जब 'गोरखा' बिपिन रावत अपने पिता की यूनिट में तैनात हुए
दादा सिपाही, पिता ले. जनरल और बेटा CDS.
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अपने गांव में लोगों के साथ बिपिन रावत (फाइल फोटो- आजतक)
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तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार, 8 दिसंबर को हुए हेलिकॉप्टर हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत , उनकी पत्नी और सेना के अन्य अधिकारियों की जान चली गई. इस हादसे में 13 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. वहीं ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का इलाज चल रहा है.
इस हादसे में जान गंवाने वाले जनरल बिपिन रावत का परिवार सेना से जुड़ा रहा है. जनरल बिपिन रावत का जन्म 16 मार्च, 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी में एक गढ़वाली परिवार में हुआ था. बिपिन रावत ने 1978 में आर्मी जॉइन की थी और उन्होंने सेना में एक लेफ्टिनेंट होने से लेकर देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ तक का सफर तय किया.
लेकिन रावत के सफर की शुरुआत न 1978 में हुई थी. और न ही 1958 में. उनसे पहले उनके पिता और दादा भी सेना में ही थे. किसी खास परिवार में जन्म किसी बच्चे को खास नहीं बना सकता. लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा कि जिन बिपिन रावत को दुनिया ने जाना, उन्हें फौजी संस्कार अपने पूर्वजों से भी मिले.
तीन पीढ़ियां, तीनों फौज में
बिपिन रावत के पिता लक्ष्मण सिंह लेफ्टिनेंट जनरल के पद से रिटायर हुए थे. वहीं ले.ज. लक्ष्मण सिंह के पिता यानी बिपिन रावत के दादा भी सेना में सिपाही रह चुके थे. ये संयोग ही था, कि दिसंबर 1978 में बिपिन रावत उसी 11 गोरखा रेजिमेंट की 5 वीं बटालियन में कमीशन हुए, जो कभी उनके पिता की यूनिट हुआ करती थी.
सेना में कहा जाता है कि जवानों के धर्म और पंथ ही अफसर के धर्म और पंथ होते हैं. इस नाते जनरल बिपिन रावत और उनके पिता ले.ज. लक्ष्मण सिंह रावत गोरखा अफसर थे. 'गोरखा' थे.
बिपिन रावत के चाचा, भरत सिंह रावत भी फौजी रहे. वे सेना में हवालदार के पद से सेवानिवृत्त हुए. बिपिन रावत की पत्नी मधुलिका डिफेंस वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन (DWWA) की प्रेसिडेंट थी. इस हैसियत से वो सैन्य कर्मियों के परिवारों के लोगों के लिए काम करती थीं. जनरल बिपिन रावत की दो बेटियां हैं. कीर्तिका और तारिणी. कीर्तिका उनकी बड़ी बेटी हैं. उनकी शादी हो चुकी है, और वो मुंबई में में रहती हैं. वहीं तारिणी उनकी छोटी बेटी हैं और वो दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रही हैं.

