ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को नुकसान नहीं, रिपोर्ट लीक हुई तो अपनी ही इंटेलिजेंस को कोसने लगे ट्रंप
US Defence Intelligence Agency की रिपोर्ट में गया है कि जैसे-जैसे और अधिक खुफिया जानकारी उपलब्ध होगी, इसमें बदलाव हो सकता है. लेकिन शुरुआती निष्कर्ष को देखें तो ये President Donald Trump के बार-बार किए जा रहे दावों से काफी अलग है.

ईरान की तीन परमाणु फैसिलिटीज़ (US Attacks Iran Nuclear Sites पर अमेरिकी सैन्य हमलों ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम के मुख्य हिस्सों को नष्ट नहीं किया. हां, इतना जरूर है कि इस हमले ने ईरान के प्रोग्राम को केवल कुछ महीनों पीछे धकेला है. ये कहना है अमेरिका के एक खुफिया आकलन का. इस आकलन के अनुसार, इस अटैक की जानकारी रखने वाले सात लोगों का येे कहना है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा किए जा रहे दावे सही नहीं हैं.
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक इस आकलन को पहले रिपोर्ट नहीं किया गया था. इसे डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA), पेंटागन की खुफिया शाखा द्वारा तैयार किया गया है. CNN के सूत्रों में से एक ने कहा कि यह आकलन ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद अमेरिकन सेंट्रल कमांड द्वारा किए गए नुकसान के अनुमान (Battle Damage Assessment) पर आधारित है.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि जैसे-जैसे और अधिक खुफिया जानकारी उपलब्ध होगी, इसमें बदलाव हो सकता है. लेकिन शुरुआती निष्कर्ष को देखें तो ये राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बार-बार किए जा रहे दावों से काफी अलग है जिसमें वो बार-बार कह रहे हैं कि हमलों ने ईरान की परमाणु संवर्धन फैसिलिटीज़ को ‘पूरी तरह से नष्ट’ कर दिया है. सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस पीट हेगसेथ ने भी 22 जून को कहा कि ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं ‘नष्ट' हो गई हैं.
आकलन की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने कहा कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को भी नष्ट नहीं किया गया है. एक दूसरे सोर्स ने कहा कि खुफिया जानकारी के अनुसार संवर्धित यूरेनियम को अमेरिकी हमलों से पहले ही साइट्स से हटा दिया गया था. इस व्यक्ति ने CNN से कहा,
दूसरी तरफ वाइट हाउस ने ये तो स्वीकार किया है कि DIA की ओर से कोई आकलन हुआ है. लेकिन वह इससे असहमत हैं. वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने CNN को बताया
अमेरिकी सेना ने कहा है कि ऑपरेशन योजना के अनुसार चला और यह जबरदस्त सफलता थी. वहीं प्रेसिडेंट ट्रंप ने भी ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर CNN की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है. उन्होंने लिखा
ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को कितना नुकसान हुआ है, ये आने वाले समय में साफ हो जाएगा. लेकिन इतना तय है कि अमेरिकन इंटेलिजेंस की रिपोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को टेंशन में डाल दिया है. मिडिल-ईस्ट को देखें तो फिलहाल ईरान और इजरायल के बीच सीजफायर लागू है. दोनों देश 12 दिनों तक चले इस संघर्ष में नुकसान की भरपाई में लगे हैं.
वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: इज़रायल और ईरान के बीच सीजफायर कितने दिन तक टिक पाएगा?

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