देश में पानी खत्म होने वाला है? UN की ये रिपोर्ट पढ़ लीजिए, पानी बर्बाद करना बंद कर देंगे!
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भारत ही नहीं दुनिया भर के लिए चिंताजनक बातें सामने आई है. अगर जलस्तर इसी तेजी से गिरता रहा तो खेती करना भी मुश्किल हो जाएगा.

भारत में भूजल की कमी का खतरा काफी हद तक बढ़ गया है. भूजल यानी धरती के नीचे चट्टानों के बीच मौजूद पानी. जिसको लोग चापाकल, इलेक्ट्रिक मोटर या कुएं से निकालकर इस्तेमाल करते हैं. संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर में भूजल की उपलब्धता पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. इस रिपोर्ट में भारत के लिए चिंताजनक बातें सामने आई है. इसके अनुसार भारत भूजल की कमी के चरम बिंदु की ओर पहुंच रहा है. इसका आसान मतलब ये है कि इस रिपोर्ट में ऐसी आशंका जताई गई है कि देश में आने वाले सालों में भूजल की कमी पैदा हो सकती है.
संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय के पर्यावरण और मानव सुरक्षा संस्थान (UNU-EHS) की ओर से इस रिपोर्ट को जारी किया गया है. 'इंटरकनेक्टेड डिजास्टर रिस्क रिपोर्ट 2023' नाम के इस रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 78% कुओं की हालत खराब हो चुकी है. साथ ही पूरे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में 2025 तक गंभीर रूप से भूजल की कमी का अनुमान लगाया गया है.
भारत के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य हैं.

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दुनिया भर के 31 प्रमुख जलभृतों में से 27 में पानी की कमी का खतरा है. जलभृत धरती के नीचे चट्टान का ऐसा भाग होता है जहां पानी जमा होता है. रिपोर्ट के अनुसार इन 27 प्रमुख जलभृतों में जितनी तेजी से पानी कम हो रहा है, उतनी तेजी से पानी भर नहीं रहा.
यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी की प्रेस रिलीज में भारत के अलावा कई और देशों में भी भूजल की कमी का खतरा बताया गया है. इसके अनुसार सउदी अरब भूजल के खतरे के टिपिंग प्वाइंट को पहले ही पार कर चुका है. जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया में टिपिंग प्वाइंट संकट की अवस्था को कहते हैं. मतलब कि अब खतरे की घंटी बजने लगी है.
खाद्य उत्पादन प्रणाली को खतरा
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में यदि जलस्तर इसी तेजी से गिरता रहा तो किसानों तक अचानक से पानी पहुंचना बंद हो जाएगा. इससे दुनिया भर की खाद्य उत्पादन प्रणाली खतरे में पड़ सकती है.
संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट पर्यावरण में 6 तरह के खतरे की ओर इशारा करती है. धरती से जीवों के विलुप्त होने की गति तेज हो सकती है, ग्राउंडवाटर का स्तर तेजी से गिर सकता है और पहाड़ी ग्लेशियर तेजी से पिघल सकता है. रिपोर्ट में अंतरिक्ष के कचरे और बढ़ती गर्मी को भी संकट बताया गया है. इस रिपोर्ट में दुनिया के भविष्य को चिंताजनक बताया गया है.
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