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कतर में फांसी की सजा पाए अफसरों के लिए 'इमोशनल' अपील, बहन ने PM मोदी से क्या मांगा?

मीतू भार्गव का मानना है कि कतर भारत का दोस्त है और वो आठों पूर्व अधिकारियों को भारत वापस भेज सकता है. उनका कहना है कि आठों अफसरों को वापस लाने के लिए अब PM को हस्तक्षेप करना चाहिए.

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30 अक्तूबर 2023 (अपडेटेड: 30 अक्तूबर 2023, 12:07 PM IST)
former navy officer sister demands pm modi intervention on qatar court decision death penalty
नौसेना के आठ पूर्व अधिकारियों पर इजराइल के लिए जासूसी करने का आरोप (फोटो- आजतक)
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रिटायर्ड कमांडर पूर्णेंदु तिवारी उन आठ पूर्व नेवी अफसरों में शामिल हैं जिन्हें कतर ने मौत की सजा (Qatar Indian Navy Case) सुनाई है. उनकी बहन मीतू भार्गव ने कम समय का हवाला देते हुआ कहा है कि अब इस मामले में PM मोदी को व्यक्तिगत तौर पर हस्तक्षेप करना चाहिए. मीतू ने आठों पूर्व अफसरों को वापस भारत लाने की मांग की है.

इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में 54 साल की मीतू भार्गव ने कहा कि कतर ने आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया है लेकिन खबरें आई हैं कि आठ लोगों पर इजराइल के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया गया था. वो सभी दिग्गज ‘डेकोरेटेड ऑफिसर’ हैं और निर्दोष हैं. मीतू ने बोला कि कतर में चले मुकदमे को लेकर कोई पारदर्शिता नहीं है जिसके चलते वहां की न्यायिक प्रक्रिया में उनका विश्वास कमजोर हो गया है.

मीतू ने पिछले साल अक्टूबर में भी केंद्र सरकार से अपने भाई की रिहाई के लिए मदद मांगी थी. अब मीतू ने आठ दिग्गजों को वापस लाने के लिए PM मोदी से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है. मीतू का मानना है कि कतर भारत का दोस्त है और वो सभी को भारत वापस भेज सकता है. मीतू ने बताया,

मेरे भाई एक वरिष्ठ नागरिक हैं. वो 63 साल के हैं. मधुमेह और हृदय संबंधी समस्या भी है. 2019 में उन्हें प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया गया था. वो इजराइल के लिए जासूसी क्यों करेंगे? वो इस उम्र में ऐसा कुछ क्यों करेंगे?

बता दें, कमांडर तिवारी प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार प्राप्त करने वाले सशस्त्र बल के पहले दिग्गज थे. उन्हें 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ये सम्मान दिया था. नौसेना की कार्यकारी शाखा के नेविगेशन विशेषज्ञ, कमांडर तिवारी ने INS मगर की कमान संभाली और वो नौसेना के पूर्वी बेड़े के नेविगेशन अधिकारी भी रह चुके हैं. रिटायरमेंट के बाद कतर जाने से पहले उन्होंने सिंगापुर के नौसैनिकों को ट्रेन किया.

रिटायर्ड कमांडर पूर्णेंदु तिवारी के अलावा गिरफ्तार हुए पूर्व अधिकारियों के नाम कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ,  कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश हैं. सभी डहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज़ एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए काम कर रहे थे. ये एक प्राइवेट कंपनी है जो कतरी सेना के जवानों को ट्रेनिंग और इससे जुड़ी मदद प्रदान करती है.

ये भी पढ़ें- कतर में फांसी की सजा वाले पूर्व नेवी अधिकारी जिस कंपनी में थे वो करती क्या है?

सभी पूर्व अधिकारियों को कतर की इंटेलिजेंस एजेंसी ‘स्टेट सिक्योरिटी ब्यूरो’ ने पिछले साल 30 अगस्त की रात गिरफ्तार किया था. उन पर जासूसी के आरोप लगाए गए. ये आरोप क्या हैं, ये बात कतर ने सार्वजनिक नहीं की है. लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इन अधिकारियों पर कतर के सबमरीन प्रोग्राम की गोपनीय जानकारी इजरायल से साझा करने का इल्जाम लगा है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, कतर की इंटेलिजेंस एजेंसी ‘कतर स्टेट सिक्योरिटी’ ने दावा किया था कि उसने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों के उस सिस्टम को इंटरसेप्ट कर लिया था, जिससे वो कथित रूप से जासूसी कर रहे थे. हालांकि, कतर ने भारत सरकार के साथ ऐसा कोई भी सबूत साझा नहीं किया था. इसके बाद कतर की अदालत ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई. 

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