इधर भारत के साथ सीक्रेट मीटिंग, उधर दूसरे देशों से शिकायत, क्या है कनाडा के मन में?
कनाडा और भारत के बीच में जो तनाव चल रहा है, उसमें भारत ने कनाडा को अच्छा खासा नुकसान पहुंचा दिया है.

सितंबर 2023 की 18 तारीख. कनाडा ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का दोष मढ़ा भारत पर. कनाडा ने एक वैश्विक स्तर का नाटक किया. दोष मढ़कर दुनिया भर को सुनाया. अमरीका से लेकर यूके तक सबको फंसा लिया. फिर उसने भारतीय खुफिया एजेंसी के उच्चाधिकारियों को वापिस भारत भेज दिया. तो भारत ने भी पलटकर जवाब दिया. कनाडा के कई अधिकारी भारत की जमीन से वापिस रवाना कर दिए गए. भारत ने कनाडाई मूल के लोगों को वीजा देने पर रोक लगा दी.
इतने एक्शन के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर गए अमरीका. 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली की मीटिंग हुई तो वहाँ पर भाषण दिया. उसके बाद काउंसिल ऑफ फ़ॉरेन रिलेशन में जाकर इंटरव्यू दिया. अधिकारियों और मेजबानों के साथ मीटिंग की. लेकिन इस दौरे में एक और घटना हुई थी. एक सीक्रेट मीटिंग हुई थी. कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली की भारत के विदेश मंत्री के साथ. और इस बारे में खुलासा किया है अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने. खबर की मानें तो इस मीटिंग में भारत और कनाडा ने आपसी टेंशन को कम करने के लिए बात की थी.
लेकिन इस मीटिंग की सरकारों ने अभी पुष्टि नहीं की है. जब इस मीटिंग के बारे में कनाडा विदेश मंत्रालय से सवाल पूछे गए, तो उन्होंने कोई भी जवाब देने से इनकार कर दिया.
अब सवाल ये है कि ये सीक्रेट मीटिंग हुई क्यों थी? दरअसल कनाडा और भारत के बीच में जो तनाव चल रहा है, उसमें भारत ने कनाडा को अच्छा खासा नुकसान पहुंचा दिया है. वीजा सर्विस बंद करने की खबर आई, तो साथ ही एक और खबर आई. कि भारत सरकार अपने यहाँ मौजूद कनाडाई दूतावास और उच्चायोग में काम करने वाले लोगों की संख्या में कटौती पर विचार कर रही है. कनाडा के जो लोग भारत में काम कर रहे हैं, उनमें से अधिकांश को वापिस कनाडा भेज दिया जाएगा.
भारत ने ऐसे 41 कनाडाई कर्मचारियों की लिस्ट कनाडा को सौंप दी और कहा कि इनको 10 अक्टूबर तक अपने देश वापिस बुला लें. अब कनाडा के इंडिया वाले ऑफिस में काम करते हैं 62 लोग. 41 वापिस चले जाएंगे तो बचेंगे 21. इसके साथ ही भारत ने ये भी कहा कि अगर इन 41 में से कोई भारत में रह गया, तो उन राजनयिकों को मिलने वाली छूट और दूसरे फायदे (यानी डिप्लमैटिक इम्यूनिटी) नहीं मिल पाएंगे. यानी इंडिया में इन पर कोई आरोप लगेंगे तो इन पर आम लोगों की तरह केस चलाए जा सकेंगे. इन्हे मिलने वाली सुरक्षा और वरीयता में कमी कर दी जाएगी. लेकिन 10 अक्टूबर की जो डेडलाइन भारत ने दी थी, वो डेडलाइन बीत चुकी है. और सूत्र बताते हैं कि इन राजनयिकों की संख्या अभी भी भारत में काबिज़ है. और ये इसीलिए संभव है क्योंकि भारत और कनाडा की बैकचैनल बातचीत शुरू हो चुकी है, इस पूरे डिप्लमैटिक संकट को सुलझाने के लिए.
अब सवाल आता है कि भारत कनाडा के बीच इस मीटिंग में बात क्या हुई? इसका जवाब भी फाइनेंशियल टाइम्स की खबर से मिलता है. राजदूतों वाली बात उठी तो भारत ने कनाडा से कहा कि भारत विएना कन्वेन्शन का पालन कर रहा है. कनाडा ने इस तर्क को खारिज कर दिया और जवाब दिया कि भारत वियना कन्वेंशन का गलत मतलब निकाल रहा है.
क्या है ये कन्वेन्शन?
1961 का एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जिस पर दुनिया के कई देशों ने साइन किया. इसमें कई नियम कानून हैं. इस मुद्दे से जुड़ा बताते हैं. इस कन्वेन्शन के मुताबिक दो देशों के बीच एक दूसरे के यहाँ रखे गए राजदूतों की संख्या बराबर होनी चाहिए. और कोई भी देश किसी भी देश के राजनयिक को अपने यहाँ से तत्काल प्रभाव से हटाने के लिए उसे भेजने वाले देश से कह सकता है. और राजनयिक को भेजने वाले देश को तत्काल प्रभाव से इस अधिकारी को वापिस बुलाना होगा.
ये राजनयिकों वाली प्रॉब्लम कितनी बड़ी है, इसका अंदाज आप एक वाकये से लगाइए. 3 अक्टूबर को कनाडा के PM जस्टिन ट्रूडो ने ओटावा में मीडिया से बात की. तब उन्होंने कहा था कि वो भारत के साथ तनाव को बढ़ाना नहीं चाहते हैं. और आगे कहा था,
“कनाडा के लिए ये जरूरी है कि हमारे डिप्लोमैट्स भारत में मौजूद रहें. हम लगातार ऐसे कदम उठाते रहेंगे, जिससे हम मुश्किल समय में भी भारत के साथ बेहतर रिश्ते बना सकें.”
और तब कनाडा ने ये संकेत भी दिए थे कि भारत से रिश्ते ठीक करने के लिए तत्पर है. वहाँ की विदेश मंत्री मेलेनी जोली ने कहा था कि डिप्लोमैटिक संकट से निकलने के लिए वो भारत के साथ प्राइवेट बातचीत करना चाहती हैं. क्योंकि - बकौल मेलोनी जोली - कूटनीतिक मामलों को आपसी बातचीत के जरिए सबसे बेहतर तरह से सुलझाया जा सकता है.
तो क्या भारत और कनाडा के रिश्ते सुधार की ओर हैं? और नहीं हैं तो किधर जा रहे हैं? भविष्य क्या है?
मीटिंग और बातचीत . ये आशा जातने वाले शब्द हैं. आशा ये कि शायद चीजें सुधार हो जाएं. लेकिन कुछ घटनाएं हैं, जिन घटनाओं पर कनाडा को फौरन लगाम लगानी होगी. लगाम नहीं लगी, तब तक ये शांति समझौते वाली गाड़ी अटकी रहेगी. अभी दो का जिक्र करते हैं -घटना नंबर एक - ट्रूडो की चुगली करने की आदत बहाना है इजरायल बनाम हमास युद्ध का.
देश दुनिया के नेता आपस में बात कर रहे हैं तो कनाडा के पीएम ट्रूडो भी बात कर रहे हैं. लेकिन इस बहाने वो भारत की चुगली करने से बाज नहीं आ रहे हैं. संयुक्त अरब अमीरात के प्रेसीडेंट शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद से बात की और भारत का मुद्दा उठाया. इसकी जानकारी उन्होंने खुद एक्स पर दी. लिखा -
"हमने भारत के बारे में बात की. साथ ही इस बारे में भी बात की कि कानून का सम्मान और पालन करना चाहिए."
इसके बाद उन्होंने जब जॉर्डन के राजा से बात की, तो भी वही काम किया. युद्ध के बहाने इंडिया की चुगली करने लगे.
यही नहीं, ट्रूडो ने यही काम किया ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक से बात करते हुए. उन्होंने भारत में कनाडाई राजनयिकों के खिलाफ जो एक्शन लिया जा रहा है, इसको लेकर अपनी चिंता जाहिर की तो सुनक ने जवाब दिया कि वो भी कानून का सम्मान करते हैं.
अब चलते हैं घटना नंबर दो की ओर.
घटना नंबर दो - खालिस्तान समर्थकों को लगातार कनाडा में शरण देना
जी. आपने सही सुना. कनाडा के इस काम में कोई कमी नहीं आई है. पहले भी देता था, अब भी देता है. इसी घटनाक्रम में कनाडा ने एक और खालिस्तान समर्थक को शरण दी है. इस आदमी का नाम है कमलजीत राम. कमलजीत पर आरोप है कि उसने लंबे समय तक भारत में खालिस्तान से जुड़े उग्रवादियों को अपने घर में शरण दी और खाना-पीना दिया. कनाडा में शरण मांगने के लिए कमलजीत ने जब कनाडा बॉर्डर सर्विस एजेंसी में अप्लाई किया तो उसने खुद ये जानकारी दी. कहा कि उसने अपने खेत घर में 1982 से लेकर 1992 तक कई खालिस्तानी नेताओं को शरण दी थी. उसने ये भी कहा था कि वो खालिस्तानी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले का समर्थक है और उनकी विचारधारा से सहमत है. कनाडा ने तात्कालिक रूप से तो कमलजीत की एंट्री रोक दी थी, लेकिन उसने कनाडा के इमिग्रेशन एंड रेफ्यूजी बोर्ड ट्रिब्यूनल में अपील की. अपील के बाद ट्रिब्यूनल में सुनवाई हुई. ट्रिब्यूनल ने फैसला पलट दिया और कहा कि कमलजीत को कनाडा में शरण दीजिए. कमलजीत के एक्शन पर ट्रिब्यूनल ने कहा -
“कमलजीत ने खालिस्तान के समर्थकों को शरण इसलिए दी क्योंकि वो अपने समुदाय के गलत छोर पर खड़े होकर इसके दुष्परिणाम नहीं भुगतना चाहता था.”
खबरों के मुताबिक, ट्रिब्यूनल ने आगे कहा
“भिंडरावाले और स्थानीय पुलिस ने लोगों के मन में अविश्वास भर दिया था.”
ट्रिब्यूनल ने एक और बात कही
“कमलजीत का कनाडा में इसलिए स्वागत करना चाहिए क्योंकि ये उसकी जरूरत है, और उसे ये डर है कि उससे बदला लिया जा सकता है.”
और कमलजीत का कनाडा में स्वागत हो गया. यानी एक तरफ कनाडा भारत से परस्पर और प्राइवेट बातचीत करना चाह रहा है, वहीं वो दूसरे देशों से शिकायतबाजी कर रहा है और विवादित लोगों को शरण दे रहा है. नॉर्मलाईज़ेशन के लेंस से देखें तो ये घटनाएं विरोधाभास से भरी हुई लगती हैं.
लेकिन एक बात और है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए. कनाडा में बैठे हुए खालिस्तान समर्थक गैंगस्टरों के इंडिया में चल रहे ऑपरेशन, उनके काम और चल रही उनकी धरपकड़. ताज़ा अध्याय है 12 अक्टूबर के दिन दिल्ली में पकड़े गए दो गैंगस्टर - गुरिन्दर और किशन कुमार. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली कि ये दोनों आउटर रिंग रोड के इलाके में देखे गए हैं. स्पेशल सेल की टीम ने छापा मारा. तभी किशन ने पुलिस पर एक राउंड फायर किया. पुलिस ने भी जवाब दिया. फिर पुलिस ने देखा कि गुरिन्दर पुलिस की टीम पर फेंकने के लिए हथगोला निकाला. लेकिन पुलिस की टीम ने उसी समय दोनों को पकड़ लिया.
अब दोनों के बारे में संक्षिप्त जानकारियाँ जानिए. केस है कि इन दोनों ने ही 19 सितंबर 2023 में पंजाब के मोगा में एक कांग्रेस नेता बलजिन्दर सिंह बल्ली की हत्या कर दी थी. बलजिंदर सिंह अपने घर पर बाल कटवा रहे थे तभी हमलावरों ने 12 बोर की बंदूक से गोलियां चलानी शुरू कर दी थी. गोलियों से छलनी बल्ली की मौत हो गई.
सूत्रों ने जानकारी दी कि ये दोनों लगातार किसी साजिश में लगे हुए थे. 12 अक्टूबर की रात दिल्ली के प्रगति मैदान में किसी कार्रवाई को अंजाम देने वाले थे, ऐसी जानकारी भी सामने आ रही है.
लेकिन साजिश, प्लानिंग और मर्डर किसके साथ कर रहे थे? किसके इशारे पर कर रहे थे? तो बता दें कि इनके ऊपर हाथ था गैंगस्टर अर्शदीप डल्ला का. और गेस करिए अर्शदीप का ठिकाना कहाँ है? जी. उसका भी ठिकाना है कनाडा में. वही कनाडा, जो फिलहाल मची खिचड़ी में मुख्य रोल में है.
अब जानते हैं कौन है ये डल्ला? पहले बताया है, एक बार फिर से जान लीजिए.
डल्ला 2020 में इंडिया छोड़कर कनाडा भाग गया था. वो कनाडा में रहकर टारगेट किलिंग करवाता है. स्मगलिंग करता है. पैसे की उगाही करता है, खालिस्तानी आतंकियों के छोटे-मोटे ऑपरेशन में पैसे लगाता है. पंजाबी म्यूज़िक और मूवी इंडस्ट्री में काम करने वाले प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को धमकाकर भी रंगदारी वसूलता है. डल्ला का सबसे करीबी यार था हरदीप सिंह निज्जर. दोनों ने मिलकर खालिस्तान टाइगर फोर्स यानी KTF नाम का संगठन बनाया था. अब निज्जर के साथ क्या हुआ? ये सभी को पता है.
डल्ला ने शूटरों की फौज खड़ी की. 700 से ज्यादा शूटर. इन शूटरों को पंजाब से भर्ती किया जाता है, फिर कनाडा बुलवाकर हथियारों की ट्रेनिंग देकर पंजाब वापिस भेज दिया जाता है. जब ये शूटर पंजाब वापिस आते हैं तो उन्हें हत्या करने या धमकाने के लिए हथियार चाहिए होते हैं. उन्हें हथियार कैसे मिलते हैं? पाकिस्तान से. पाकिस्तान में बैठी ISI और लश्कर-ए-तैयबा की मदद से हथियार जुटाए जाते हैं. ड्रोन के जरिए भारतीय सीमा के अंदर हथियार गिराए जाते हैं. शूटर हत्या करना और धमकी देना शुरू कर देते हैं.
20 सितंबर को डल्ला का करीबी सुक्खा दुनके भी कनाडा में मारा गया था. डल्ला पर खुद भारत ने 10 लाख का इनाम रखा हुआ है. और डल्ला के इंडिया के ठिकानों पर छापेमारी चालू है. उसके गुर्गे पकड़े जा रहे हैं. उन्हें अरेस्ट किया जा रहा है. इशारा साफ है, आतंकियों को उनकी सही जगह पहुंचाया जाएगा.

