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MP के कॉलेजों में RSS नेताओं की किताबें पढ़ाई जाएंगी, लिस्ट देख लीजिए

Madhya Pradesh सरकार ने कॉलेजों को 88 किताबें खरीदने का निर्देश दिया है. इस लिस्ट में RSS के प्रमुख नेताओं की लिखी किताबें भी शामिल हैं. इसके लिए सभी कॉलेजों में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ' का गठन करना है.

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13 अगस्त 2024 (अपडेटेड: 14 अगस्त 2024, 11:45 AM IST)
Madhya Pradesh Colleges
कॉलेज में RSS नेताओं की लिखी किताबों को पढ़ाया जाएगा. (सांकेतिक तस्वीर: इंडिया टुडे)
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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उच्च शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी कॉलेजों के संचालकों को एक आदेश दिया है. कॉलेजों में RSS नेताओं की लिखी गई किताबों (RSS linked books) को अपने सिलेबस में शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है. कांग्रेस ने इस आदेश की आलोचना की है. और इसे ‘लोगों को बांटने वाली विचारधारा’ को बढ़ावा देने का प्रयास बताया है. 

उच्च शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में लिखा कि विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराना है. ऐसा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा. स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में इसे शामिल किया जाना है. इसके लिए सभी कॉलेजों में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ' का गठन करना है. इस आदेश को जारी किया है- उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ धीरेंद्र शुक्ला ने.

सभी संस्थानों को 88 पुस्तकों का सेट खरीदने का निर्दश दिया गया है. इस लिस्ट में सुरेश सोनी, दीनानाथ बत्रा, डी. अतुल कोठारी, देवेंद्र राव देशमुख और संदीप वासलेकर जैसे प्रमुख RSS नेताओं की रचनाएं शामिल हैं. NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी नेता RSS के एजुकेशनल विंग विद्या भारती से जुड़े हैं. उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों को बिना देरी किए इन किताबों को खरीदने को कहा है.

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RSS Linked Books
किताबों की सूची. (तस्वीर: सोशल मीडिया)

दीनानाथ बत्रा विद्या भारती के पूर्व महासचिव और RSS के एजुकेशनल कार्यक्रमों का प्रमुख चेहरा हैं. उनकी लिखी 14 किताबों को इस लिस्ट में शामिल किया गया है. साल 2017 में बत्रा सुर्खियों में थे. तब उन्होंने पंजाबी क्रांतिकारी कवि अवतार पाश की एक कविता को क्लास 11वीं की हिंदी पाठ्यपुस्तक से हटाने की मांग की थी. उस कविता का शीर्षक था- सबसे खतरनाक. इसके अलावा वो रवींद्रनाथ टैगोर, गालिब और एमएफ हुसैन पर लेखन को लेकर भी आपत्ति जता चुके हैं.

कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इन लेखकों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनकी रचनाएं शैक्षणिक योग्यता के बजाय एक विशेष विचारधारा पर आधारित हैं. उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या ऐसी किताबें संस्थानों में देशभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देंगी? मिश्रा ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो इस आदेश को रद्द कर दिया जाएगा.

‘शिक्षा का भगवाकरण’

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने इस आदेश पर अपनी सफाई दी है. उन्होंने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा है कि इन पुस्तकों का छात्रों के ज्ञान और समग्र व्यक्तित्व पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. शर्मा ने कहा कि ‘शिक्षा के भगवाकरण’ में कुछ गलत नहीं है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कम से कम उस राष्ट्र विरोध विचारधारा को बढ़ावा नहीं दे रही, जिसे वामपंथी विचारकों ने स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रमों में शामिल किया है.

इससे पहले जून महीने में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि उनकी योजना है कि भगवान राम और भगवान कृष्ण से जुड़ी चीजों को राज्य के शैक्षिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए. यादव पिछली भाजपा सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं.

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