'MBBS छोड़ो, डिप्लोमा से 3 साल में डॉक्टर बनाओ', ममता क्या प्लान लाईं जो बंगाल में बवाल मचा?
डॉक्टर्स की कमी से जूझ रहे बंगाल के लिए ममता बनर्जी नया प्लान लाई हैं

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मेडिकल में डिप्लोमा कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव दिया है (Mamata Banerjee Proposes Medical Diploma Course). इस प्रस्ताव का मकसद राज्य के अस्पतालों में डॉक्टर्स की कमी को पूरा करना है. ममता बनर्जी ने गुरुवार, 11 मई को अधिकारियों के सामने इस मेडिकल डिप्लोमा कोर्स का प्रस्ताव रखा.
इंडिया टुडे से जुड़े ऋत्विक मंडल की एक रिपोर्ट के मुताबिक ममता बनर्जी ने गुरूवार को सचिवों और राज्य के उद्योगपतियों के साथ एक मीटिंग की. इस दौरान बनर्जी ने कहा कि MBBS कोर्स में कम से कम पांच साल लगते हैं. वो कोर्स जारी रहना चाहिए. लेकिन, आबादी बढ़ रही है, अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ रही है और डॉक्टर्स कम हैं. इसलिए एक ऐसा कोर्स भी शुरू करना चाहिए, जिससे जल्द डॉक्टर्स मिल सकें.
सीएम बनर्जी के मुताबिक अगर डिप्लोमा कोर्स शुरू होगा तो इससे राज्य को पांच साल के बजाय तीन साल में ही डॉक्टर मिल सकते हैं. और इन लोगों को कम से कम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात किया जा सकता है.
बंगाल सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय का काम भी संभाल रहीं मुख्यमंत्री ने इसके बाद राज्य के स्वास्थ्य सचिव एनएस निगम से कहा,
ममता बनर्जी ने स्वास्थ्य सचिव को इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए चार सदस्यीय एक कमेटी बनाने आदेश दिया.
मेडिकल इंस्टीट्यूट का उद्योगपति कनेक्शनसचिवों के साथ मीटिंग के दौरान सीएम ममता बनर्जी ने ये भी कहा कि बंगाल में और ज्यादा मेडिकल इंस्टीट्यूट बनाने की जरूरत है.
उन्होंने कहा,
मीटिंग में ममता बनर्जी ने उद्योगपतियों से नए नर्सिंग संस्थान बनाने में मदद करने की भी अपील की. मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर सरकार की तरफ उन्हें हर तरह की जरूरी मदद दी जाएगी.
प्रस्ताव का विरोध शुरूमुख्यमंत्री के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इन प्रस्तावों का विरोध शुरू हो गया है. इस मामले पर पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम के सचिव डॉ कौशिक सरकार का बयान आया है. उन्होंने कहा है कि अगर बंगाल सरकार इस तरह का निर्णय लेती है तो इससे पूरी दुनिया में अपनाई गई व्यवस्था बिगड़ जाएगी. कौशिक के मुताबिक तीन साल के डिप्लोमा कोर्स का प्रस्ताव पूरी तरह से वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला नहीं है. राज्य सरकार को इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना चाहिए.
उन्होंने आगे कहा कि कई डॉक्टर हर साल पश्चिम बंगाल में सरकारी और निजी कॉलेजों से ग्रेजुएट होते हैं. अगर सरकार बेहतर रिक्रूटमेंट प्रोसेस अपनाए तो डॉक्टर्स की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी.
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