AAP राष्ट्रीय पार्टी बनी, चुनाव आयोग ने 3 दलों का ये दर्जा वापस ले लिया
उत्तर प्रदेश में RLD से क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा छीना गया.

चुनाव आयोग ने आम आदमी पार्टी (AAP) को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दे दिया है. वहीं तीन राजनीतिक दलों से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिन गया है. ये दल हैं- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) और तृणमूल कांग्रेस (TMC). आम आदमी पार्टी ने 6 अप्रैल को कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी कि शर्तों को पूरा करने के बाद भी उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा देने में देरी हो रही है. AAP ने याचिका में लिखा था कि पार्टी कर्नाटक में सभी 224 सीटों पर लड़ रही है और राष्ट्रीय पार्टी की पहचान मिलने से चुनाव में मदद मिलेगी. इसके बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वो 13 अप्रैल तक AAP को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा देने के लिए आदेश जारी करे.
AAP को कैसे मिला राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा?गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही AAP ने राष्ट्रीय पार्टी होने की शर्तों को पूरा कर दिया था. चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक, राष्ट्रीय पार्टी होने के लिए तीन मुख्य शर्तों में से एक का पूरा होना जरूरी है. 1- अगर किसी पार्टी को चार राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा मिला हो यानी कम से कम चार राज्यों में कुल 6 फीसदी या ज्यादा वोट शेयर मिले हों. 2- अगर कोई भी राजनीतिक दल चार लोकसभा सीटों के अलावा लोकसभा में 6 फीसदी वोट हासिल करे. 3- अगर तीन राज्यों में पार्टी कुल लोकसभा सीट का 2 फीसदी सीट जीती हो.
दिल्ली और पंजाब में तो आम आदमी पार्टी बहुमत वाली सरकार चला रही है. गोवा के चुनाव में भी पार्टी ने 6.77 फीसदी वोट शेयर के साथ दो सीटें जीती थीं. वहीं दिसंबर 2022 में हुए गुजरात चुनाव में पार्टी ने 5 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर 12.92 फीसदी था.
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के बाद AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा,
राष्ट्रीय पार्टी होने के फायदेचुनाव आयोग के आदेश के बाद देश में राष्ट्रीय पार्टी की संख्या अब 6 हो गई है. AAP, बहुजन समाज पार्टी (BSP), भारतीय जनता पार्टी (BJP), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP).
किसी भी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय पार्टी बनने पर कई फायदे होते हैं. पहला फायदा तो उसका स्टेटस बदलने का ही है. फिर राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल होने के बाद उस दल को एक रिजर्व्ड चुनाव चिह्न मिल जाता है. निर्वाचन आयोग से ऐसे राजनीतिक दलों को कुछ विशेष अधिकार और सुविधाएं मिल जाते हैं. जैसे, निर्वाचन सूची मुफ्त प्राप्त करने की सुविधा मिल जाती है. चुनाव के कुछ समय पहले इन दलों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर टेलीविजन और रेडियो प्रसारण के लिए समय दिए जाने की अनुमति भी मिलती है. इसका फायदा वे अपनी बात को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में कर सकते हैं.
कई दलों से क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा छिनाचुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) से क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा छीना गया है. TMC को पहली बार सितंबर 2016 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था. लेकिन अब ये दर्जा छिनने के बाद अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में उसने क्षेत्रीय दल का स्टेटस भी खो दिया है. टीएमसी त्रिपुरा में क्षेत्रीय पार्टी के तौर पर बनी रहेगी.
इसके अलावा आंध्र प्रदेश में केसीआर की भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने भी क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा खो दिया है. वहीं मणिपुर में पीडीए, पुडुचेरी में पीएमके, पश्चिम बंगाल में आरएसपी और मिजोरम में एमपीसी अब क्षेत्रीय पार्टी के तौर पर नहीं मानी जाएगी.
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