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"राष्ट्रपति भी पल्लू से ढकती हैं सिर, क्या ये PFI की साजिश है?"- हिजाब विवाद पर बोले JDS नेता

कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कर्नाटक में हिजाब प्रोटेस्ट के पीछे PFI का था. JDS नेता ने कहा कि हिजाब और पल्लू एक जैसे हैं.

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सीएम इब्राहिम का कहना है कि हिजाब कहो या घूंघट बात एक ही है | फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स
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अभय शर्मा
20 सितंबर 2022 (Updated: 20 सितंबर 2022, 10:29 PM IST)
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हिजाब बैन (Hijab Ban) के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. इसी बीच बेंगलुरु में जनता दल सेक्युलर (JDS) के प्रदेश अध्यक्ष सीएम इब्राहिम का बयान सामने आया है. उन्होंने हिजाब और घूंघट की तुलना करते हुए कहा कि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी पल्लू डालती हैं, तो क्या ये PFI की साजिश है?

Indira Gandhi का भी जिक्र किया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिजाब बैन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 20 सितंबर को कर्नाटक सरकार ने दावा किया कि कर्नाटक में हिजाब प्रोटेस्ट के पीछे इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का हाथ था. ये इस संगठन के द्वारा रची गई साजिश थी. सरकार ने ये दावा भी किया कि 2021 तक कर्नाटक के स्कूलों में हिजाब नहीं पहना जा रहा था.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, JDS के प्रदेश अध्यक्ष सीएम इब्राहिम ने इसी का जवाब देते हुए मीडिया से कहा,

'इंदिरा गांधी ने अपने सिर को पल्लू से ढका था. राष्ट्रपति भी पल्लू से अपना सिर ढकती हैं, इसलिए जो लोग अपने चेहरे को घूंघट से ढकते हैं, क्या वे सभी PFI द्वारा समर्थित हैं? भारत की संस्कृति है. सिर पर पल्लू डालना, दुपट्टा डालना भारत की संस्कृति है भारत का इतिहास है.'

सीएम इब्राहिम ने आगे कहा,

'हिजाब बोलो, पल्लू बोलो बात एक ही है. अब हिंदी में पानी बोलो या अंग्रेजी में वॉटर. वॉटर बोले तो अंग्रेज नहीं हुआ, नाम बदलता है भाषा के हिसाब से. बात एक ही है. पानी-पानी ही होता है.'

Supreme Court में Hijab पर सुनवाई जारी

बता दें कि कर्नाटक हाईकोर्ट के शिक्षण संस्थानों में हिजाब बैन को बरकरार रखने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. कई याचिकाएं दायर की गई हैं. सोमवार, 19 सितंबर, को याचिका डालने वालों की तरफ से दलीलें पेश की गईं. वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा क‍ि हिजाब जैसी धार्मिक प्रथा भले ही जरूरी न हो, लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपनी अंतरात्मा के हिसाब से इसका पालन करने का फैसला करता है तो अदालतें और अथॉरिटी इसमें ज्यादा दखल नहीं दे सकतीं.

रिपोर्ट के मुताबिक, दवे ने आगे कहा धार्मिक प्रैक्टिस वो है, जिसे एक समुदाय अपने धार्मिक विश्वास के तहत करता है. इस पर पीठ ने कहा कि परंपरागत रूप से, जब भी कोई व्यक्ति किसी सम्मानित स्थान पर जाता है, तो वो अपना सिर ढक लेता है. इस पर दवे ने कहा कि उनके नजरिए में स्कूल सबसे सम्मानित स्थान है, ये एक पूजा की जगह की तरह है. दवे ने अपनी दलीलों में प्रधानमंत्री के 15 अगस्त को पगड़ी पहनने की बात भी कही. 

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