चंद्रयान-3 के लिए आज बड़ा दिन, पिछली बार यहीं हुई गड़बड़ ने सब तबाह किया था!
चंद्रयान-3 के लिए आज का दिन सांसें थामने वाला...ISRO क्या बोल रहा?

ISRO का चंद्रयान-3 स्पेसक्राफ्ट चांद के और नजदीक माने चांद की 153×163 किलोमीटर की ऑर्बिट तक आ गया. और आज गुरूवार, 17 अगस्त को एक और नई चीज हुई है. चंद्रयान-3 अब दो हिस्सों में बंट गया है. स्पेसक्राफ्ट के प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग-अलग हो गए हैं. ये इस पूरे मिशन की सबसे जरूरी स्टेज है. इसके बाद आगे का रास्ता लैंडर मॉड्यूल को अकेले तय करना है. चंद्रयान-2 मिशन में इसी स्टेज के बाद खराबी आ गई थी.
बुधवार को क्या हुआ?14 जुलाई को चंद्रयान-3 को पृथ्वी से लॉन्च किया गया. इसके बाद पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए इसे पृथ्वी की ऑर्बिट (कक्षा) छोड़कर चांद के करीब जाना था. ये पूरा सफ़र कई चरणों में धीरे-धीरे पूरा होना था. शुरू के कुछ चरणों में चंद्रयान-3 ने पृथ्वी से दूरी बढ़ाई. इसके लिए धीरे-धीरे चंद्रयान-3 ने पृथ्वी के चारों ओर अपने ऑर्बिट बढ़ाए. और फिर बीती 5 अगस्त को चांद की कक्षा में पहुंचा. अब इसे धीरे-धीरे चांद के चारों ओर अपनी कक्षा को छोटा करते जाना है. कल बुधवार 16 अगस्त को स्पेसक्राफ्ट का चौथा ऑर्बिट कम करने वाला मैन्यूवर था. यानी वो पैंतरेबाजी जिससे इसकी अंडाकार कक्षा छोटी होती है. बुधवार तक स्पेसक्राफ्ट में प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल दोनों थे. और आज गुरूवार को दोपहर 1 बजकर 8 मिनट पर प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग हो गए. लैंडर के चांद पर लैंड करने के बाद उसमें मौजूद रोवर बाहर आएगा और 14 दिनों तक चांद की सतह पर घूम-टहल कर डेटा इकठ्ठा करेगा.
अलग होने के बाद लैंडर क्या करेगा?प्रोपल्शन यानी एयरक्राफ्ट को धक्का देकर उसके सफ़र पर आगे बढ़ाने वाला हिस्सा. इससे अलग होने के बाद लैंडर मॉड्यूल के सभी उपकरणों की जांच होगी. इसके बाद दो बार चांद के चारों ओर ऑर्बिट छोटी करने के लिए मैन्यूवरिंग होगी. पहली बार में 100×100 किलोमीटर की गोलाकार ऑर्बिट में ले जाने के लिए और दूसरी बार चांद के और करीब 100×30 किलोमीटर की ऑर्बिट में ले जाने के लिए.
इसके बाद लैंडर, 100×30 किलोमीटर की ऑर्बिट से चांद की सतह पर उतरना शुरू कर देगा और सबकुछ ठीक रहा तो 23 अगस्त को लैंडर चांद पर पहुंच जाएगा. सबकुछ ठीक रहने की बात हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि पिछली बार चंद्रयान -2 के लैंडर में इसी चरण के दौरान खराबी आ गई थी. जिसके चलते लैंडर की क्रैश लैंडिंग हुई थी. और इसरो का लैंडर से संपर्क टूट गया था.
इंडियन एक्सप्रेस अखबार के मुताबिक़, इसरो ने एक बयान में कहा है,
"ये तैयारियों का वक़्त है, क्योंकि प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अपने अलग-अलग सफ़र के लिए तैयार हैं."
इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ का कहना है कि चंद्रयान -2 से सबक लेते हुए हमने चंद्रयान-3 को डिज़ाइन करते वक़्त 'फ़ेलियर-बेस्ड अप्रोच' अपनाई है. माने इस बार चंद्रयान-3 को डिज़ाइन करते वक़्त इस बात का ध्यान रखा गया है कि गलतियां या गड़बड़ियां होने के बावजूद भी इसे सही रास्ते पर कैसे बनाए रखना है.
चंद्रयान-3 और चंद्रयान-2 में एक खास अंतर है, जो इसे पहले से 'सुरक्षित' रखता है. चंद्रयान-2 में, प्रोपल्शन मॉड्यूल ही ऑर्बिटर की तरह काम करता था. यानी लैंडर और रोवर को चांद की कक्षा तक ले जाने का काम इसका ही था. ये काम कुछ हद तक इस बार भी प्रोपल्शन मॉड्यूल ने किया है, लेकिन चंद्रयान-3 को अब ऑर्बिटर वाले हिस्से की जरूरत नहीं है. चांद की नजदीकी कक्षाओं से चांद पर उतरने तक का काम लैंडर मॉड्यूल अकेले कर लेगा. एक और सवाल, अब प्रोपल्शन मॉड्यूल क्या करेगा? असल में इसमें भी एक इंस्ट्रूमेंट लगाया गया है जो अगले कुछ महीनों तक इसरो के काम का डेटा इकठ्ठा करेगा.
वीडियो: इसरो का चंद्रयान 2 मिशन की लैंडिंग में कौन सा एक शख्स मौजूद नहीं था

