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"चौकीदार चोर नहीं बोलना चाहिए था" - गुलाम नबी आजाद का ये इंटरव्यू राहुल गांधी को बुरा लगेगा!

"राहुल गांधी बस फोटो खिंचाने और धरना देने वाले नेता हैं, पार्टी के लिए वो ठीक नहीं हैं."

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30 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 30 अगस्त 2022, 04:24 PM IST)
Ghulam Nabi Azad Interview
(दाएं-बाएं) गुलाम नबी आजाद और राहुल गांधी. (तस्वीरें- इंडिया टुडे और राहुल गांधी के फेसबुक अकाउंट से साभार हैं.)
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कांग्रेस छोड़ चुके गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर फिर हमला बोला है. उन्होंने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि राहुल गांधी बस फोटो खिंचाने और धरना देने वाले नेता हैं, पार्टी संगठन के लिए वो ठीक नहीं हैं. गुलाम नबी आजाद ने बताया कि उन्होंने कांग्रेस छोड़ने और उसके बारे में खुलकर बोलने का फैसला अचानक नहीं लिया, इसके लिए उन्हें नौ साल लग गए. ये भी कहा कि उन्होंने राहुल गांधी पर निजी हमले नहीं किए, बल्कि पार्टी की समस्याओं को उजागर किया है.

बीती 26 अगस्त को गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस से अपना पांच दशक पुराना रिश्ता ये कहते हुए तोड़ लिया था कि राहुल गांधी पार्टी कांग्रेस की पूरी परामर्श व्यवस्था को खत्म कर रहे हैं. वरिष्ठ नेता ने ये भी कहा था कि राहुल गांधी कांग्रेस को ऐसे मुकाम तक ले जा रहे हैं, जहां से लौटना पार्टी के लिए मुमकिन ना हो.

Ghulam Nabi Azad Interview में क्या बोले?

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में गुलाम नबी आजाद ने कहा है,

"मुझे किसको दोष देना चाहिए? मैंने राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया क्योंकि उन्होंने कोई कोशिश नहीं की. मेरा मकसद एक पत्र में सबकुछ लिखकर चले जाना था. लेकिन पार्टी ने मुझ पर झूठे आरोप लगाए."

गुलाम नबी ने बताया कि जुलाई 2020 में उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को एक निजी चिट्ठी लिखकर पार्टी के इशूज पर बात की थी. लेकिन उसे कोई तवज्जो नहीं दी गई. फिर अगस्त 2020 में जी-20 लेटर भेजा गया था. इसमें जवाहरलाल नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक कांग्रेस के लिए गांधी परिवार की परफॉर्मेंस की तारीफ की गई थी. लेकिन इस चिट्ठी को सार्वजनिक नहीं किया गया. आगे कहा कि राहुल गांधी को पांच सालों के लिए कांग्रेस अध्यक्ष चुना गया था, लेकिन उन्होंने आधे कार्यकाल के बाद ही पद छोड़ दिया.

गुलाम नबी आजाद ने ये भी कहा कि उन्होंने कांग्रेस को कई चुनाव जिताए, लेकिन अब उन पर ऐसे नेता कुछ नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं जिन्होंने एक भी स्टेट इलेक्शन नहीं जीता और कैबिनेट मंत्री बना दिए गए. आजाद का कहना है कि पिछले नौ सालों में कांग्रेस पार्टी में लगभग सभी फैसले राहुल गांधी और उनके करीबी लोग ले रहे हैं, सीनियर लीडर्स की अनदेखी की जा रही है. 

ये पूछने पर कि क्या नई पीढ़ी को मौका नहीं मिलना चाहिए, गुलाम नबी ने उन नेताओं के नाम गिना दिए जो कांग्रेस छोड़कर दूसरी पार्टियों में चले गए. उन्होंने कहा,

"ज्योतिरादित्य सिंधिया किस पीढ़ी के हैं? जितिन प्रसाद किस पीढ़ी के हैं? आरपी सिंह कौन-सी जेनरेशन के हैं? महिला कांग्रेस विंग की पूर्व सुष्मिता देव किस जेनरेशन की हैं? हार्दिक पटेल कौन-सी पीढ़ी के हैं?"

आगे गुलाम नबी ने कहा,

"संगठन को फिर से खड़ा करने में राहुल गांधी का ध्यान नहीं है. वो फोटो खिंचाने, धरना देने और पब्लिक रैली के लिए ठीक हैं. ये सब खुद ही भाषण देने वाली बात है."

गुलाम नबी ने तंज भरे लहजे में कहा कि हरेक कांग्रेसी जानता है कि पार्टी में या तो राहुल गांधी फैसले लेते हैं या उनके 'सिक्योरिटी गार्ड्स और निजी सहायक'. यहां गुलाम नबी आजाद उन नेताओं की बात कर रहे हैं, जो राहुल गांधी और गांधी परिवार के नजदीकी माने जाते हैं.

‘Rahul Gandhi ने की गलती’

इंटरव्यू में गुलाम नबी आजाद ने 2019 लोकसभा चुनाव का जिक्र किया. बोले कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ राहुल गांधी के 'चौकीदार चोर है' वाले एजेंडा को अप्रूव नहीं किया था. उन्होंने कहा,

"पार्टी के किसी सीनियर नेता ने इस स्लोगन को स्वीकृति नहीं दी थी. आप इसका नतीजा देख लीजिए. राहुल गांधी अपनी ही सीट (अमेठी) हार गए थे. आप मोदी या किसी भी नेता की नीतियों की आलोचना कर सकते हैं. उनके काम की आलोचना कर सकते हैं. संस्थानों को दबाए जाने का विरोध कर सकते हैं. मैंने खुद संसद में सात साल तक ये किया है. लेकिन हरेक पब्लिक मीटिंग जो आप अटेंड करते हैं, उसमें चौकीदार चोर है चुनावी मुद्दा नहीं हो सकता. मैंने चौकीदार चोर एजेंडा को स्वीकृति नहीं दी थी. क्या महंगाई और बेरोजगारी मुद्दा नहीं थे?"

पूर्व कांग्रेस नेता ने उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा गया है कि वो बीजेपी के साथ हैं. गुलाम नबी ने कहा कि इस तरह की बातें करके कांग्रेस के नेता खुद ही 'कांग्रेस मुक्त भारत' कैंपेन को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. बोले,

"मैं वो एजेंडा पूरा नहीं कर रहा. मैं बीजेपी का एजेंडा पूरा कर रहा होता तो नौ सालों से (पार्टी को) सुझाव ना देता."

इंटरव्यू में ये भी पूछा गया कि क्या गुलाम नबी आजाद, पीएम मोदी के और करीब गए हैं. उनके पीएम के साथ कैसे रिश्ते हैं. इस पर सीनियर नेता ने कहा,

"विपक्ष के नेता के तौर पर मेरे कार्यकाल के दौरान मैं कभी उनके पार्लियामेंट ऑफिस नहीं गया, कभी उनके निवास पर नहीं गया, कभी उनके कार्यालय नहीं गया, मैंने कभी भी उनके साथ कोई आधिकारिक डिनर नहीं किया. राष्ट्रपति बुलाएंगे तो मैं जाऊंगा. पीएम मोदी बुलाएंगे तो मैं नहीं जाऊंगा. आपने कभी सुना है कि विपक्ष का नेता प्रधानमंत्री का एक भी फंक्शन अटेंड नहीं कर रहा?"

गुलाम नबी ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस के नेताओं को संसद में ही भूख हड़ताल पर बैठ जाने का सुझाव दिया था. उन्होंने कहा,

"उन्होंने आठ साल क्यों बर्बाद कर दिए? मैंने एक सुझाव दिया था. मैं फिर वही नाम नहीं लूंगा. मैंने कहा था कि बात मनानी है तो संसद स्थगित होने के बाद सदन में ही तब तक भूख हड़ताल पर बैठ जाना चाहिए, जब तक मौत ना हो जाए. पूरी दुनिया हिल जाएगी. कोई नहीं माना."

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि राहुल गांधी को 'भारत जोड़ो यात्रा' करने के बजाय 'कांग्रेस जोड़ो' अभियान चलाना चाहिए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को उन नेताओं को वापस कांग्रेस की तरफ लाने का काम करना चाहिए, जो काफी पहले पार्टी छोड़ गए और अब देश के बड़े नेताओं में शुमार हैं. इनमें एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और आंध्र प्रदेश के सीएम वाईएस जगनमोहन रेड्डी जैसे नेता शामिल हैं. गुलाम नबी ने कहा कि कम से कम पार्टी को इसकी कोशिश करनी चाहिए.

Congress President Election पर क्या बोले?

गुलाम नबी आजाद से कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव को लेकर भी सवाल किया गया. इस पर उन्होंने कहा,

“फिर वही इलेक्शन, जो कांग्रेस को और बर्बाद करेगा. कांग्रेस मेंबरशिप क्या है? हमारे कार्यकर्ता गांव-गांव में घरों में जाकर लोगों को पार्टी का सदस्य बनाएंगे. फॉर्म भरवाएंगे, उसमें फोटो और सिग्नेचर लेंगे और जो भी चंदा होगा वो लेंगे. शहरों में आप मोहल्लों में जाएंगे. तो कांग्रेस की मेंबरशिप क्या है? गांव के स्तर पर तो कांग्रेस है ही नहीं. ब्लॉक लेवल पर कांग्रेस नहीं है. इक्का-दुक्का ब्लॉक्स में होगी.”

गुलाम नबी ने आगे कहा,

"तो मान लीजिए आप ब्लॉक प्रेसिडेंट बन गए हैं. आपने अपने घर में ही वोटरलिस्ट ले ली है. और खुद ही उस पर नाम, फोटो डाले, अपनी तरफ से ही 500 लोगों के नाम का चंदा भर दिया, और कहो कि मैंने 500 लोगों को जोड़ दिया. ये सब मैनिपुलेटिड है. तो बाहर आप कहेंगे कि ये इलेक्टिड है, लेकिन असल में आपने एक भी वोटर नहीं बनाया है."

गुलाम नबी ने कहा कि अब उनके पास कांग्रेस के लिए कोई एडवाइस नहीं है. उनकी विचारधारा नहीं बदलेगी, लेकिन वे वापस नहीं जाएंगे. वो इस पर तो साफ नहीं बोले कि खुद की पार्टी बनाएंगे या नहीं, लेकिन ये साफ कर गए कि राजनीति से संन्यास नहीं लेने जा रहे.

राहुल गांधी के सिक्योरिटी गार्ड और पीए कौन हैं, जिन पर गुलाम नबी आजाद ने आरोप लगाया?

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