स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के इलाज के संबंध में नई गाइडलाइंस जारी की हैं.सोमवर 17 जनवरी को जारी इन गाइडलाइंस में कोरोना के इलाज में स्टेरॉयड का कमइस्तेमाल करने की बात कही गई है. दरअसल वयस्क कोरोना मरीजों के इलाज के दौरानडॉक्टर उन्हें काफी मात्रा में स्टेरॉयड (Steroids) देते हैं. इससे ब्लैक फंगस(Black Fungus) और दूसरे तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स का खतरा बढ़ जाता है. इसीलिए अबसरकार ने गाइडलाइन जारी कर कहा है कि कोविड इन्फेक्शन के सामान्य मरीजों केट्रीटमेंट में स्टेरॉयड का इस्तेमाल कम करना होगा. स्टेरॉयड का ज्यादा इस्तेमालमतलब खतरा गाइडलाइन के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को बहुत ज्यादा खांसी आ रही है, तोस्टेरॉयड लेने के बजाय उसे टीबी का टेस्ट कराने को कहा जाना चाहिए. स्वास्थ्यमंत्रालय का कहना है कि ऐसी कंडीशन में स्टेरॉयड के ज्यादा उपयोग से बचना चाहिए.उसका कहना है कि अगर किसी को दो से तीन हफ्तों से ज्यादा समय तक खांसी रहती है, तोये टीबी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में स्टेरॉयड से खांसी ठीक करने के बजाएएक बार TB की जांच जरूर करा लें.स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी नई गाइडलाइननई गाइडलाइन में मंत्रालय ने इलाज की शुरुआत में ही स्टेरॉयड दवाओं के ज्यादाइस्तेमाल से होने वाले खतरे के बारे में बताते हुए कहा है, "अगर एंटी-इंफ्लेमेटरीया इम्यूनोमॉड्यूलेटरी थेरेपी (जैसे स्टेरॉयड) का इस्तेमाल ज्यादा लंबे समय तक कियाजाए या इसकी खुराक बढ़ा दी जाए तो इससे इनवेसिव म्यूकोर्मिकोसिस (InvasiveMucormycosis) जैसे सेकेंडरी इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है." इसके साथ ही मंत्रालयकी कोविड टास्क फोर्स के मुताबिक ऐसे कोरोना मरीज जिन्हें ऑक्सीजन सप्लीमेंट कीजरूरत नहीं है, उनको स्टेरॉयड के इन्जेक्शन की जरूरत नहीं है. मंत्रालय ने बतायाकि, कोविड-19 से संक्रमित मरीजों में अगर लक्षण हल्के हैं तो उनको घर पर हीआइसोलेशन में रखा जाए,जिन मरीजों में मध्यम स्तर के लक्षण हैं उनको कोविड केयर वार्ड में भर्ती किया जाए,और गंभीर लक्षण वाले मरीजों को आईसीयू में रखा जाए. गाइडलाइंस के मुताबिक मरीज केलक्षण हल्के हैं, मध्यम हैं या गंभीर, ये तय करने के लिए उसके ऑक्सीजन के स्तर औरसांस लेने की दर को ध्यान में रखा जाए.इससे पहले नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने स्टेरॉयड सहित कोविड दवाओं के ज्यादाइस्तेमाल और दुरुपयोग को लेकर चेतावनी भी दी थी. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट केमुताबिक डॉ. पॉल ने कहा था, “इस बात की चिंता है कि हम जो भी दवाएं देते हैं, उनकातर्कसंगत इस्तेमाल किया जाना चाहिए. हद से ज्यादा इस्तेमाल ठीक नहीं. पिछली बारहमने देखा था कि दवाइयों के ओवर यूज से म्यूकोर्मिकोसिस का खतरा बढ़ गया था. ये बेहदडरावनी स्थिति थी."