अस्पताल में बेड न मिलने से पूर्व BJP सांसद के बेटे की मौत, डॉक्टर सस्पेंड
मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर स्थित SGPGI अस्पताल में पूर्व बीजेपी सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा के बेटे की मृत्यु हो गई (Former BJP MP son dies in Lucknow hospital). मिश्रा ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को बेड नहीं मिला. उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों पर अपने बेटे का इलाज न करने का आरोप लगाया और बेटे के शव के साथ वार्ड में धरने पर भी बैठे. मांग की, कि संबंधित डॉक्टर पर कार्रवाई की जाए.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भैरों प्रसाद मिश्रा के 41 वर्षीय बेटे प्रकाश मिश्रा किडनी की बीमारी से पीड़ित थे. 30 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे उन्हें SGPGI अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया. बकौल सांसद उन्हें अस्पताल के वार्ड में कोई बेड उपलब्ध नहीं कराया गया. न ही कोई डॉक्टर देखने आया. और कुछ समय बाद उनके बेटे की मौत हो गई.
धरने पर बैठे पूर्व सांसद ने प्रेस से कहा,
“मैंने अपने बेटे को खोया है, लेकिन मैं वहां धरने पर बैठा ताकि ये लोग सुधरें. मेरे बाद लगभग 20-25 लोगों को इलाज मिला. जब मैं धरने पर बैठा था तो हर कोई उस डॉक्टर के बारे में शिकायत कर रहा था. उसे दंडित किया जाना चाहिए.”
इस घटना को लेकर अस्पताल के अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई करने की बात कही है. साथ ही मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया है. अस्पताल के प्रमुख डॉ. आरके धीमन ने मीडिया को बताया,
“डॉक्टर ने उन्हें ICU में ले जाने के लिए कहा था. लेकिन वहां कोई बेड उपलब्ध नहीं था. हमने मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया है. फिलहाल के लिए आरोपी डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है.”
मामले में अब राजनीति भी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने घटना को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा,
सरकार ने क्या एक्शन लिया?‘’ये अस्पताल की गलती नहीं है. बल्कि ये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गलती है. अस्पताल को कोई बजट क्यों नहीं दिया जा रहा है?''
उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, जो कि सूबे के स्वास्थ्य मंत्री भी हैं, उन्होंने घटना का संज्ञान लेते हुए सोशल मीडियो वेबसाइट X पर लिखा,
‘’पीजीआई, लखनऊ में पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र जी के सुपुत्र के दु:खद निधन के संबंध में यूपी सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. प्रथम दृष्टया जांच में दोषी पाए गए संबंधित चिकित्सक को संस्थान से कार्य मुक्त किया जा रहा है. भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति ना हो इस संबंध में निदेशक, पीजीआई को चेतावनी भी दी गई है.''
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