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गाजीपुर बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों के साथ पुलिस ने ये क्या कर डाला?

किसान नेता डर का माहौल बनाने का आरोप लगा रहे.

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28 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 28 जनवरी 2021, 08:59 AM IST)
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भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने प्रशासन पर माहौल खराब करने का आरोप लगाया है. (फोटो PTI)
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दिल्ली में 26 जनवरी को किसानों को ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद 27-28 जनवरी की दरम्यानी रात ग़ाज़ीपुर बॉर्डर से ख़बर आयी. ख़बर ये कि ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध में डेरा डाले बैठे किसानों की बिजली आधी रात को काट दी गयी. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने ये आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार डर का माहौल बना रही है. वहीं. दिल्ली-नोएडा के बीच चिल्ला बॉर्डर से किसानों के टेंट उखड़ रहे हैं. पुलिस ने बैरिकेडिंग भी हटा दी है. किसान नेताओं ने 1 फ़रवरी को आम बजट के दिन अपना प्रस्तावित संसद मार्च स्थगित करने का ऐलान किया है. राजधानी में हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस के आला आधिकारियों की गृह मंत्रालय में लगातार बैठकें हो रही हैं. न्यूज़18 की ख़बर बताती है कि गृह मंत्रालय में मीटिंग के बाद गाजीपुर बॉर्डर पर देर रात बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई. आधी रात को ग़ाज़ियाबाद पुलिस के आला अधिकारी भी मौक़े पर पहुंचे थे. लेकिन स्थिति का जायज़ा लेने के बाद वापिस चले गए. फिर आयी बिजली काटने की ख़बर. भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने आजतक से बातचीत में कहा-
प्रशासन ने माहौल ख़राब कर दिया है. लाइट बंद कर दी है. प्रशासन चाहता है कि हमारा आंदोलन ख़त्म हो जाए. डर का माहौल बनाया जा रहा है. पुलिस कार्रवाई के डर से किसान रात भर जागते रहे. 
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अगर गाजीपुर बॉर्डर के इलाके में बिजली काटने की फिर कोशिश गई तो किसान लोकल पुलिस स्टेशनों का रुख करेंगे. फिर जो कुछ होगा, उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी. एक खबर यूपी के बागपत से भी आई, जहां करीब 40 दिन से हाइवे पर डेरा डाले बैठे किसानों को पुलिस ने आधी रात को हटा दिया. एक तरफ आंदोलनकारी किसानों पर पुलिस की सख्ती की खबरें आ रही हैं, वहीं किसान नेताओं की और से 1 फ़रवरी को अपना संसद मार्च भी स्थगित करने का ऐलान किया गया है. भारतीय किसान यूनियन के नेता बलबीर राजेवाल ने कहा कि शहीद दिवस पर (यानी 30 जनवरी को) देशभर में सार्वजनिक रैलियां की जाएंगी और एक दिन का उपवास रखा जाएगा. संसद मार्च का फैसला वापस लेने की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब दिल्ली में हिंसा के बाद दो किसान संगठन- राष्ट्रीय मजदूर किसान संगठन और भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने खुद को आंदोलन से अलग कर चुके हैं. भारतीय मजदूर किसान संगठन के प्रमुख वीएम सिंह ने 27 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये भी कहा था, 
“दिल्ली में जो हंगामा और हिंसा हुई, उसकी जिम्मेदारी भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत को लेनी चाहिए. हम ऐसे किसी शख्स के साथ विरोध को आगे नहीं बढ़ा सकते, जिसकी दिशा कुछ और हो.”
यानी सीधा आरोप राकेश टिकैत पर. और इसी के 15 मिनट बाद भारतीय किसान यूनियन (भानु) ने दिल्ली के चिल्ला बॉर्डर का अपना धरना ख़त्म करने का ऐलान कर दिया. भानु प्रताप सिंह का कहना था कि 26 जनवरी को दिल्ली में जो कुछ हुआ, उससे मैं बहुत दुखी हूं और 58 दिनों का अपना प्रोटेस्ट खत्म कर रहा हूं. बता दें कि राजधानी में हिंसा को लेकर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ़्रेन्स के दौरान किसान नेताओं पर विश्वासघात का गंभीर आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि लाल क़िले वाला रूट दिल्ली पुलिस और किसान नेताओं के बीच समझौते में शामिल नहीं था. लेकिन किसान नेताओं ने प्लान के तहत उग्र लोगों को आगे कर दिया. सब कुछ सुनियोजित तरीक़े से किया गया. पुलिस के पास एक्शन के सारे विकल्प थे, लेकिन पुलिस ने संयम से काम लिया. कमिश्नर ने कहा कि हिंसा के किसी भी आरोपी को बख़्शा नहीं जाएगा. किसान नेताओं के खिलाफ भी केस दर्ज किए गए हैं.

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