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'कबाड़ में पड़ी मिलीं स्कूली किताबें'- छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने लगाया घोटाले का आरोप

Congress के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर Chhattisgarh government पर कथित किताब घोटाले का आरोप लगाया है. उनका आरोप है कि सर्व शिक्षा अभियान और छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम की छापी हुई किताबों को कबाड़ी में बेचा जा रहा है.

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18 सितंबर 2024 (पब्लिश्ड: 01:04 PM IST)
Chhattisgarh government former Congress MLA Vikas Upadhyay
छत्तीसगढ़ सरकार ने कथित किताब घोटाले के जांच के आदेश दिए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर, आजतक)
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पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने 17 सितंबर को छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh government inquiry) पर कथित किताब घोटाले का आरोप लगाया था. उनका आरोप था कि इस वितीय वर्ष में सरकारी स्कूलों के लिए छपी किताबों के ढेर रायपुर के एक रीसाइक्लिंग सेंटर में पड़े हैं. विकास उपाध्याय के आरोपों के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं. 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह आरोप लगाया कि ये किताबें सर्व शिक्षा अभियान और छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने छापी थीं. और इन्हें क्लास 1 से 10 तक के सरकारी स्कूलों के छात्रों के बीच मुफ्त में बांटा जाना था.

विकास उपाध्याय ने इसे किताब घोटाला करार देते हुए बताया, 

ऐसे समय में जब छत्तीसगढ़ में बच्चे पढ़ाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनके लिए बनी स्कूली किताबें कबाड़ में औने-पौने दामों पर बेची जा रही हैं. सरकार ने जरूरत से ज्यादा किताबें निजी एजेंसियों के जरिए छपवाई हैं. जिन्होंने करोड़ों रुपये अपनी जेब में डाल लिए हैं. यह टैक्सपेयर्स के पैसे की लूट है.

छत्तीसगढ़ सरकार ने मामले की जांच के लिए छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के प्रबंध निदेशक और आईएएस अधिकारी राजेंद्र कटारा के नेतृत्व में एक समिति गठित की है. इसमें छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) डॉ योगेश शिवहरे, रायपुर शिक्षा संभाग के संभागीय संयुक्त संचालक राकेश पांडेय, छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के महाप्रबंधक प्रेम प्रकाश शर्मा और रायपुर कलेक्टर के नामित किए गए जिला प्रशासन अधिकारी शामिल हैं. इस समिति को जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है.

जांच समिति का नेतृत्व कर रहे राजेंद्र कटारा से सवाल किया गया कि ये किताबें  कब छपीं और किस कीमत पर कितनी किताबें कथित तौर पर कबाड़ में बेची गईं, जिस पर उन्होंने बताया ये सब जांच का हिस्सा हैं.

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विकास उपाध्याय ने इस जांच समिति पर भी सवाल उठाया है. उन्होंने बताया कि यह सही नहीं है. जांच के दायरे में आए विभाग को ही आरोपों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है. उन्होंने CBI या हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से इस मामले की जांच कराने की मांग की है.  

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