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50 ओवर में 500 रन सचिन को क्रिकेट के लिए खतरनाक क्यूं लग रहे हैं?

बहुत से क्रिकेटर्स सचिन के साथ खड़े दिख रहे हैं.

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22 जून 2018 (अपडेटेड: 22 जून 2018, 11:09 AM IST)
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सचिन तेंडुलकर पहले भी क्रिकेट में कई बदलावों की वकालत कर चुके हैं.
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इंग्लैंड की टीम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जब से 481 रन बनाए हैं, एक बहस इस बात पर शुरू हो गई है कि क्या इतने बड़े-बड़े स्कोर क्रिकेट की सेहत के लिए सही हैं? या ये क्रिकेट के किसी मर्ज की निशानी है? 

50 ओवरों में 500 के करीब रन बनते देख सचिन तेंडुलकर भी चौंक गए हैं. सचिन ने कहा है कि वनडे क्रिकेट में दोनों छोर पर नई गेंद के इस्तेमाल से हम क्रिकेट को नुकसान की तरफ ले जा रहे हैं. तेंडुलकर ने कहा है," दो नई गेंदों के इस्तेमाल से हो ये रहा है कि गेंद पुरानी ही नहीं हो पाती है. हमने कब से डेथ ओवरों में रिवर्स स्विंग होते नहीं देखी है. वो रिवर्स स्विंग जो आखिरी ओवरों में गेम का अहम हिस्सा होती थी." Sachin Tweet इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में 481 रन मारकर अपने ही पुराने 444 रनों के रिकॉर्ड को बेहतर कर लिया. पहले ये रिकॉर्ड पाकिस्तान के खिलाफ बना था. हैरानी की बात ये कि 50 ओवरों में 481 बनाने के दौरान इंग्लैंड की पारी में 107 गेंद डॉट बॉल थीं. मतलब इतनी गेंदों पर कोई रन नहीं पड़ा था. जिस दिन ये रिकॉर्ड इंग्लैंड ने बनाया, उसी दिन सौरव गांगुली ने भी एक ट्वीट किया था जिसमें लिखा था, "इतने रन देखकर मुझे क्रिकेट की सेहत के बारे में डर लगने लगा है." वहीं तेंडुलकर की ट्वीट के बाद पाकिस्तान के व़कार युनुस ने कहा कि यही कारण है कि मैंने फास्ट बॉलर तैयार करने बंद कर दिए हैं. बॉलरों ने डिफेंसिव होना शुरू कर दिया है. सचिन से सहमत हूं कि रिवर्स स्विंग लगभग खत्म हो गई है." वहीं जब 22 जून की दोपहर को विराट कोहली इंग्लैंड दौरे पर जाने से पहले मीडिया से मुखातिब हुए तो उन्होंने भी कहा," मुझे लगता है कि बॉलरों के लिए चीजें मुश्किल हो रही हैं. जब मैंने वनडे क्रिकेट करियर शुरू किया था तो दोनों छोर पर एक ही गेंद यूज की जाती थी और पारी के आखिर में रिवर्स स्विंग मिलती थी जो बल्लेबाजों के लिए एक चुनौती होती थी." Waqar दो गेंदों का ये रूल सात साल पुराना है. अक्टूबर 2011 से दोनों छोर से नई बॉल इस्तेमाल की जाने लगी. साथ ही एक गेंद को सिर्फ 25 ओवरों तक यूज करने का रूल बना. अब इससे हुआ ये कि गेंद पुरानी ही नहीं होती है और फिर पुरानी गेंद से मिलने वाले रिवर्स स्विंग का फायदा भी बॉलरों को मिलना बंद हो गया. इसी तरह जब गेंद पुरानी नहीं पड़ेगी तो स्पिनरों को भी इसका फायदा ज्यादा नहीं मिलता है. गेंद जबतक सख्त रहेगी, उसपर रन बनाना उतना ही आसान होता है. इंडिया इस रूल के विरोध में कई साल से अपनी आवाज उठाता रही है. हर सीरीज में रन तेजी से स्कोर हो रहे हैं जो क्रिकेट के इस फॉरमेट और बॉलरों के लिए सही नहीं है.
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