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'IC 814' में क्या बदलाव हुआ? सरकार से बातचीत के बाद Netflix ने बताया

IC 814 सीरीज को लेकर जारी विवाद के बीच सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने नेटफ्लिक्स इंडिया की कॉन्टेंट हेड मोनिका शेरगिल को समन किया था.

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IC814 सीरीज पर पिछले कई दिनों से विवाद जारी है.
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साकेत आनंद
3 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 3 सितंबर 2024, 05:31 PM IST)
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कंधार हाईजैक पर आई नई वेब सीरीज 'IC 814 - The Kandahar Hijack' को लेकर जारी विवाद के बीच नेटफ्लिक्स ने बयान जारी किया है. अब सीरीज के डिस्क्लेमर में प्लेन हाईजैक करने वाले आतंकियों के असली नाम भी लिखे होंगे. नेटफ्लिक्स ने ये फैसला भारत सरकार के अधिकारियों के साथ मुलाकात के बाद लिया है. सीरीज को लेकर जारी विवाद के बीच सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने नेटफ्लिक्स इंडिया की कॉन्टेंट हेड मोनिका शेरगिल को समन किया था.

इस मुलाकात के बाद नेटफ्लिक्स इंडिया ने अपने बयान में कहा है, 

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बयान में आगे कहा गया है कि भारत में कहानियां कहने की एक अच्छी संस्कृति रही है और वो इन कहानियों को दिखाने और उसके प्रामाणिक तथ्यों को रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

इससे पहले, 3 सितंबर को ही नेटफ्लिक्स इंडिया की कॉन्टेंट हेड मोनिका शेरगिल सूचना और प्रसारण मंत्रालय पहुंची थीं. इंडिया टुडे से जुड़ीं ऐश्वर्या पालीवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों के साथ इस मीटिंग में नेटफ्लिक्स से कई सवाल पूछे गए. पूछा गया है कि हाईजैकर्स के असली नाम को स्पष्ट करने के लिए कैप्शन क्यों नहीं चलाया गया. एक और सवाल किया गया कि सीरीज में आतंकी 'दृढ़' और 'संवदेनशील' क्यों दिखे, जबकि सरकार की तरफ से बात करने वाले अधिकारी 'कमजोर' और 'भ्रमित' नजर आए.

ये सीरीज 1999 के ‘कंधार हाईजैक’ की घटना पर बनी है. 24 दिसम्बर 1999 की शाम को पांच आतंकवादी IC814 नाम की फ्लाइट में चढ़े थे और प्लेन को हाईजैक कर लिया था. उन हाईजैकर्स के नाम थे- 1. शाहिद अख्तर सईद 2. इब्राहिम अतहर. 3. सनी अहमद काज़ी 4. मिस्त्री ज़हूर इब्राहिम 5. शाकिर उर्फ राजेश गोपाल वर्मा. लेकिन इन हाईजैकर्स ने अपनी पहचान छुपाने के लिए नकली नामों के साथ प्लेन में सवार हुए थे. उनके नकली नाम थे - 1. चीफ 2. डॉक्टर 3. बर्गर 4. भोला 5. शंकर.

हाईजैकर्स के ‘भोला’ और ‘शंकर’ नाम दिखाए जाने को लेकर विवाद हो रहा है. जबकि 6 जनवरी, 2000 को भारत सरकार ने जो बयान जारी किया था, उसमें भी इस बात का जिक्र था. 

ये भी पढ़ें- IC814 कंट्रोवर्सी: क्या सच में आतंकियों के नाम 'भोला' और 'शंकर' थे? पूरा सच ये है

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने नेटफ्लिक्स से ये भी कहा कि क्रिएटिविटी के नाम पर भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाया जा सकता. इसलिए कॉन्टेंट पब्लिश करने से पहले उचित रिसर्च और फैक्ट चेक किया जाना चाहिए.

वहीं, न्यूज एजेंसी पीटीआई ने भी सूत्रों के हवाले से इस मीटिंग की जानकारी दी. एक अधिकारी के मुताबिक, नेटफ्लिक्स से कहा गया कि किसी को भी इस देश के लोगों की भावनाओं के साथ खेलने का अधिकार नहीं है.

इन सभी सवालों पर नेटफ्लिक्स ने आश्वासन दिया है कि न सिर्फ अभी बल्कि भविष्य में भी प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सुरक्षा और बच्चों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखेगा.

वीडियो: तारीख: एक और 'कंधार' होने वाला था पर NSG के जांबाजों ने होने नहीं दिया ?

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