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मदर टेरेसा की बनाई संस्था के सभी बैंक खाते फ्रीज क्यों कर दिए गए?

गृह मंत्रालय ने क्या सफाई दी?

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27 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 27 दिसंबर 2021, 06:32 PM IST)
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ममता बनर्जी ने ट्वीट कर आरोप लगाए
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मदर टेरेसा से जुड़ी संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटीज चर्चा का विषय बनी हुई है. सोमवार 27 दिसंबर को ख़बर आई कि संस्था के बैंक खातों को गृह मंत्रालय ने फ्रीज़ कर दिया है. इसके बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई नेताओं ने हैरानी जताते हुए केंद्र सरकार की आलोचना शुरू कर दी. ममता बनर्जी ने ट्वीट कर कहा
ये सुनकर हैरानी हुई कि क्रिसमस के दिन यूनियन मिनिस्ट्री ने मदर टेरेसा के मिशनरीज ऑफ चैरिटी के सारे बैंक अकाउंट को फ्रीज कर दिया है. इससे मिशनरीज के 22 हजार मरीजों और कर्मचारियों के पास न खाना बचा है, न दवा. कानून भले ही सबसे ऊपर है, लेकिन मानवता के लिए किए गए प्रयासों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए.
ममता बनर्जी के इस ट्वीट के बाद लोगों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं. मामला तूल पकड़ता देख सरकार की तरफ से सफाई आई. केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ़ से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि मदर टेरेसा मिशनरीज ऑफ चैरिटी के बैंक खातों को उसकी तरफ से फ्रीज नहीं किया गया है, बल्कि संस्‍थान ने खुद स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर अपने अकाउंट को फ्रीज करने का आग्रह किया था.

गृह मंत्रालय ने क्या जानकारी दी?

मिशनरीज ऑफ चैरिटी एक कैथोलिक संस्था है जिसकी स्थापना मदर टेरेसा ने 1950 में की थी. NDTV की ख़बर के अनुसार गृह मंत्रालय ने बताया कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने विदेशी अभिदान अधिनियम पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था. लेकिन उसकी पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करने के चलते 25 दिसंबर को इसे खारिज कर दिया गया. FCRA के तहत मिशनरीज ऑफ चैरिटी का पंजीकरण 31 अक्टूबर, 2021 तक ही वैध था. गृह मंत्रालय ने कहा कि वैधता को 31 दिसंबर, 2021 तक बढ़ाया गया था. मंत्रालय ने ये भी कहा कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी के नवीनीकरण आवेदन पर विचार करते हुए कुछ गलत जानकारियां मिली थीं जिन्हें देखते हुए आवेदन को खारिज कर दिया गया. गुजरात में हो चुकी है FIR इसी महीने की शुरुआत में गुजरात के वडोदरा में मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर लड़कियों का धर्म परिवर्तन करने की कोशिश करने के आरोप लगे थे. यहां ये संस्था एक बाल गृह चलाती है. आरोप है कि बाल गृह चलाने के नाम पर लड़कियों को जबरन बाइबल पढ़ने और क्रॉस पहनने को कहा जाता था. साथ ही दूसरे धर्म के लोगों की कुछ शादियां ईसाई रीति-रिवाज से की जा रही थीं. हालांकि संस्था ने इन तमाम आरोपों को खारिज  किया था. मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी.

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