PM मोदी को माला पहनाने आ गया युवक, कितनी मजबूत होती है प्रधानमंत्री की सुरक्षा?
कोई आम आदमी प्रधानमंत्री के कितने करीब जा सकता है?

कर्नाटक में 12 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया है. हुबाली में रोड शो के दौरान पीएम की तरफ एक शख्स दौड़ा चला आया. शख्स पीएम को माला पहनाने के लिए उनकी तरफ दौड़कर आया. पीएम ने माला हाथ में लिया, जिसके बाद पीएम की सुरक्षा में मौजूद सिक्योरिटी स्टाफ ने युवक को किनारे हटा दिया.
कर्नाटक की हुबाली-धारवाड़ पुलिस ने इस बात से इनकार किया है कि प्रधानमंत्री के सिक्योरिटी घेरे को तोड़ा गया. पुलिस ने बताया,
क्या PM के इतने करीब पहुंचा जा सकता है?“प्रधानमंत्री की सुरक्षा कवर में कोई भी उल्लंघन नहीं हुआ. एक शख्स ने रोड शो के दौरान पीएम मोदी को माला पहनाने की कोशिश की. हम उस व्यक्ति के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं.”
कर्नाटक में इस मामले के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या कोई आम आदमी पीएम के इतने करीब पहुंच सकता है? जवाब है नहीं. ऐसा करना नामुमकिन है. SPG जवानों को ट्रेनिंग इस तरह दी जाती है कि पीएम के रोड शो के दौरान आखिरी सुरक्षा घेरे को कोई भी पार करने की कोशिश करे तो उसे रोका जाए. यानी पीएम के करीब पहुंचने का कोई भी रास्ता नहीं होता.
प्रधानमंत्री के सिक्योरिटी घेरे को तोड़ने पर आम इंसान के साथ क्या हो सकता है, ये एक उदाहरण से समझा जा सकता है. 2 अक्टूबर, 1986 के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी राजघाट पर थे. तभी झाड़ियों में छुपे करमजीत सिंह नाम के एक शख्स ने गोली चला दी. जिसके बाद राजीव गांधी की सुरक्षा में मौजूद जवानों ने करमजीत पर गोली चलाने तक के आदेश दे दिए. हालांकि, करमजीत पर गोली नहीं चलाई गई थी.
कर्नाटक में हुई घटना के बाद पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि SPG ने वहां मौजूद सभी लोगों का सिक्योरिटी चेक किया हुआ था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोड शो के पूरे इलाके को सिक्योरिटी एजेंसी ने पहले से ही चेक किया हुआ था.
SPG के जिम्मे होती है पीएम की सिक्योरिटीभारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी SPG की होती है. चाहे वो पीएम का देश में कोई दौरा हो या जब वो विदेश के दौरे पर हों. पीएम से मिलने वाले लोगों की संख्या, कार्यक्रम की जानकारी, पीएम के फोन कॉल का जवाब देना, उनका टाइम टेबल बनाना, सब SPG की जिम्मेदारी है. SPG के सारे सिक्योरिटी प्रोटोकॉल एक किताब में लिखे होते हैं. इसे ‘ब्लू बुक’ कहा जाता है. केंद्रीय गृह मंत्रालय इस किताब की गाइडलाइंस की समय-समय पर समीक्षा करता है.
प्रधानमंत्री की सुरक्षा कई लेयर्स में होती है. SPG के जवान पीएम की सुरक्षा घेरे बनाकर करते हैं. इसमें सबसे अंदर रहने वाले सदस्यों का काम होता है कि वो किसी भी हमले की स्थिति में पीएम को वहां से सुरक्षित निकालें. वहीं SPG की काउंटर असॉल्ट टीम दूसरे घेरे को कवर करती है. इसका काम पीएम की सुरक्षा के लिए कवरिंग फायरपावर देना होता है.
इसके बाद आता है तीसरा घेरा. इस घेरे में SPG के साथ-साथ NSG और अन्य जवान भी शामिल होते हैं. वहीं आखिरी घेरे में SPG के साथ मुख्य तौर पर लोकल पुलिस बल भी शामिल होता है. इनका काम भीड़ को संभालना होता है.
प्रधानमंत्री जब किसी राज्य के दौरे पर होते हैं, तो सुरक्षा कारणों से उनका रूट 7 घंटे पहले तय होता है. उनके रूट के अलावा एक वैकल्पिक रूट भी तैयार रखा जाता है. पीएम के काफिले के गुजरने के ठीक 10 से 15 मिनट पहले उस रूट पर आम आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी जाती है. लोकल पुलिस सड़क के दोनों तरफ होती है. पीएम के काफिले के आगे राज्य पुलिस की गाड़ियां चलती हैं. इनका काम आगे से रूट को क्लियर करना होता है. स्थानीय पुलिस ही SPG को रास्ते पर आगे बढ़ने की सूचना देती है. इसके बाद पीएम का काफिला आगे बढ़ता है.
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