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IIM अहमदाबाद में मस्जिद और संस्कृत को लेकर हुई बंपर बहस, जानिए पूरी कहानी

नए LOGO पर फैकल्टी बेहद नाराज, कुमार मंगलम बिड़ला को लिखा पत्र

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1 अप्रैल 2022 (अपडेटेड: 1 अप्रैल 2022, 06:55 AM IST)
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फोटो क्रेडिट: IIMA
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIMA) अपने मौजूदा लोगो (IIMA LOGO) में बदलाव करने जा रहा है. और यह खबर बाहर आते ही जबरदस्त बवाल मच गया है. संस्‍थान के प्रोफेसर ही इस फैसले के खिलाफ खड़े हो गए हैं. प्रोफेसर्स ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को पत्र लिखकर लोगो बदलने के फैसले पर विरोध जताया है. इनका कहना है कि इस फैसले से भविष्य में संस्थान की छवि पर बुरा असर पड़ सकता है. विरोध क्यों? IIMA के प्रोफेसर्स का कहना है कि संस्थान के नए लोगो से अहमदाबाद की सिदी सैय्यद मस्‍जिद की जाली की तस्‍वीर और संस्कृत के श्‍लोक ‘विद्या विनियोगाद्विकासः’ को हटाया जा रहा है. ये दोनों संस्‍थान की संस्कृति के प्रतीक हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक प्रोफेसर्स ने IIMA के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला को लिखे पत्र में कहा है,
'लोगो में मौजूद सिदी सैयद मस्जिद की जाली और संस्कृत सूत्र वाक्य हमारी पहचान हैं. ये भारतीय लोकाचार को दर्शाते हैं. ये भारतीयता की पहचान हैं. ये हमारी विद्या और संस्थान से जुड़ाव को दर्शाते है...इसमें बदलाव करना हमारी पहचान पर प्रहार करने के समान है...लोगो में बदलाव करने से भविष्य में IIMA के ब्रांड पर भी असर पड़ेगा.'
इस पत्र में आगे लिखा है,
'IIMA की फैकल्टी को यह कभी नहीं बताया गया कि लोगो को फिर से डिजाइन करने की जरूरत है. न ही लोगो में बदलाव करने को लेकर कोई समिति बनाई गई थी...इस बारे में फैकल्टी से कोई राय भी नहीं मांगी गई, एकेडमिक काउंसिल या फैकल्टी से जुड़ी किसी अन्य कमेटी में भी इसे लेकर कोई प्रेजेंटेशन नहीं दिया गया.'
पत्र में फैकल्टी की तरफ से यह भी कहा गया है कि उन्हें लोगो में बदलाव के बारे में 4 मार्च को एकेडमिक काउंसिल की एक बैठक में पहली बार बताया गया. और इसी दौरान यह भी जानकारी दी गई कि नए लोगो को लेकर 2 LOGO का प्रस्ताव दिया गया था, इनमें से एक घरेलू और दूसरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल किया जाएगा.
पूर्व निदेशक भी उतरे विरोध में आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व निदेशक बकुल ढोलकिया ने भी लोगो बदलने के फैसले का खुलकर विरोध किया है. इंडिया टुडे मुताबिक उन्होंने कहा,
'लोगो किसके इशारे पर और क्यों बदला जा रहा है? इसकी क्या जरूरत है? IIMA के Logo से संस्कृत शब्द हटाने की क्या जरूरत है? वर्ष 1961 में IIMA की स्थापना डॉ. विक्रम साराभाई ने की थी, तब यह Logo उन्होंने ही दिया था. इसे बदलना संस्थान के सालों पुराने कल्चर, मानदंडों और प्रथाओं के साथ खिलवाड़ करना है.'
ढोलकिया ने आगे कहा,
'इस तरह का निर्णय लेते समय IIMA की फैकल्टी के डेमोक्रेटिक अधिकारों से भी समझौता किया गया है. हैरानी की बात यह है कि बोर्ड ने उस प्रस्ताव पर विचार किया, जो एकेडमिक काउंसिल की ओर से नहीं भेजा गया था. ऐसा लगता है कि संस्थान की दशकों पुरानी संस्कृति खत्‍म हो रही है.'
IIMA के पूर्व निदेशक बकुल ढोलकिया ने यह जानकारी भी दी कि संस्थान के करीब 45 फैकल्टी मेंबर्स ने कुमार मंगलम बिड़ला को भेजे पत्र पर दस्तखत किए हैं. IIMA का LOGO कब अपनाया गया था आईआईएम अहमदाबाद का वर्तमान लोगो साल 1961 में संस्थान की स्थापना के समय अपनाया गया था. इसमें 'ट्री ऑफ लाइफ' का मूल भाव है, जो अहमदाबाद में सिदी सैय्यद मस्जिद की एक उत्कृष्ट नक्काशीदार पत्थर की जाली से प्रेरित है. इसमें संस्कृत का श्लोक 'विद्या विनियोगद्विकास' लिखा हुआ है, जिसका मतलब है 'विद्या के लेनदेन से विकास होता है'.

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