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एलन मस्क पर नाजी सैल्यूट करने के आरोप लग रहे हैं, जान लीजिए ये होता क्या है?

Donald Trump के शपथग्रहण समारोह के दौरान अमेरिकी कारोबारी Elon Musk एक विवादों में घिर गए हैं. इस इवेंट को संबोधित करने के दौरान उन पर Nazi Salute करने के आरोप लग रहे हैं.

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एलन मस्क पर नाजी सलामी करने के आरोप लग रहे हैं. (एक्स)
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आनंद कुमार
22 जनवरी 2025 (पब्लिश्ड: 10:25 AM IST)
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अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) के शपथ ग्रहण के दौरान अरबपति कारोबारी एलन मस्क (Elon Musk) के एक जेस्चर ने विवाद खड़ा कर दिया. दरअसल मस्क ने अपने संबोधन के दौरान दाहिने हाथ को छाती पर लगाया. और फिर उससे लोगों का अभिवादन किया. सोशल मीडिया पर मस्क के इस जेस्चर को 'नाजी सैल्यूट' से कंपेयर किया जा रहा है. लोगों ने उन पर नाजी सैल्यूट की नकल करने का आरोप लगाया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना वाशिंगटन डीसी के कैपिटल वन एरिना में डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हुई. मस्क ने इस जेस्चर पर हो रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए एक्स पर लिखा, 

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नाजी सलामी क्या है?

नाजी सलामी को 'हिटलर सलामी' के रूप में भी जाना जाता है. यह 1930 के दशक में जर्मनी में नाजी विचारधारा के सबसे शक्तिशाली प्रतीकों में से एक थी. इसमें दाहिने हाथ को कंधे से हवा में उठाकर सलामी दी जाती है. जिसमें हथेली नीचे की ओर होती है. आमतौर पर 45 डिग्री के कोण पर. 
यह सलामी हिटलर और नाजी उद्देश्य के प्रति एकता और समर्पण की भावना पैदा करने के लिए किया जाता था. इसका इस्तेमाल रैलियों, पब्लिक इवेंट्स और सैन्य समाराहों में किया जाता था. इसमें सलामी देने वाला व्यक्ति ‘हेल हिटलर’ (जय हो मेरे नेता) या फिर ‘सीग हील’ (जय हो) शब्द का उच्चारण करता था. जिसका अर्थ होता था शासन के प्रति समर्पण और समर्थन का प्रदर्शन करना.

रोमन सलामी

नाजी सलामी दरअसल रोमन सलामी का सबसे प्रसिद्ध रूप है. हालांकि दोनों के बीच का अंतर जानना महत्वपूर्ण है. रोमन सलामी मूल रूप से प्राचीन रोम में सम्मान और वफादारी का प्रतीक था. जिसका नाजी संस्करण के दमनकारी अर्थों से कोई लेना-देना नहीं था. लेकिन रोमन सलामी के फासीवादी उपयोग ने इसके अर्थ को बदल दिया. खासकर इटली में मुसोलिनी के फासीवादी शासन और हिटलर के नाजी जर्मनी ने.

टोरबजर्न लुंडमार्क की किताब ‘टेल्स ऑफ हाय एंड बाय’ के मुताबिक, नाजी सलामी का आविष्कार हिटलर या मुसोलिनी ने नहीं किया था. और ना ही ये सेकेंड वर्ल्ड वार या यूरोप तक सीमित है. यह सलामी रोमन साम्राज्य के समय से चली आ रही है. और इसे रोमन सलामी (सैलूटो रोमानो) के नाम से जाना जाता है.

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इस इशारे से जुड़े हिस्टोरिकल बैगेज के देखते हुए मस्क के इस कदम ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. पहले भी मस्क का रुझान घोर दक्षिणपंथी राजनीति की ओर रहा है. जिसमें अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AFD) के लिए उनका सार्वजनिक समर्थन भी शामिल है.

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