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पूर्व कुश्ती कोच को मौत की सजा, अखाड़े में ही 4 साल के बच्चे सहित 6 लोगों को मार डाला था

Haryana के Rohtak जिले की अदालत ने ये फैसला सुनाया है. पुलिस के अनुसार बदला लेने के लिए पूर्व कोच ने 6 लोगों की हत्या कर दी थी, उस दिन क्या-क्या हुआ था, सब पता चला.

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Haryana police
पूर्व कोच को मौत की सजा सुनाई गई है. (सांकेतिक तस्वीर: इंडिया टुडे)
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24 फ़रवरी 2024 (Updated: 24 फ़रवरी 2024, 15:37 IST)
Updated: 24 फ़रवरी 2024 15:37 IST
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हरियाणा (Haryana) के रोहतक (Rohtak) की एक अदालत ने एक पूर्व कुश्ती कोच को मौत की सजा (death penalty to wrestling coach) सुनाई है. पूर्व कोच पर एक चार साल के बच्चे समेत छह लोगों की हत्या का आरोप था. कोर्ट ने इस मामले में उन्हें दोषी पाया है. 

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, कोर्ट ने सोनीपत जिले के बड़ौदा गांव के निवासी सुखविंदर सिंह को मौत की सजा सुनाई है. अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गगन गीत कौर ने सुखविंदर को आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 342 (गलत कारावास), 201 (साक्ष्यों को गायब करना) और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 1.26 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, 12 फरवरी 2021 को कुश्ती के मैदान में एक दंपति और उनके चार साल के एक बेटे समेत 6 लोगों की हत्या कर दी गई थी. मनोज मलिक, उनकी पत्नी साक्षी मलिक, उनके बेटे सरताज, कुश्ती कोच सतीश कुमार, प्रदीप मलिक और पहलवान पूजा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. घटना में एक अन्य व्यक्ति अमरजीत दलाल को भी गोली लगी थी. लेकिन उनकी जान बच गई थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुखविंदर सिंह ने हत्या की साजिश तब रची जब पीड़ितों में से एक पहलवान पूजा ने उसके खिलाफ शिकायत की थी. शिकायत के बाद अमरजीत दलाल ने सिंह को रोहतक के मेहर सिंह अखाड़े के कुश्ती कोच की नौकरी से निकाल दिया था. कोच मनोज मलिक ने 2021 में सिंह से कहा कि अब वो अखाड़ा आना छोड़ दें. 

इसके बाद सुखविंदर ने हत्या की योजना बनाई. अधिकारी ने बताया कि सिंह ने पहले कोच प्रदीप को मार डाला. उसके बाद उसने मनोज और सतीश को गोली मारी. फिर उसने साक्षी मलिक, पूजा और साक्षी के बेटे की भी हत्या कर दी. अधिकारी ने आगे कहा कि सिंह ने अखाड़े के एक कमरे में तीन कोचों की हत्या की. जबकि उसने दूसरे कमरे में दो महिलाओं समेत एक बच्चे की हत्या कर दी और फिर कमरे का दरवाजा बंद कर दिया.

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घटना के एक दिन बाद 13 फरवरी को सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया गया था.

कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायाधीश गगन गीत कौर ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ये मामला दुर्लभतम श्रेणी में आता है. ऐसे मामलों में अदालत के पास आजीवन कारावास के बजाय मौत की सजा के अलावा कोई विकल्प नहीं है. कोर्ट ने कहा कि इस सामूहिक हत्या से केवल छह पीड़ितों के परिवारों को ही नुकसान नहीं हुआ है. बल्कि हरियाणा राज्य की छवि भी खराब हुई है.

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