'वर्कलोड' से बेटी की मौत, अंतिम संस्कार में कंपनी से कोई नहीं पहुंचा, मां का पत्र वायरल
मां की चिट्ठी सामने आने के बाद अब कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा है कि कोई भी उपाय परिवार द्वारा अनुभव किए गए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता है.

महाराष्ट्र का पुणे शहर. Ernst & Young (EY) नाम की कंपनी, जिसे ‘Big Four’ में गिना जाता है. ये कंपनियां देश की टॉप अकाउंटिंग और प्रोफेशनल सर्विस देने वाली कंपनी होती हैं. पर शायद सर्विस देने के नाम पर ये कंपनियां कर्मचारियों से इतना काम कराती हैं, कि उन्हें उनके मेंटल और फिजिकल स्टेट से कोई फर्क नहीं पड़ता. ऐसा ही कुछ अनीता ऑगस्टाइन की बेटी के साथ हुआ. EY में काम करने वाली उनकी 26 साल की CA बेटी एना सेबेस्टियन पेरायिल की ‘ज्यादा वर्कलोड’, ‘नींद की कमी’ और ‘लेट खाना खाने’ की वजह से मौत हो गई. 20 जुलाई को दुनिया को अलविदा कहने वाली एना की मौत पर कंपनी ने भी बयान जारी किया है. कंपनी ने ‘कंपनी’ की तरह ही कहा है कि वो एना के परिवार के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती है.
कंपनी ने क्या कुछ कहा वो जानने से पहले पूरा मामला बताते हैं.
एना पर था काम का ‘भयंकर प्रेशर'CA एना सेबेस्टियन पेरायिल की मौत का ये मामला उनकी मां अनीता ऑगस्टाइन द्वारा लिखे गए एक पत्र में किए गए खुलासों के बाद सामने आया. EY के इंडिया चेयरमैन राजीव मेमानी को लिखे पत्र में अनीता ने आरोप लगाए कि उनकी बेटी के बॉस ने उनसे इतना काम लिया कि वो तनाव में आ गई थीं. मां का आरोप है कि एना के ऊपर लगातार ज्यादा से ज्यादा काम करने का प्रेशर डाला जा रहा था. अंत में काम के बोझ में दबी उनकी बेटी की मौत हो गई. अनीता ने लेटर में लिखा,
एना को एक वॉरियर बताते हुए अनीता ने कहा कि उनकी बेटी ने पढ़ाई से लेकर हर चीज में एक्सेल किया. वो स्कूल टॉपर थी, कॉलेज टॉपर रही, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में बढ़िया किया, CA एग्जाम पास. उन्होंने बताया,
माता-पिता को कॉन्वोकेशन में बुलाने का सपना थाअनीता ने लेटर में लिखा कि एना के CA कॉन्वोकेशन के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. उन्होंने लिखा,
डॉक्टर ने एना के पेट में बनने वाले एसिड को खत्म करने के लिए दवाएं दीं. अनीता लिखती हैं कि इसके बाद उन्हें विश्वास हो गया था कि कोई गंभीर बात नहीं है. अनीता ने लिखा,
पहले भी कई कर्मचारी रिजाइन कर चुके थेएना की मां ने बताया कि जब वो टीम में शामिल हुई तो उसे बताया गया कि कई कर्मचारियों ने वर्क लोड की वजह से रिजाइन किया है. अनीता ने लिखा,
अनीता ने बताया कि एना को अपने मैनेजर के बारे में कलीग्स से कई चेतावनियां मिली थीं. उन्होंने लिखा,
एना के कंसर्न को नकार दिया जाता थाएना की मां ने लिखा कि उनकी बेटी अक्सर ऑफिस से पूरी तरह से थकी-हारी लौटती थी. कभी-कभी वो बिना कपड़े चेंज किए ही बिस्तर पर सो जाती थी. एक बार तो उसके मैनेजर ने देर रात कॉल करके उसे अगली सुबह तक टास्क खत्म करने के लिए कह दिया, जिस वजह से उसके पास आराम करने का कोई वक्त नहीं था.
अनीता ने बताया कि जब भी एना मैनेजर से अपनी परेशानी बताती थी तो उसके कंसर्न को नकार दिया जाता था. उससे कहा जाता था,
उन्होेंने लेटर में आगे लिखा,
अपने पत्र के अंत में अनीता ने कंपनी से जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया. उन्होंने लिखा,
एना, दिन-रात घिस कर काम करने वाले एटीट्यूड और मैनेजरों की ‘हम सब भी यही करते हैं’, वाली बातों को मानती रही. ‘एना ने हार नहीं मानी’, जैसा कि उसकी मां अनीता ने बताया. लेकिन अंत में उसके शरीर ने हार मान ली. यहां तक अनीता ने ये भी बताया कि एना की मौत के बाद कंपनी से कोई भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए नहीं आया.
जिस कर्मचारी ने कंपनी के लिए दिन-रात एक कर दिया, मेंटल हेल्थ कुर्बान कर दी, उसके लिए कंपनी की तरफ से महीनों बाद एक बयान आया है. वो भी जब उसकी मां का ये लेटर सामने आया.
कंपनी ने क्या जवाब दिया?EY ने एक बयान में कहा है,
कंपनी ने आगे कहा,
EY के बारे में अगर आप गूगल करेंगे तो पाएंगे कि कंपनी की टैगलाइन है, ‘Building a better working world’. ऐसा लगता है कि एना के लिए ये टैगलाइन बिल्कुल काम की नहीं थी. ये स्टोरी लिखते वक्त मेरे लिए भी बेटर वर्ल्ड की परिभाषा बदल गई. आखिर में मेरे जैसे सभी साथियों और जिंदगी की जंग लड़ रहे युवाओं के लिए डॉक्टर आरफ़ा सईदा जेहरा की एक लाइन लिख रहा हूं, पढ़िए और इसे रोज आत्मसात कीजिए.
"ज़िंदगी को रोजगार चाहिए होता है, रोजगार को जिंदगी नहीं चाहिए होती."
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