद सोमालिया की सरकार को खत्म करके अपना शासन शुरू करना है. अल-शबाब का प्रभाव सोमालिया, इथियोपिया और केन्या में भी है और इसका जाल अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका तक फैला हुआ है. अमेरिका ने 2008 में अल-शबाब को आतंकी संगठन घोषित किया था.
दुनिया की ख़बरों में आज यूएई ने भी सुर्खी बटोरी. UAE ने छह साल बाद ईरान में फिर से अपना राजदूत तैनात करने का ऐलान किया है. UAE की सरकारी समाचार एजेंसी WAM के अनुसार, ईरान में यूएई के राजदूत सैफ मोहम्मद अल जाबी आने वाले दिनों में तेहरान लौटेंगे. पिछले हफ्ते UAE और ईरान के विदेश मंत्रियों ने टेलीफोन पर बातचीत की थी और संबंधों को सुधारने की चर्चा की थी.
ईरान से खाड़ी देशों की तल्खी पिछले कुछ वक्त में कम होती नज़र आई है. पिछले हफ्ते, कुवैत ने 2016 के बाद पहली बार ईरान में एक नया राजदूत नियुक्त किया. वहीं सऊदी अरब ने बगदाद की मध्यस्थता वाली वार्ता में ईरान के साथ तनाव खत्म करने के संकेत दिखाए हैं.
दरअसल, 2016 में सऊदी अरब ने शिया धर्मगुरु अयातुल्ला निम्र अल-निम्र को फांसी दी. निम्र अल-निम्र को आतंकवाद के मामले में दोषी ठहराया गया था. वो सऊदी सहित कई खाड़ी देशों की खुलकर निंदा करता था. उसकी मुख्य वजह थी, इन सुन्नी बाहुल्य देशों में शियाओं के ख़िलाफ़ ज़ुल्म होना. फांसी के बाद ईरानी प्रदर्शनकारियों ने खाड़ी देशों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन शुरू किए. इन प्रदर्शनों का असर खाड़ी देशों के साथ ईरान के रिश्ते पर भी पड़ा. रिश्तों में दूरियां आईं. लेकिन हालिया घटनाक्रम बताता है कि अब ईरान, खाड़ी देशों के साथ अपने रिश्ते ठीक करने को लेकर गंभीर है.
जापान के पूर्व पीएम की हत्या में इस चर्च का क्या कनेक्शन है?

