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दिल्ली: गरीबों की मजबूरी को भुनाकर चला रहे थे बड़ा किडनी रैकेट, 3 लाख में खरीदते, 30 लाख में बेचते!

इस काले कारोबार को अंजाम देने वाले आरोपी हरियाणा के गोहाना में किडनी ट्रांसप्लांट करते थे. इनमें दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर और टेक्नीशियन भी शामिल हैं.

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2 जून 2022 (अपडेटेड: 2 जून 2022, 08:22 PM IST)
Delhi Police की गिरफ्त में Illegal Kidney Transplant Racket के आरोपी. (फोटो: इंडिया टुडे)
Delhi Police की गिरफ्त में Illegal Kidney Transplant Racket के आरोपी. (फोटो: इंडिया टुडे)
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दिल्ली का पॉश इलाका हौज खास. यहां की पुलिस ने अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले एक रैकेट का खुलासा किया है. इस काले कारोबार को अंजाम देने वाले आरोपी हरियाणा के गोहाना में किडनी ट्रांसप्लांट करते थे. ये आरोपी तीन लाख में किडनी खरीदकर 30 लाख में बेचते थे. पुलिस ने रैकेट के 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों में दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर और टेक्नीशियन भी शामिल हैं.

पुलिस को मिली सीक्रेट इनफॉरमेशन

इंडिया टुडे से जुड़े तनसीम हैदर की रिपोर्ट के मुताबिक, हौज खास पुलिस स्टेशन में तैनात अधिकारियों को 26 मई को गोपनीय जानकारी के जरिये इस रैकेट का पता चला. मालूम हुआ कि एक गैंग गरीब और जरूरतमंदो को टारगेट कर रहा है. ये लोग पैसों का लालच देकर गरीबों की किडनी निकाल लेता है. फिर उन्हें ऊंचे दामों पर दूसरों की बॉडी में ट्रांसप्लांट करता है. पुलिस को पता चला कि किडनी निकालने के लिए गैंग 20 से 30 साल के गरीब युवाओं को निशाने पर लेता है. इन युवाओं की बकायदा काउंसलिंग की जाती है और किडनी निकालने से पहले उनके मेडिकल टेस्ट कराए जाते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, इस जानकारी के मिलते ही हौज खास पुलिस ने एक टीम बनाई. आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया. पुलिस ने पिंटू यादव नाम के शख्स को लोकेट किया. पता चला कि पिंटू यादव को सरवजीत और विपिन नाम के शख्स हौज खास की एक लैब में ले जा रहे हैं. वहां उसका प्री एनेस्थीसिया टेस्ट किया जाना था. पुलिस को ये भी पता चला कि सरवजीत और विपिन, पिंटू यादव को पेट का दर्द ठीक कराने के बहाने लाए थे. लेकिन जैसे ही पिंटू को पता चला कि ये टेस्ट उसकी किडनी निकालने के लिए किए जा रहे हैं, वो उन दोनों से झगड़कर वहां से चला गया.

पुलिस ने पिंटू यादव से संपर्क किया. उसके जरिए टीम सरवजीत और रघु शर्मा तक पहुंची. पता चला कि रघु शर्मा की किडनी पहले ही निकाली जा चुकी है और ये काम कथित तौर पर सरवजीत और उसके सहयोगियों ने किया है. रघु शर्मा से बातचीत के बाद पुलिस टीम ने पश्चिम विहार स्थित डीडीए फ्लैट्स के ए ब्लॉक में रेड मारी. वहां टीम को चार लोग मिले. शैलेश पटेल, दिवाकर सरकार, अश्विनी पांडेय और रिजवान. पता चला कि शैलेश को छोड़कर बाकी तीनों को वहां किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लाया गया था. उनके मेडिकल चेकअप हो चुके थे. उन्हें ट्रांसप्लांट के लिए भेजा ही जाने वाला था, लेकिन पुलिस के समय से पहुंचने पर उनकी जान बच गई.

जरूरतमंद युवाओं पर निशाना

आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि शैलेश पटेल ऐसे जरूरतमंद युवाओं को टारगेट करता था, जो पैसों के लिए किडनी बेचने के लिए तैयार हो जाते थे. इन तीनों को वहां बिकास और विपिन लेकर आए थे. पूछताछ के बाद पुलिस ने सरवजीत और शैलेश को गिरफ्तार कर लिया. पता चला कि 'टारगेट्स' को लाने के लिए सरवजीत और शैलेश को 30 से 40 हजार रुपये मिलते थे.

छानबीन के दौरान पुलिस को एक और आरोपी मोहम्मद लतीफ के बारे में पता चला. वो लैब में फील्ड बॉय के तौर पर काम करता था और किडनी निकालने से पहले जरूरतमंदों के टेस्ट कराता था. इन टेस्ट में DTPA टेस्ट भी शामिल है, जिससे पता चलता है कि किडनी काम कर रही है या नहीं.

पुलिस ने और तफ्तीश की तो आरोपी बिकास और रंजीत गुप्ता को गिरफ्तार किया गया. पता चला कि बिकास कथित तौर पर किडनी देने वालों का पश्चिम विहार में रहने का इंतजाम करता था. वहां से रंजीत गुप्ता के जरिये उन्हें सोनीपत के गोहाना में भेजता था. पुलिस ने गोहाना स्थित एक ऑपरेशन थियेटर में रेड मारी. वहां एक झोलाझाप डॉक्टर सोनू रोहिल्ला कथित तौर पर बड़े अस्पतालों के डॉक्टर और टेक्नीशियन के साथ अवैध किडनी ट्रांसप्लांट को अंजाम देता था. पुलिस ने पहले सोनू रोहिल्ला को गिरफ्तार किया. फिर दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर सौरभ मित्तल को जो एक एनेस्थीसियोलॉजिस्ट हैं. आरोप हैं कि वो अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के इस रैकेट में शामिल हैं.

टेक्नीशियन करता था Kidney Transplant

इतनी गिरफ्तारियों के बाद पुलिस ने इस मामले में तीन और आरोपियों की धरपकड़ की. इनके नाम कुलदीप रे विश्वकर्मा, ओम प्रकाश शर्मा और मनोज तिवारी हैं. ये तीनों डॉक्टर सौरभ मित्तल के साथ एक ही अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस की पूछताछ में पता चला कि कुलदीप रे विश्वकर्मा इस रैकेट का कथित मास्टरमाइंड है. उसी ने सोनू रोहिल्ला के क्लीनिक को कथित तौर पर ऑपरेशन के लिए सेलेक्ट किया था और बाकी के आरोपियों को उनके टास्क दिए थे. वही सबको पैसे देता था.

पुलिस ने बताया कि कुलदीप रे विश्वकर्मा पिछले 6-7 महीनों में अवैध रूप से 12 से 14 किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है. जबकि वो सिर्फ एक टेक्नीशियन है. पुलिस ने ये भी बताया कि आरोपी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फेक ग्रुप्स के जरिये किडनी देने वालों और लेने वालों से संपर्क करते थे. ये आरोपी अभी तक 20 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कर चुके हैं.

पुलिस ने रैकेट के काम करने का तरीका भी बताया. रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी सरवजीत जैलवाल किडनी देने वाले को शैलेश पटेल के पास ले जाता था. शैलेश पटेल उसे मोहम्मद लतीफ तक ले जाता था. मोहम्मद लतीफ किडनी देने वाले के मेडिकल टेस्ट कराता था. फिर बिकास उसके रहने का इंतजाम पश्चिम विहार में करता था. बिकास ही विक्टिम को सोनू रोहिल्ला के पास गोहाना ले जाता था. वहां एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ मित्तल अपनी भूमिका अदा करता था. उसके बाद ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन कुलदीप रे विश्वकर्मा ऑपरेशन करता था. उसके दूसरे टेक्नीशियन साथी ओम प्रकाश शर्मा और मनोज तिवारी अपना पार्ट निभाते थे.

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