इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIMA) अपने मौजूदा लोगो (IIMA LOGO) मेंबदलाव करने जा रहा है. और यह खबर बाहर आते ही जबरदस्त बवाल मच गया है. संस्थान केप्रोफेसर ही इस फैसले के खिलाफ खड़े हो गए हैं. प्रोफेसर्स ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स कोपत्र लिखकर लोगो बदलने के फैसले पर विरोध जताया है. इनका कहना है कि इस फैसले सेभविष्य में संस्थान की छवि पर बुरा असर पड़ सकता है. विरोध क्यों? IIMA केप्रोफेसर्स का कहना है कि संस्थान के नए लोगो से अहमदाबाद की सिदी सैय्यद मस्जिदकी जाली की तस्वीर और संस्कृत के श्लोक ‘विद्या विनियोगाद्विकासः’ को हटाया जारहा है. ये दोनों संस्थान की संस्कृति के प्रतीक हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिकप्रोफेसर्स ने IIMA के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला को लिखेपत्र में कहा है, 'लोगो में मौजूद सिदी सैयद मस्जिद की जाली और संस्कृत सूत्र वाक्यहमारी पहचान हैं. ये भारतीय लोकाचार को दर्शाते हैं. ये भारतीयता की पहचान हैं. येहमारी विद्या और संस्थान से जुड़ाव को दर्शाते है...इसमें बदलाव करना हमारी पहचानपर प्रहार करने के समान है...लोगो में बदलाव करने से भविष्य में IIMA के ब्रांड परभी असर पड़ेगा.' इस पत्र में आगे लिखा है, 'IIMA की फैकल्टी को यह कभी नहीं बतायागया कि लोगो को फिर से डिजाइन करने की जरूरत है. न ही लोगो में बदलाव करने को लेकरकोई समिति बनाई गई थी...इस बारे में फैकल्टी से कोई राय भी नहीं मांगी गई, एकेडमिककाउंसिल या फैकल्टी से जुड़ी किसी अन्य कमेटी में भी इसे लेकर कोई प्रेजेंटेशन नहींदिया गया.'पत्र में फैकल्टी की तरफ से यह भी कहा गया है कि उन्हें लोगो में बदलाव के बारे में4 मार्च को एकेडमिक काउंसिल की एक बैठक में पहली बार बताया गया. और इसी दौरान यह भीजानकारी दी गई कि नए लोगो को लेकर 2 LOGO का प्रस्ताव दिया गया था, इनमें से एकघरेलू और दूसरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल किया जाएगा.पूर्व निदेशक भी उतरे विरोध में आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व निदेशक बकुल ढोलकिया नेभी लोगो बदलने के फैसले का खुलकर विरोध किया है. इंडिया टुडे मुताबिक उन्होंने कहा,'लोगो किसके इशारे पर और क्यों बदला जा रहा है? इसकी क्या जरूरत है? IIMA के Logoसे संस्कृत शब्द हटाने की क्या जरूरत है? वर्ष 1961 में IIMA की स्थापना डॉ. विक्रमसाराभाई ने की थी, तब यह Logo उन्होंने ही दिया था. इसे बदलना संस्थान के सालोंपुराने कल्चर, मानदंडों और प्रथाओं के साथ खिलवाड़ करना है.' ढोलकिया ने आगे कहा,'इस तरह का निर्णय लेते समय IIMA की फैकल्टी के डेमोक्रेटिक अधिकारों से भी समझौताकिया गया है. हैरानी की बात यह है कि बोर्ड ने उस प्रस्ताव पर विचार किया, जोएकेडमिक काउंसिल की ओर से नहीं भेजा गया था. ऐसा लगता है कि संस्थान की दशकोंपुरानी संस्कृति खत्म हो रही है.' IIMA के पूर्व निदेशक बकुल ढोलकिया ने यहजानकारी भी दी कि संस्थान के करीब 45 फैकल्टी मेंबर्स ने कुमार मंगलम बिड़ला को भेजेपत्र पर दस्तखत किए हैं. IIMA का LOGO कब अपनाया गया था आईआईएम अहमदाबाद का वर्तमानलोगो साल 1961 में संस्थान की स्थापना के समय अपनाया गया था. इसमें 'ट्री ऑफ लाइफ'का मूल भाव है, जो अहमदाबाद में सिदी सैय्यद मस्जिद की एक उत्कृष्ट नक्काशीदारपत्थर की जाली से प्रेरित है. इसमें संस्कृत का श्लोक 'विद्या विनियोगद्विकास' लिखाहुआ है, जिसका मतलब है 'विद्या के लेनदेन से विकास होता है'.