शराबबंदी वाले गुजरात में पुलिस की गाड़ी में बियर डकारता दिखा अपराधी, वीडियो वायरल
इस घटना की वजह से Gujarat Police की काफ़ी आलोचना हो रही है. सोशल मीडिया की जनता ने चिंता जताई कि शराब के ख़िलाफ़ इतने सख़्त क़ानूनों के बावजूद राज्य में ऐसी घटना कैसे हो सकती है.

गुजरात एक ड्राई-स्टेट है. शराब ख़रीदना-बेचना-पीना क़ानूनन अपराध है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसे गुजरात के अहमदाबाद का बताया जा रहा है. वीडियो में एक शख़्स पुलिस की गाड़ी में बैठकर बियर पी रहा है. ख़ुद ही लोकेशन लिखी है - साबरमती रिवर-फ़्रंट, अहमदाबाद. जनता इस वीडियो को शेयर करते हुए पुलिस प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रही है.
क्या है वीडियो में?वीडियो में दिख रहा एक आदमी पुलिस की गाड़ी में बैठा हुआ है. हालांकि, उसके पास कोई पुलिस वाला नहीं दिख रहा. लोकेशन का भी बहुत आइडिया नहीं लग पा रहा. बैकग्राउंड म्यूज़िक के साथ आदमी बियर के दो कैन्स लहराता है. फिर कैन को चूमता है.
व्यक्ति कौन है? इसकी ठीक-ठीक पुष्टि नहीं हो पा रही है. TV9 गुजराती की एक रिपोर्ट कहती है कि ये व्यक्ति हत्या का आरोपी है. ख़बर के लिखे जाने तक इस मामले में गुजरात पुलिस का कोई इनपुट नहीं आया है.
इस घटना की वजह से गुजरात पुलिस की काफ़ी आलोचना हो रही है. सोशल मीडिया की जनता ने चिंता जताई कि शराब के ख़िलाफ़ इतने सख़्त क़ानूनों के बावजूद राज्य में ऐसी घटना कैसे हो सकती है. इस मामले में दोषियों के ख़िलाफ़ त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है. कई पोस्ट्स में गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी को मेंशन किया जा रहा है. उन्होंने इस केस का संज्ञान लिया है.
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इस प्रकरण के चलते आमजन के बीच प्रदेश की शराबबंदी नीति और रणनीति पर चर्चा छिड़ गई है. दरअसल, गुजरात में शराब की ख़रीद-बिक्री और सेवन को प्रतिबंधित करने वाले क़ानून को कहते हैं, गुजरात प्रोहिबिशन ऐक्ट. इसकी जड़ें 1878 के बॉम्बे आबकारी क़ानून तक जाती हैं, जो 1949 में चलकर बॉम्बे प्रोबिहिशन क़ानून बना. 1960 में बॉम्बे प्रांत बंट गया. महाराष्ट्र और गुजरात बने. पुनर्गठन के बाद गुजरात ने इस क़ानून को बरक़रार रखा. और सख़्ती लागू कर दी.
हालांकि, राज्य सरकार ने हाल ही में क़ानून में कुछ छूट दी है. राज्य में शराब बनाने-बेचने और ख़रीदने के लिए लाइसेंस और परमिट की व्यवस्था लाई गई है. बेचने के लिए भी परमिट चाहिए होगा और पीने के लिए भी. राज्य कनज़्यूमर्स को सात अलग-अलग क़िस्म के परमिट देता है. 21 साल या उससे ज़्यादा उम्र का कोई भी व्यक्ति अस्थायी परमिट ले सकता है.
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