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ईरान जाकर हिजाब न पहनना पड़े इसलिए भारत की इस खिलाड़ी ने इतना बड़ा कदम उठा लिया

ये बहुत बड़ा, साहसिक और ज़रूरी कदम है.

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13 जून 2018 (अपडेटेड: 13 जून 2018, 05:41 AM IST)
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ईरान में कंपलसरी हिजाब का कानून है.
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सौम्या स्वामीनाथन. इंडियन चेस स्टार. भारत के लिए कई चैंपियनशिप्स जीतने वाली और महिला ग्रैंडमास्टर का टाइटल होल्ड करने वाली शतरंज खिलाड़ी. सौम्या को जुलाई के अंत में एशियन नेशंस कप चैंपियनशिप में हिस्सा लेने ईरान जाना था. सौम्या ने मना कर दिया है. अपना नाम वापस ले लिया है. वजह पहनावे की आज़ादी से जुड़ी है. सौम्या ईरान में जाकर हिजाब नहीं पहनना चाहती. ईरानी क़ानून के मुताबिक़ वहां हर महिला का हिजाब पहनना अनिवार्य है. सौम्या नहीं चाहती कि उनकी कपड़े पहनने की बुनियादी स्वतंत्रता पर कोई हर्फ़ आए.
अपने फेसबुक पेज पर सौम्या ने लिखा,
"ये बताते हुए मुझे दुख हो रहा है कि मैंने आने वाली एशियन नेशंस कप चैंपियनशिप से अपना नाम वापस लेने की गुज़ारिश की है. क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मुझे हिजाब या बुरखा पहनने पर मजबूर किया जाए. सबके लिए हिजाब की पाबंदी वाला ईरानी क़ानून मुझे मेरे बुनियादी मानवाधिकारों का सीधा हनन लगता है."
आगे उन्होंने ये भी कहा कि,
"ऐसी प्रतियोगिताएं आयोजित करते वक़्त खिलाड़ियों के अधिकारों का ध्यान न रखा जाना निराशाजनक है. ये मैं समझ सकती हूं कि आयोजक हमसे अपनी नेशनल टीम की ड्रेस या फॉर्मल कपड़े पहनने की उम्मीद करें लेकिन धार्मिक ड्रेस कोड की स्पोर्ट्स में यकीनन कोई जगह नहीं है."
उनकी पूरी पोस्ट यहां पढ़िए:
सौम्या की फेसबुक पोस्ट.
सौम्या की फेसबुक पोस्ट.

सौम्या की बात सौ टका सही है. अपनी धार्मिक आस्था किसी और पर थोपना घनघोर वाली असहिष्णुता है. अव्वल तो अपने मुल्क की तमाम औरतों को पब्लिक प्लेस में हिजाब पहनने की सख्ती वाला ईरानी क़ानून अपने आप में क्रूर है. उसके बाद दूसरे मुल्कों की महिलाओं पर भी ये लागू करवाने की कोशिश हद दर्जे की मूर्खता है. कोई क्यों आपकी धार्मिक लाइन को फॉलो करे? अगर आपको इतनी ही दिक्कत है तो खेलिए ही मत. ना ही अपने यहां कोई आयोजन करवाइए. न कोई आएगा न आपका धर्म संकट में पड़ेगा.

लगभग चार दशक पुराने इस कानून का खूब विरोध होता है

सभी धर्मों की औरतों को हिजाब अनिवार्य करने वाला ये कानून अस्सी के दशक के आसपास अस्तित्व में आया था. काफी समय से इसकी मुखालफ़त भी हो रही है. ईरान की औरतों ने लगातार इसके खिलाफ संघर्ष किया है. पिछले दिनों एक गुरिल्ला प्रोटेस्ट भी खूब चला था. इसमें महिलाएं पब्लिक प्लेस पर अपना हिजाब उतारतीं और उसे झंडा बना लेतीं. ये उनका तरीका था ये बताने का कि कैसे वो इस कंपलसरी हिजाब वाले कानून को अपने अधिकारों पर आक्रमण मानती हैं.
एक ऐसा ही वीडियो यहां देख लीजिए:
सौम्या स्वामीनाथन ने अपना नाम वापस लेकर बिल्कुल ठीक किया है. कोई मुल्क अपनी जनता के साथ कैसे पेश आता है इसके लिए उसके - कमज़ोर ही सही - तर्क हो सकते हैं. लेकिन बाकी देशों के खिलाड़ी क्या पहनेंगे इसे तय करने का उसे कोई हक नहीं. उम्मीद है बाकी के लोग भी सौम्या के इस कदम से सीख लेंगे और ईरान को कड़ी प्रतिक्रया देंगे. अपना विरोध दर्ज कराएंगे. मज़हबी मूर्खताओं का विरोध यूं ही मुखरता से होना चाहिए. बार-बार ये कहा जाना चाहिए कि धर्म जब तक निजी है तभी तक ठीक है. इसका सार्वजनिक प्रदर्शन समस्याएं ही खड़ी करता हैं.


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