गुजरात में BTP के संस्थापक छोटूभाई वसावा अपने बेटे के खिलाफ लड़ेंगे चुनाव, क्या है वजह?
छोटूभाई वसावा को एक बड़े आदिवासी नेता के तौर पर जाना जाता है.
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गुजरात विधानसभा चुनाव में झगडिया (ST) सीट चर्चा का विषय बनी हुई है. यहां से पिता और पुत्र एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने जा रहे हैं. भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) के संस्थापक छोटूभाई वसावा 14 नवंबर को झगडिया (ST) सीट से नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं. वो यहां अपने बेटे और BTP के अध्यक्ष महेश वसावा के खिलाफ उतरने जा रहे हैं. महेश ने पहले ही झगडिया सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है.
क्या है पूरा मामला?दरअसल, छोटूभाई वसावा आदिवासी वोटर्स पर अपनी पकड़ के लिए गुजरात में जाने जाते हैं. छोटूभाई वसावा ने 13 नवंबर को ट्वीट कर जानकारी दी थी कि वो भी झगडिया सीट से नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं. उन्होंने ट्वीट कर लिखा,
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से पिता-पुत्र में मतभेद की खबरें सामने आ रही थीं. छोटूभाई वसावा और उनके बेटे महेश वसावा के बीच नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से गठबंधन को लेकर भी मतभेद हो चुका है. इन मतभेदों के बीच 11 नवंबर के दिन BTP के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश वसावा ने झगडिया सीट से नामांकन कर दिया था.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महेश वसावा ने साल 2017 का विधानसभा चुनाव देडियापाड़ा सीट से जीता था. वहीं छोटूभाई वसावा ने 2017 के चुनाव में झगडिया सीट से बाजी मारी थी. लेकिन इस बार गुजरात के आदिवासी बहुल इलाकों में प्रभाव रखने वाली BTP ने देडियापाड़ा सीट से बहादुरसिंह वसावा को मैदान में उतारा है.
भरूच में राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि महेश को देडियापाड़ा सीट पर BJP से कड़ी टक्कर का सामना कर पड़ रहा है. सूत्रों का ये भी कहना है BJP के साथ संबंधों को लेकर भी पिता-पुत्र की जोड़ी में मतभेद हो सकते हैं. ऐसी भी खबरें हैं कि महेश चुनावी साझेदारी के लिए BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं.
लोकसभा चुनाव लड़ने की बातइससे पहले छोटूभाई वसावा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वो लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने बताया,
वहीं पार्टी सूत्रों ने ये भी कहा था कि सीनीयर वसावा के खराब स्वास्थ्य के कारण इस बार चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है. लेकिन इस बात का खंडन करते हुए छोटूभाई वसावा ने कहा था कि उनका स्वास्थ्य अच्छा है और वो चुनाव लड़ने के लिए फिट हैं. उन्होंने ये भी कहा था कि मौजूदा व्यवस्था में जो भी हो रहा है, वो उनकी मंजूरी से हो रहा है.
गुजरात विधानसभा चुनाव में आदिवासी वोट बैंक पर हर पार्टी की नजर है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 15 फीसदी आदिवासी वोट हैं. BTP संस्थापक और भरूच जिले की विधानसभा सीट झगडिया से सात बार विधायक छोटूभाई वसावा को ‘आदिवासियों का मसीहा’ कहा जाता है. इसी को देखते हुए अरविंद केजरीवाल ने इस साल मई में BTP के साथ गठबंधन किया था. लेकिन ये गठबंधन ज्यादा दिन टिक नहीं पाया.
JDU छोड़कर बनाई BTPछोटूभाई वसावा साल 2012 तक जेडीयू की टिकट पर झगडिया सीट से छह बार जीते थे. उन्होंने पहली बार साल 1990 में विधानसभा चुनाव जीता था. लेकिन साल 2017 में जेडीयू ने बिहार में BJP से गठबंधन कर लिया था. इसके बाद छोटूभाई वसावा ने JDU छोड़ BTP का गठन किया था. साल 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में BTP ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था.
साल 2020 में हुए राज्यसभा चुनाव में पिता-पुत्र की जोड़ी ने मतदान नहीं किया था. उसी साल दिसंबर महीने में नर्मदा और भरूच के पंचायत चुनाव में BTP ने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था. इसके बाद मई 2022 में आम आदमी पार्टी के साथ छोटूभाई वसावा ने एक रैली की. लेकिन आम आदमी पार्टी के साथ ये रिश्ता ज्यादा दिन चल नहीं पाया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में BTP ने गुजरात चुनाव के लिए सभी अनुसूचित जनजाति (ST) सीटों पर लड़ने का ऐलान किया था. इसके अलावा BTP ने बड़ी जनजातीय आबादी वाली अन्य सीटों पर चुनाव लड़ने की बात भी कही थी. गुजरात की कुल 182 विधानसभा सीटों में से 27 सीटें अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं.
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