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‘आपको नहीं पसंद, तो मत देखिए’, सुप्रीम कोर्ट का न्यूज चैनलों के खिलाफ अर्जी पर सुनवाई से इनकार

कोर्ट ने पूछा- 'आपको ऐसे चैनल देखने के लिए कौन मजबूर करता है?'

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8 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 8 अगस्त 2023, 12:04 AM IST)
"If you don't like them, don't watch them", Supreme Court dismisses PILs for guidelines to regulate TV news channels
जस्टिस ओका ने कहा कि जो लोग टीवी पर मौजूद कॉन्टेंट से आहत हैं, उनके पास कानूनी उपचार मौजूद हैं. (फोटो- आजतक)
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सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज चैनलों पर निगरानी की मांग करने वाली एक अर्जी पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट में न्यूज चैनलों के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई थी. याचिका में कहा गया था कि न्यूज चैनलों की निगरानी के लिए बोर्ड या ट्रिब्यूनल बनाया जाए, जिससे चैनल देखने वालों की शिकायतों को दूर किया जा सके. याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने कहा कि दर्शक ऐसे चैनल नहीं देखने के लिए स्वतंत्र हैं, जो उन्हें पसंद नहीं.

'आपके पास टीवी का बटन नहीं दबाने की आजादी है'

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस ओका ने कहा,

“आपको ऐसे चैनल देखने के लिए कौन मजबूर करता है? अगर आपको नहीं पसंद है, तो आप उन चैनल को मत देखिए. जब कुछ गलत दिखाया जाता है, तो वो धारणा का मामला है. क्या अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है? भले ही हम कहें कि मीडिया ट्रायल नहीं होगा, लेकिन इंटरनेट पर मौजूद चीजों को हम कैसे रोक सकते हैं? हम ऐसी याचिका पर सुनवाई कैसे करें? आपके पास टीवी का बटन ना दबाने की आजादी है.”

जस्टिस ओका ने आगे कहा कि जो लोग टीवी पर मौजूद कॉन्टेंट से आहत हैं, उनके पास कानूनी उपचार उपलब्ध हैं.

उन्होंने आगे कहा,

“हल्के अंदाज में कहें तो सोशल मीडिया, ट्विटर पर जजों के बारे में क्या-क्या कहा जाता है, हम इसे गंभीरता से नहीं लेते. गाइडलाइंस कौन बनाएगा? याचिकाकर्ताओं से आग्रह है कि वो इन समाचार चैनलों को ना देखें, और अपने समय के साथ कुछ बेहतर करें.”

न्यूज चैनलों के खिलाफ किसने दाखिल की थी याचिका?

बता दें कि दिल्ली के वकील रीपक कंसल ने सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की थीं. उन्होंने ‘सेंसेशनल रिपोर्टिंग’ करने वाले न्यूज चैनलों की निगरानी के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाने की बात कही थी.

यही नहीं फिल्म निर्माता नीलेश नवलखा और कार्यकर्ता नितिन मेमाने द्वारा भी एक याचिका कोर्ट में दाखिल की गई थी. याचिका में कहा गया था कि मीडिया नेटवर्क और टेलीविजन चैनलों के खिलाफ शिकायतों को सुनने और त्वरित निवारण के लिए एक ‘मीडिया ट्रिब्यूनल’ का गठन किया जाए. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए बेंच ने वकील को हाई कोर्ट जाने की छूट दी.

जस्टिस ओका ने कहा कि आप हाई कोर्ट क्यों नहीं जाते? हर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही क्यों की जाए? क्या आपको ये लगता है कि हाई कोर्ट ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए सक्षम नहीं हैं. ये मत भूलिए कि हम सब भी हाई कोर्ट से होकर ही आते हैं.

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