एक हैकर ने पूरा अमेरिका हिला दिया!
जैक टशेरा कौन हैं? उसने ये दस्तावेज कैसे लीक किए?

एक वीडियो में एक शख्स अपने दोनों हाथों को ऊपर किए पीछे की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है. उसपर कुछ लोग बंदूकें ताने हुए हैं. ये शख्स धीरे-धीरे पीछे बढ़ता है, फिर घुटने के बल बैठ जाता है. उतने में पीछे खड़े बंदूकधारी, इस व्यक्ति को अरेस्ट कर लेते हैं. ये बंदूकधारी अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी FBI के अफ्सर हैं. और गिरफ्तार होने वाले व्यक्ति का नाम जैक टशेरा. क्यों गिरफ्तार किया गया जैक को? क्योंकि उसने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के दर्जनों गोपनीय दस्तावेज़ लीक कर दिए हैं. इन दस्तावेजों में इज़रायल-मोसाद, UN चीफ़, रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे विषयों पर सनसनीखेज खुलासे किए गए हैं. मालूम चला है कि अमेरिका अपने दुश्मनों ही नहीं, दोस्तों की भी जासूसी करता है. इसीलिए जैक ने अमेरिका समेत दुनिया के कई बड़े नेताओं की नाक में दम कर रखा है.
तो आज हम जानेंगे
- जैक टशेरा कौन हैं? उसने ये दस्तावेज कैसे लीक किए?
- इन दस्तावेजों से क्या राज़ सामने आए?
- और राज़ खुलने के बाद इसका अमेरिका और दूसरे देशों पर क्या असर पड़ेगा?
आज हम अमेरिकी रक्षा मंत्रलय के उन खुफिया डॉक्यूमेंट्स की बात करेंगे, जो हाल ही में लीक हुए. कहानी की शुरुआत करने से पहले हमें समझना होगा डिस्कॉर्ड क्या होता है? डिस्कॉर्ड एक प्राइवेट सर्वर होता है. जिसमें लोग जुड़कर बातें करते हैं. यहां वीडियो, फोटो वगैरह शेयर होती हैं. मोटा-माटी समझ लीजिए ये एक ऑनलाइन ग्रुप के माफिक होता है. लेकिन बहुत ही प्राइवेट. आप किसी के सर्वर में जाकर जुड़ सकते हैं. या आप चाहें तो दूसरों को भी अपने सर्वर में जोड़ सकते हैं. ज़्यादातर इसका इस्तेमाल यूट्यूबर्स और इन्फ्लूएंसर्स करते हैं. कई गेमर्स भी इसका इस्तेमाल करते हैं. ऐसा ही एक यूट्यूबर का डिस्कॉर्ड सर्वर था जिसमें खूब बातें हुआ करती थीं. उस यूट्यूबर के ढाई लाख के आस-पास सब्सक्राइबर्स हैं. ABC न्यूज़ के मुताबिक वो यूट्यूबर धर्म और राजनीती पर कॉमेडी वीडियो बनाता है.
1 मार्च 2023 की शाम इस डिस्कॉर्ड पर एक व्यक्ति ने कुछ डॉक्यूमेंट शेयर किए. फिर 4 मार्च को एक अलग डिस्कॉर्ड जो माइन क्राफ्ट गेमर्स के लिए बनाया गया था वहां इसी डॉक्यूमेंट की 10 इमेज शेयर की गईं. 5 अप्रैल तक इन लीक्ड डाक्यूमेंट्स की कुछ इमेज प्रो रशियन टेलीग्राम में शेयर की जाने लगी. जो डॉक्यूमेंट रूसी टेलीग्राम में शेयर किया जा रहा था उसमें रूस-यूक्रेन युद्ध से संबधित जानकारियाँ मौजूद थीं. इसमें दिखाया गया था कि कैसे यूक्रेन में मारे जा रहे लोगों के आंकड़ों को कम बताकर पेश किया जाए. चूंकि ये रूसी ऐजेंडे के ख़िलाफ़ था इसलिए ये डाक्यूमेंट्स रूस में रातों-रात आग की तरह फ़ैल गया. बात रूस तक ही नहीं पहुंची, बल्कि ये डॉक्यूमेंटस अब इंटरनेट में कई जगह दिखने लगे. अगले ही दिन माने 6 अप्रैल को अमेरिकी अखबार द न्यू यॉर्क टाइम्स ने इस लीक डॉक्यूमेंट के बारे में ख़बर चलाई. अखबार ने सुर्खी लगाई,
Ukraine War Plans Leak Prompts Pentagon Investigation. माने यूक्रेन में लड़ाई का प्लान लीक, पेंटगॉन जांच कराएगा. 6 अप्रैल को पहली बार कोई मीडिया हाउस खुलासा कर रहा था कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के दस्तावेज लीक हो गए हैं. न्यू यॉर्क टाइम्स की इस ख़बर ने अमेरिकी राजनीति में भूचाल ला दिया था. सभी ओर बस इसी बात की चर्चा थी. अगले ही दिन माने 7 मार्च को डिस्कॉर्ड से सारे डाक्यूमेंट्स हटा दिए गए. और उस सर्वर का एक्सेस भी प्रतिबंधित कर दिया गया. लेकिन तब तक खेल हो चुका था. डॉक्यूमेंट इंटरनेट में सर्कुलेट हो रहे थे. 7 मार्च तक लगभग हर मीडिया उसे कवर कर रहा था. जैसे-जैसे डॉक्यूमेंट्स पढ़े गए, हर पन्ने से नए राज़ सामने निकलकर आए. कभी रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ा राज़ तो कभी मोसाद और इज़रायल का. कभी सामने आता कि अमेरिका UN चीफ़ की जासूसी करवा रहा था तो डाक्यूमेंट्स ने ये भी बताया कि ईजिप्ट 40 हज़ार राकेट रूस को भेजने की तैयारी कर रहा है.
क्या-क्या निकला डॉक्यूमेंटस में आइए विस्तार से जानते हैं.
1 . पहला- रूस- UAE संबंध मज़बूत हुए –
दस्तावेजों में ये बात निकलकर आई कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इस बात की भनक थी कि रूस, संयुक्त अरब अमीरात माने UAE से रिश्ते पक्के करने में जुटा है. UAE में अमेरिकी सेना के कई ठिकाने मौजूद हैं. UAE और अमेरिका लंबे वक्त से साझेदार देश भी हैं. वहीं बात करें रूस और UAE के संबंधों की तो दोनों के बीच ये रिश्ता पिछली शताब्दी से है. सोवियत यूनियन के दौर में साल 1971 में दोनों देशों ने डिप्लोमेटिक संबंध बनाए थे. जब 2015 में रूस ने सीरिया के सिविल वॉर में मुदाखिलत की थी तो गल्फ कोपरेशन काउंसिल में UAE अकेला एक देश था जिसने रूस का समर्थन किया था.
हालांकि UAE रूस को समर्थन देने में भी अपना हित खोज रहा था. UAE ने उस वक्त कहा था कि रूस जहां हमला कर रहा है वो हमारा भी दुश्मन है. लेकिन जब हम UAE और अमेरिकी रिश्तों की बात करते हैं तो वो UAE और रूस के संबंधों से ज़्यादा प्रगाढ़ हैं. क्योंकि दोनों देशों के व्यापारिक संबंध भी रूस की तुलना में बेहतर हैं. पर जबसे लीक दस्तावेजों में ये बात सामने आई है कि UAE और रूस करीब आ रहे हैं और इसकी भनक अमेरिकी खूफिया ऐजेंसियों को पहले से थी. तबसे ही दोनों के बीच रिश्ते असहज होने शुरू हो गए हैं. हालांकि UAE ने इन आरोपों को खारिज किया है.
2 .दूसरा खुलासा हुआ है इजिप्त और रूस के बीच 40 हज़ार राकेट की डील को लेकर.
वाशिंगटन पोस्ट ने लीक डॉक्यूमेंट के हवाले से ये ख़बर चलाई कि इजिप्त और रूस के बीच हथियारों को लेकर एक डील हुई थी. अखबार के मुताबिक इजिप्त के राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल-सिसी ने गुपचुप तरीके से 40 हज़ार रॉकेट रूस भेजने का आदेश दिया था. डील के मुताबिक ये राकेट समुद्र के रास्ते जहाज़ से भेजे जाने वाले थे. इन रॉकेटों का इस्तेमाल रूस, यूक्रेन के ख़िलाफ़ चल रहे युद्ध में करने वाला था. जब ये आरोप इजिप्त तक पहुंचे तो उसने इसे ख़ारिज कर दिया. इजिप्त के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि हम इस संकट में हिस्सेदार नहीं हैं और हम दोनों ही पक्षों से समान दूरी बनाए रखेंगे.
3. तीसरा खुलासा जुड़ा है. इज़रायल और उसकी खूफिया ऐजेंसी मोसाद से.
इज़रायली खुफिया एजेंसी मोसाद, प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू के प्रस्तावित न्यायिक सुधारों का विरोध कर रही है. लीक्ड दस्तावेज़ों में लिखा है कि इजरायल की खूफिया एजंसी मोसाद अपनी ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन को बढ़ावा दे रही थी. रिपोर्ट के अनुसार मोसाद के अधिकारी इज़रायल की जनता को विशेष रूप से भड़का रहे थे, ताकि वो नए संविधान संसोधनों का खुलकर विरोध करें.
कौन से संविधान संसोधन?दरअसल नेतान्याहू की सरकार पिछले दिनों एक बिल लेकर आई थी. इस बिल में न्यायपालिका की शक्ति को कम करने के प्रस्ताव थे. उसके उलट नेतान्याहू का कहना था कि ये देश के भले के लिए किया जा रहा है. इससे न्यायपालिका कमज़ोर नहीं होगी. पर जनता सब जानती है. उसने इस बिल का विरोध किया. पूरे देश में प्रोटेस्ट का आयोजन हुआ. इसी प्रदर्शन को मोसाद भड़का रहा है ऐसी बात लीक डॉक्यूमेंट में कही गई है.
क्या कहता है बिल?> अगर सुप्रीम कोर्ट संसद द्वारा पास किसी बिल को संवैधानिक आधार पर अवैध घोषित करती है, तब संसद साधारण बहुमत से सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला पलट सकती है. इसमें एक अपवाद रहेगा. अगर सुप्रीम कोर्ट के सभी 15 जज एक साथ किसी कानून को अवैध करार दें, तब उस फ़ैसले को संसद नहीं पलट सकती.
> दूसरा प्रस्ताव, ज्युडिशियल पैनल के सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ा था. नए प्रस्ताव में पैनल के अधिकतर सदस्यों को चुनने की ज़िम्मेदारी सरकार के पास होगी. यानी, सरकार अपने फायदे के हिसाब से जजों को सुप्रीम कोर्ट में बिठाने में कामयाब हो जाएगी.
इजरायली सरकार ने डॉक्यूमेंट में कही बात को झूठा करार दिया है. प्रधानमंत्री के ऑफिस से जारी पत्र में कहा गया है, कि मोसाद या उसके अधिकारियों ने अपने गठन से अब तक कभी किसी प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया न ही उसे बढ़ावा दिया. नेतन्याहू भले ही इस लीक को झूठा बता रहे हों लेकिन अमेरिका खुद इस डॉक्यूमेंट लीक को लेकर गंभीर बना हुआ है. हो सकता है आने वाले दिनों में डॉक्यूमेंट लीक को लेकर और भी खुलासे हों और तब इज़रायल के लिए मुश्किल खड़ी हो. खैर हम चलते हैं अगले खुलासे की तरफ
4. अगला खुलासा है रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ा.
इन डॉक्यूमेंट की सबसे ज़्यादा चर्चा रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े खुलासे की वजह से ही हो रही है. डॉक्यूमेंट में खुलासा किया गया है कि यूक्रेन आगामी गर्मी के मौसम में रूसी सेना पर बड़े हमले की तैयारी कर रहा है. डॉक्यूमेंट में बताया गया है कि यूक्रेनी सेना की नई ब्रिगेडें कब तक तैयार होंगी. और उनको आगे किस तरह ट्रेनिंग दी जाएगी. डॉक्यूमेंट में लिए इसकी जानकारी भी मौजूद है कि सेना को कितने टैंक, बख़्तरबंद गाड़ियां और तोपखाने मुहैया करवाया जा रहे हैं. लेकिन ये भी कहा गया है कि हथियारों की उपलब्धता ट्रेनिंग और तैयारी पर निर्भर करेगी. लीक डॉक्यूमेंट में एक मैप के ज़रिए प्लानिंग समझाई गई है. इसमें पूर्वी यूक्रेन में गर्मियों के दौरान यूक्रेनी सेना की कार्रवाई का आकलन किया गया है.
डॉक्यूमेंट में इस बात का भी ज़िक्र है कि यूक्रेन का एयर डिफ़ेंस सिस्टम युद्ध के दौरान सही ढंग से काम नहीं किया है. इसकी वजह सर्दी बताई गई है. सर्दियों में एयर डिफेंस सिस्टम ने सुचारू ढ़ंग से काम करना बंद कर दिया था. DW की ख़बर के मुताबिक कुछ दस्तावेजों में इस बात का भी जिक्र है कि किन परिस्थितियों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं.
5. पांचवा- ये खुलासा भी रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ा हुआ है. लीक हुए एक और दस्तावेज के आधार पर दावा किया जा रहा है कि कैसे अमेरिकी दबाव के बावजूद दक्षिण कोरिया यूक्रेन को तोप के गोले देने में हिचक रहा है. इस जंग में ब्रिटेन की स्पेशल मिलिट्री फोर्स यूक्रेन का साथ दे रही है और उसकी तैनाती यूक्रेन में की गई है. इसके अलावा अमेरिका की टुकड़ियां भी यूक्रेन में मौजूद हैं.
6. UN चीफ एंटोनियो गुटेरेस की जासूसी-
डॉक्यूमेंट्स में कहा गया है कि अमेरिका, UN चीफ एंटोनियो गुटेरेस की भी जासूस करवा रहा है, अमेरिका का मानना है कि UN चीफ रूस के हितों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. वो ‘ब्लैक सी ग्रेन डील’ को हर हालत में बचाना चाहते थे.
उसके अलावा कई छोटे-छोटे खुलासे इस दस्तावेज में किए गए हैं. जैसे
- यमन के हूति विद्रोहियों से मिलने रूस का वैगनर ग्रुप गया था. वैगनर ने हूतियों के सामने समर्थन की पेशकर भी रखी और कहा कि हम यमन में अपराध से लड़ने में आपकी मदद करेंगे. हालांकि अब इस बात की रेलेवेंस ज़्यादा रह नहीं जाती क्योंकि पिछले दिनों ही सऊदी का एक डेलिगेशन यमन गया था. वहां उसने हूतियों से सीज फायर समेत यमन की शांति की मसले पर कई समझौते किए थे.
- एक डॉक्यूमेंट में ये बात सामने कि अमेरिका की खूफिया ऐजेंसियों के पास ईरान और ईरान की सुरक्षा ऐजेंसियों की कई खूफिया जानकारी पता हैं. डॉक्यूमेंट में एक ज़िक्र मिलता है कि जब ईरान में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के डारेक्टर का दौरा हो रहा था तो कैसे ईरान के सीनियर लीडर्स ने उसकी तैयारियां की थीं.
डॉक्यूमेंट से हुए खुलासों पर अल्पविराम देते हैं और आपसे एक सवाल करते हैं. सवाल ये कि वो देश जो दुनिया में सबसे बड़ा ताकतवर माना जाता है. जिसके पास दुनिया की सबसे पावरफुल आर्मी. सबसे एडवांस हथियार. टेक्नोलॉजी, सुरक्षा ऐजेंसियां मौजूद हों, उससे इतनी बड़ी चूक कैसे हो सकती है? अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को हर साल 90 अरब डॉलर माने 7 लाख करोड़ रुपयों से ज़्यादा का बजट मिलता है. ये वो आंकड़ा है, जो आम लोगों तक पहुंचता है. लेकिन हम कभी अमेरिकी खुफिया तंत्र के बजट या ताकत का सही अनुमान नहीं लगा सकते. इस सबके बावजूद इतने बड़े लीकेज ने खुफिया एजेंसियों की गोपनीयता कायम रखने की काबिलियत पर बट्टा लगा दिया है.
लीक डॉक्यूमेंट में जो दावे किए जा रहे हैं उनको सच मानने की एक वजह ये भी है कि अमेरिका ने अभी तक इन लीक्स को फ़र्ज़ी करार नहीं दिया है. बल्कि वो इसके लिए कायदे से जांच कर रही है. इसी कड़ी में FBI ने जैक टशेरा नाम के शख्स को गिरफ्तार भी किया है. जैक पर आरोप हैं कि उसी ने ये डॉक्यूमेंट लीक किए हैं. कौन है जैक टशेरा अब वो जान लेते हैं,
इफ़्तार
जैक मैसाचुसेट्स एयर नेशनल गार्ड का मेंबर रह चुका है. उसकी उम्र 21 साल है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक FBI पिछले 2 दिन से जैक पर नजर रखे हुए थी. 13 अप्रैल की सुबह जैसे ही वो अपने घर से बाहर निकला FBI एजेंट्स ने उसे गिरफ्तार कर लिया. आरोप हैं कि जैक ने सबसे पहले 'ठग शेकर सेंट्रल' नाम के डिस्कॉर्ड चैटरूम में ये फाइल्स शेयर की थीं. इस डिस्कॉर्ड में लोग एक ज़ोम्बी गेम खेला करते थे. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इंवेस्टिगेशन के दौरान जैक के घर से कई गन और हथियार बरामद हुए हैं. उसने डिस्कॉर्ड प्लेटफॉर्म पर अपना नाम भी ओरिजनल गैंगस्टर OG रखा था. अब जैक धरा लिया गया है. 15 अप्रैल को बोस्टन की कोर्ट में उसे पेश किया जाएगा. जैक साइबर ट्रांसपोर्ट सिस्टम स्पेशलिस्ट था वो ये सुनिश्चित करता था कि सिस्टम का ग्लोबल कम्युनिकेशन नेटवर्क सही से काम कर रहा है या नहीं. उसे हाल ही में एयरमैन फर्स्ट क्लास के रैंक पर प्रमोट किया गया था.
वीडियो: दुनियादारी: यूएस डाक्यूमेंट्स लीक में पुतिन को लेकर क्या खुलासा हुआ कि हड़कंप मच गया!

