उत्तर प्रदेश का एटा जिला. यहां पर एक लड़की की शादी थी. परिवारवालों ने शादी केलिए खूब तैयारियां की थीं. मेहमानों की आवभगत का पूरा इंतजाम था. खाने के लिएव्यंजन बने थे, पीने के लिए मिनरल वाटर था और वो सबकुछ जो एक शादी को और भीखूबसूरत बना देता है. सब कुछ ठीक चल रहा था. अचानक शाम को घरवालों को उनको पता चलाकि जिसे मिनरल वाटर की सप्लाई करनी थी, वो उनलोगों को पानी नहीं देगा. वजह पूछने परवाटर सप्लायर ने जो बताया, उसे हमारे समाज के मानसिक दिवालियापन के अलावा और कुछ भीनहीं कहा जा सकता है. पानी के सप्लायर ने कहा- ‘अगर हमने नीची जात वालों को पानी देदिया तो ऊंची जात वाले हमसे पानी लेना बंद कर देंगे.’ अब तो शायद समझ में आ गयाहोगा कि ये मानसिक दिवालियापन किस कदर हमारे समाज में घर कर चुका है. हमारे इस समाजमें एक दलित घोड़ी नहीं चढ़ सकता, उसे गोली मार दी जाएगी. एक दलित अपनी बेटी कीशादी में मिनरल वाटर नहीं मंगा सकता, क्योंकि सवर्ण और दलित दोनों को ही पानीसप्लाई करने वाला सप्लायर एक ही है. अगर सप्लायर ने दलित के घर पानी दिया, तो कथितऊंची जाति वालों की नाक कट जाएगी और वो उस सप्लायर से पानी नहीं लेंगे.A family from Uttar Pradesh's Etah was allegedly refused the supply of mineralwater as they belonged from a Dalit community. The family claimed that thesupplier refused to provide water in their wedding function.Read @ANI Story | https://t.co/bfYqRrdwIu pic.twitter.com/FTAQgzpCYv — ANIDigital (@ani_digital) May 26, 2018 खैर उस लड़की की शादी तो हो गई, लेकिन जख्म तोअपनी जगह पर कायम है. उसने कहा है, 'हमें पानी देने से सिर्फ इसलिए मना कर दियाक्योंकि हम दलित हैं. हम चाहते हैं कि जिन्होंने ये काम किया है उन्हें सख़्त सेसख़्त सजा दी जाए. नहीं तो ये यही काम फिर किसी के साथ करेंगे.' लड़की के परिवार नेकहा है कि हमने शिकायत दर्ज़ करा दी है. अगर फिर भी कुछ नहीं होता तो हममुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास अपनी शिकायत लेकर जाएंगे. सरकार इस पर क्याफैसला लेगी पता नहीं, लेकिन इतना ज़रूर है कि अगर समाज ने और सरकार ने इस नाइंसाफीको दूर नहीं किया, तो जख्म है वो नासूर बन जाएगा और फिर इसका इलाज़ बेहद मुश्किलहोगा. केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने फिटनेस चैलेंज की शुरुआत की है. अच्छीमंशा से ही की है. लेकिन जब इस समाज में ऐसी घटनाएं हो रही हैं, तो फिजिकल फिटनेसचैलेंज के साथ ही एक मेंटल फिटनेस चैलेंज की भी ज़रूरत बरकरार है. क्योंकि अगर देशमानसिक तौर पर स्वस्थ होता तो किसी दलित को घोड़ी चढ़ने या फिर पानी पीने से नहींरोकता. लेकिन ऐसा हो रहा है. और लोग अब छुआछूत नहीं होता, ‘जाति अब मैटर नहीं करती,तो आरक्षण क्यों’, जैसी बातें बोलते-बोलते इन खबरों से मुंह फेरते नज़र आते हैं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: एक दलित जब 2018 में अगड़ी जाति के 'पेटेंट' वाला सरनेम लगा ले, तोक्या होता है गुजरात में कूड़ा बीनने की बात पर एक दलित को पीट-पीटकर मार डालागुजरात में घोड़ी चढ़ने पर मारे गए दलित की कहानी पुलिस ने कुछ और बताई है पड़ताल:'बुलंदशहर में रेप' की बात के साथ जुड़े दो वीडियो कहां से आए योगी के मंत्री नेदलित के घर खाया, घरवालों को पता नहीं खाना किसने बनाया वीडियो: फसल काटने से इनकारकरने पर दलित युवक की पिटाई वाले वीडियो की सच्चाई