देवरिया कांड: प्रेम यादव के घर पर 'अवैध निर्माण' का नोटिस चिपका, अखिलेश ने सवाल उठाया
नोटिस में लिखा है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर अवैध तरीके से कब्जा किया गया है. माना जा रहा है कि प्रशासन वहां बुलडोजर चलवा सकता है.

देवरिया हत्याकांड मामले (Deoria Murder Case) में मृतक प्रेम यादव (Prem Yadav) के घर के बाहर अवैध निर्माण का नोटिस लगाया गया है. लिखा है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर अवैध तरीके से कब्जा किया गया है. माना जा रहा है कि प्रशासन वहां बुलडोजर चलवा सकता है. प्रेम यादव के घरवालों पर सत्यप्रकाश दुबे परिवार के पांच लोगों की हत्या का आरोप है. प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इशारों-इशारों में योगी सरकार को घेरा है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देवरिया प्रशासन ने 6 अक्टूबर की शाम प्रेम यादव के घर पर नोटिस चिपकाया. नोटिस प्रेम यादव के पिता के नाम पर है. इसमें सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने के लिए 31 हजार 920 रुपए जमा करने का निर्देश दिया गया है. साथ ही 7 अक्टूबर को तहसीलदार की कोर्ट में पेश होकर जवाब देने को कहा गया है. ऐसा ना किया तो एकपक्षीय आदेश जारी किया जाएगा.

मामले को लेकर अखिलेश यादव ने पोस्ट में लिखा,
“देवरिया कांड में अगर किसी भी पक्ष के साथ अन्याय हुआ तो ये भी एक अपराध होगा. शासन-प्रशासन का दायित्व है कि वो वातावरण को तनावमुक्त रखे और ऐसा कोई भी काम न करे जो माहौल बिगाड़ सकता है. ऐसी वारदातें किसी सत्ता के लिए सियासी फायदा उठाने का मौका नहीं होनी चाहिए.”
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छह लोगों की हत्या हुई थी2 अक्टूबर को देवरिया के रुद्रपुर कोतवाली थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव में पहले पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद यादव की हत्या हुई. उसका बदला लेने के लिए सत्य प्रकाश दुबे, उनकी पत्नी दो बेटी और एक बेटे समेत पांच लोगों की हत्या कर दी गई. जमीन विवाद में हुए इस हत्याकांड में दोनों पक्षों (प्रेमचंद्र यादव और सत्यप्रकाश दुबे) की ओर से 33 नामजद और 50 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कराया गया.
प्रशासन ने आरोपियों की प्रॉपर्टी की पैमाइश का आदेश दिया ताकि उनके अवैध कब्जे या अवैध निर्माण की जांच हो सके. कार्रवाई के तहत 3 अक्टूबर को राजस्व टीम आरोपियों के घर पहुंची. जिला और तहसील प्रशासन के अफसरों ने प्रेम यादव के दो मंजिला मकान और खेत की नाप-जोख (पैमाइश) की. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्व टीम को जांच में पता चला है कि प्रेम यादव और उसके परिवार के नाम उतनी जमीनें नहीं हैं, जितनी पर उन्होंने कब्जा कर रखा है.

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