The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Haryana CM Manohar lal Khattar says that centre will not repeal controversial farm laws

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने ऐसी बात कही है जो किसानों को अच्छी नहीं लगेगी

किसानों को एक साल इंतजार करने की सलाह क्यों दे रहे हैं?

Advertisement
pic
11 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 11 जनवरी 2021, 06:35 AM IST)
हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने ऐलान किया है कि राज्य के कोरोना वायरस के इलाज में जुटे सरकारी डॉक्टरों को इस पीरियड की डबल सैलरी दी जाएगी. (फाइल फोटो- PTI)
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक बार फिर केंद्रीय कृषि कानूनों की वकालत की है. (फाइल फोटो- PTI)
Quick AI Highlights
Click here to view more
करनाल में किसान महापंचायत से पहले बवाल और मंच तोड़े जाने की घटना के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कृषि कानूनों को लेकर दोटूक बात कही है. खट्टर ने कहा कि ये तय है कि केंद्र सरकार कृषि क़ानूनों को वापस नहीं लेगी. किसानों को अपनी प्रतिक्रिया देने से पहले कम से कम एक साल इन कानूनों के असर को देखना चाहिए था. गौरतलब है कि करनाल जिले के कैमला गांव में 10 जनवरी को किसान महापंचायत रखी गई थी. इसमें करीब दो हज़ार किसानों को जुटाया जाना था. कार्यक्रम ऐसा था कि सीएम खट्टर इनसे बात करते और मंच से किसान कानून के फायदे समझाते. लेकिन इससे पहले ही कृषि कानून का विरोध कर रहे किसानों के एक बड़े जत्थे ने हेलीपैड और महापंचायत के वेन्यू पर तोड़फोड़ कर दी. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे. इसे देखते हुए खट्टर को दौरा रद्द करना पड़ा. इस घटना को लेकर सीएम ने चंडीगढ़ में पत्रकारों को सम्बोधित किया. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, हरियाणा के सीएम खट्टर ने कहा,
“(कृषि) क़ानून में संशोधन होंगे. इसे लेकर किसान नेताओं से बातचीत करने के बाद किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है. लेकिन मुझे नहीं लगता है कि केंद्र सरकार इन क़ानूनों को वापस लेगी. मुझे भरोसा है कि किसानों और सरकार के बीच की बातचीत जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंचेगी.”
इसके बाद खट्टर ने कृषि क़ानूनों की जमकर वकालत की. उन्होंने कहा, 
“जब भी कोई नयी नीति बनायी जाती है, तो उसके प्रभाव को देखने में कुछ समय लगता है. हमने कुछ समय तक इंतज़ार किया होता, फिर केंद्र सरकार के पास गए होते और कहते कि इन क़ानूनों में ये दिक़्क़त है. मुझे लगता है कि हमें कम से कम एक साल तक इंतज़ार तो करना ही चाहिए ताकि इन क़ानूनों के फ़ायदे दिखने लगें. ये क़ानून किसान को बांध नहीं रहे हैं. आज भी मंडियां हैं, MSP है और आगे भी रहेंगे. बस किसानों को एक वैकल्पिक व्यवस्था दी गई है. अगर उन्हें मंडी से बाहर MSP मिलेगा तो उन्हें क्या दिक़्क़त है? उन्हें तो फ़ायदा ही है.”
खट्टर ने कांग्रेस और लेफ़्ट दलों पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा,
“मुझे भरोसा है कि कांग्रेस पार्टी और कम्युनिस्टों की इन सबमें बड़ी भूमिका है. इस तरह के आंदोलनों से उन्हें लगता है कि वो अपने पंख फैला सकते हैं तो उन्हें बड़ी ग़लतफ़हमी है.”
खट्टर ने किसानों से ठंड और बढ़ती मौतों का हवाला देते हुए प्रदर्शनस्थल से हटने की अपील भी की. करनाल में प्रदर्शन के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, आंसू गैस और पानी की बौछारें डाली थीं. इसके बारे में खट्टर ने कहा,
“वो लोग हमारे दुश्मन नहीं हैं. वो हमारे ही लोग हैं. हमारे राज्य के लोग हैं. लोग मुझे सुनने आए थे, लेकिन कुछ शरारती तत्त्वों की वजह से व्यवधान उत्पन्न हो गया.”
ये पहला मौक़ा नहीं है कि जब मनोहरलाल खट्टर प्रदर्शनकारियों के निशाने पर आए हैं. इसके पहले करनाल के पाढ़ा गांव में 9 दिसम्बर को उनकी जनसभा निरस्त हो गयी थी. क्योंकि किसानों ने हेलीपैड खोद दिया था. 22 दिसंबर को अंबाला में उनके क़ाफ़िले पर हमला हुआ तो प्रदर्शनकारियों पर हत्या के प्रयास का मुक़दमा दर्ज किया गया था. एक्सप्रेस की ख़बर ये दावा करती है कि ऐसे ही मामलों को देखते हुए हरियाणा पुलिस के ख़ुफ़िया विभाग ने भाजपा और जेजेपी के मंत्रियों को सुझाव दिया है कि बिना भारी सुरक्षा के वो पब्लिक में न निकलें. विधायकों से भी कहा गया है कि पहले ज़िला प्रशासन को अपनी यात्रा के कार्यक्रम से अवगत करा दें, ताकि पुख़्ता सुरक्षा उपलब्ध करायी जा सके.

Advertisement

Advertisement

()