धार भोजशाला की ASI सर्वे रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश, हिंदू पक्ष का दावा- 'मूर्तियां मिलीं...'
मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला की 2000 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट ASI ने हाई कोर्ट में पेश कर दी है. हिंदू पक्ष का दावा है कि सर्वे में मूर्तियां मिली हैं, वहीं मुस्लिम पक्ष की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर लगी हैं.

धार भोजशाला की सर्वे रिपोर्ट आ गई है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने इसे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में पेश कर दिया है. यह रिपोर्ट करीब 2000 पन्नों की है. जिसमें कई अहम खुलासे हुए हैं. लगातार 98 दिन तक चले इस सर्वे में टीम को कई अवशेष मिले हैं. जिन्हें रिपोर्ट में शामिल कर कोर्ट में पेश किया गया है.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वकील हिमांशु जोशी ने सोमवार, 15 जुलाई को सर्वे रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश की. ये रिपोर्ट मीडिया से शेयर नहीं करने के निर्देश सभी पक्षों को दिए गए हैं. इसलिए वकील हिमांशु जोशी ने केवल इतना कहा कि रिपोर्ट 2 हजार पेज की है और इससे ज्यादा वो कुछ नहीं बता सकते. बताया जा रहा है कि सर्वे और खुदाई के दौरान मिले 1700 से ज्यादा प्रमाण (अवशेष) इस रिपोर्ट में शामिल किए गए हैं.
हिंदू-मुस्लिम पक्ष क्या बोले?दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पहुंचने के साथ ही हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने दावा किया कि जो सर्वे हमारे सामने हुआ था, उस आधार पर हम कह रहे हैं कि भोजशाला की इमारत, राजा भोज के काल की ही साबित होगी, जिसे साल 1034 में बनाया गया था. उन्होंने दावा किया कि ASI को इस सर्वे में कई प्राचीन मूर्तियां मिली हैं.
वहीं, धार शहर के काजी वकार सादिक ने कहा कि हाई कोर्ट में रिपोर्ट पेश होने की जानकारी मिली है. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि ASI की रिपोर्ट पर हाई कोर्ट स्तर से कोई एक्शन नहीं लिया जा सकता है. सादिक के मुताबिक हाई कोर्ट में भले ही 22 जुलाई को सुनवाई है, लेकिन फैसला सुप्रीम कोर्ट ही करेगा.
बता दें कि 1 अप्रैल, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि भोजशाला के ASI सर्वेक्षण का जो भी नतीजा निकले, लेकिन उसकी अनुमति के बिना कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए.
धार स्थित भोजशाला मंदिर है या मस्जिद?भोजशाला, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित 11वीं सदी का स्मारक है. इसे लेकर हिंदुओं और मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं. हिंदू इसे वाग्देवी (देवी सरस्वती) को समर्पित मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम इसे कमल मौला मस्जिद मानते हैं.
धार जिले की वेबसाइट के अनुसार, परमार वंश के राजा भोजदेव ने धार में संस्कृत के अध्ययन के लिए एक विश्वविद्यालय की स्थापना की थी. इसे भोजशाला कहा जाता है, जहां हिंदुओं की देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित थी.
इस परिसर की संरचनाएं इतिहास के अलग-अलग काल की हैं. मुख्य रूप से 12वीं शताब्दी की संरचानओं के अलावा परिसर में इस्लामी कब्रें हैं, जो 14वीं और 15वीं शताब्दी के बीच बनी बताई जाती हैं. इस परिसर में चिश्ती सूफी संत कमाल-अल-दीन की कब्र है. इस वजह से परिसर को कमल मौला मस्जिद भी कहा जाता है.
मौजूदा दौर में भोजशाला या कमल मौला मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का एक स्मारक है. एक समझौते के तहत यहां मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दी गई है. वहीं मुस्लिमों को शुक्रवार के दिन नमाज अदा करने की मंजूरी है. बाकी दिनों में ये परिसर विजिटर्स के लिए खुलता है.
कोर्ट ने ASI को सर्वे का आदेश दिया थाहिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने इस मंदिर-मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वे के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. मांग की गई थी कि भोजशाला परिसर हिंदुओं को वापस सौंपा जाए, यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज अदा करने से रोका जाए.
इस पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने ASI को वैज्ञानिक सर्वे करने का आदेश दिया. बेंच ने आदेश में कहा था कि परिसर में कार्बन डेटिंग मेथड से एक विस्तृत वैज्ञानिक जांच की जानी चाहिए, जिससे जमीन के ऊपर और नीचे स्थित संरचनाएं कितनी पुरानी है, इसका पता लगाया जा सके. कोर्ट ने ये भी कहा था कि सर्वे की कार्यवाही दोनों पक्षों के दो प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कराई जाए. सर्वे की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराए जाने का भी निर्देश दिया गया था.
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ASI ने 22 मार्च से धार के मंदिर-मस्जिद परिसर का सर्वे शुरू किया था. ASI को 2 जुलाई को हाई कोर्ट में सर्वे रिपोर्ट पेश करनी थी. लेकिन, सर्वे रिपोर्ट पूरी नहीं होने के कारण ASI की टीम ने दो सप्ताह का और समय हाई कोर्ट से मांगा था. जो कोर्ट ने दे दिया था. सोमवार, 15 जुलाई को ये समय खत्म हो गया और इसी के साथ ASI ने सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी. अब इस रिपोर्ट पर हाई कोर्ट 22 जुलाई को सुनवाई करेगा.
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