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सर्जरी से बलात्कार के आरोप तक : कौन हैं शिवपाल सिंह यादव के नए साथी मोहम्मद अय्यूब

पीस पार्टी शिवपाल सिंह यादव के साथ है, जिनकी गठबंधन करने की मांग को लगभग हरेक बड़ी पार्टी ठुकरा चुकी है.

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19 मार्च 2019 (अपडेटेड: 19 मार्च 2019, 10:17 AM IST)
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यूपी में पार्टियों के बीच जोड़-तोड़ का खेल चल रहा है. ऐसे में पुराने साथी भी साथ छोड़ जाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए. ऐसा ही कुछ हुआ है समाजवादी पार्टी के साथ.
पार्टी के साथ गठबंधन में मौजूद पीस पार्टी ने अब शिवपाल सिंह यादव का हाथ थाम लिया है. शिवपाल की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी और पीस पार्टी का गठबंधन एक हद तक मुस्लिम वोटों पर असर डालेगा.
इसके पहले पीस पार्टी ने 2018 के एक लोकसभा उपचुनाव में सपा, बसपा और निषाद पार्टी के साथ गठबंधन किया था. 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान डॉ. अय्यूब की पीस पार्टी ने निषाद पार्टी और अपना दल (कृष्णा गुट) के साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन तब भी वे जीत का कोई आंकड़ा नहीं खड़ा कर सके थे.
लेकिन पीस पार्टी ने 2018 के गोरखपुर और फूलपुर के लोकसभा उपचुनावों के दौरान सपा को पूरी तरह से सहयोग दिया था. गोरखपुर से शुरू करें, तो गोरखनाथ मंदिर से जुड़े मुस्लिमबहुल इलाकों में पीस पार्टी ने गठबंधन के प्रत्याशी प्रवीण निषाद के समर्थन में प्रचार किया था, जिसका परिणाम एक भारी जीत के रूप में सामने आया था.
Peace Party with SP in 2018 (Photo - Facebook of Peace Party)

इसी समय फूलपुर में बाहुबली अतीक अहमद भी स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे थे. लग रहा था कि मुस्लिम वोटों के बंटवारे का फायदा, फिर से, भाजपा को मिलेगा. लेकिन यहीं पर सपा और पीस पार्टी के संगठित कैम्पेन ने मुस्लिम वोटों को एक हद तक एक किया. इस वजह से सपा ने फूलपुर लोकसभा पर भी अपनी जीत दर्ज की.
अब पीस पार्टी शिवपाल सिंह यादव के साथ है, जिनकी गठबंधन करने की मांग को लगभग हरेक बड़ी पार्टी ठुकरा चुकी है. ऐसे में भले ही शिवपाल कुछ बड़ा काम न कर सकें, लेकिन कई सीटों पर मुस्लिम वोटों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं.
इस खबर के लिखे जाने के वक्त पीस पार्टी की वेबसाइट बंद थी. पार्टी का वेब स्पेस खरीदने के लिए उपलब्ध था.

पीस पार्टी का वेबपेज

पीस पार्टी के संस्थापक मोहम्मद अय्यूब मूलतः गोरखपुर से ताल्लुक रखते हैं. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से सर्जरी की पढ़ाई पूरी करने की और डॉक्टरी का पेशा शुरू किया. खुद का अस्पताल खोला और पैसे कमाए. लेकिन कुछ ही सालों में मोहम्मद अय्यूब का झुकाव पिछड़ों की राजनीति की ओर होने लगा.
बहुत दिनों तक पिछड़ों के बीच अपनी पैठ बनाने के बाद पीस पार्टी को कामयाबी का स्वाद 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चखने को मिला. इस चुनाव में पीस पार्टी ने तीन विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की. इसमें कांठ विधानसभा से अनीसुर्रहमान, डुमरियागंज से कमाल यूसुफ मालिक और खलीलाबाद से खुद मोहम्मद अय्यूब विधायक चुने गए.
साल 2017, जब प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो रहे थे तभी मोहम्मद अय्यूब पर बलात्कार का आरोप लगा था. मोहम्मद अय्यूब पर आरोप यह थे कि उन्होंने एक लड़की का कई दिनों तक यौन शोषण किया और उसे ऐसी दवाओं का इंजेक्शन लगाया, जिनके रिएक्शन से पीड़िता की मौत हो गयी. डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में ज़िक्र किया कि पीड़िता की मौत किडनी और लीवर फेल होने की वजह से हुई. यह मामला तब प्रकाश में आया, जब हालत बिगड़ने पर पीड़िता को इलाज के लिए अय्यूब के विधानसभा क्षेत्र खलीलाबाद से लखनऊ लाया गया.
महागठबंधन से अलग होने के पहले पीस पार्टी के प्रमुख मोहम्मद अय्यूब ने कहा कि वे जमात-ए-उलेमा हिंद के महागठबंधन और कांग्रेस की ओर झुकाव को सही नहीं मानते हैं, इसलिए उन्होंने महागठबंधन से समर्थन वापिस लेने के बारे में सोचा है. हालांकि कहा यह जा रहा है कि पीस पार्टी ने अलग होने का फैसला इस वजह से लिया क्योंकि उन्हें महागठबंधन ने लोकसभा चुनाव के लिए टिकट देने से इनकार कर दिया. यही वाकया उनके साथ कांग्रेस ने दुहराया, जिसके चलते हारकर उन्हें शिवपाल का हाथ थामना पड़ा.


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