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अब किसी डॉक्टर या हेल्थ वर्कर से हिंसा हुई तो 6 घंटे में एक्शन लो, केंद्र का निर्देश

केंद्र सरकार के तहत आने वाले सभी सरकारी अस्पतालों को हिंसा की घटनाओं पर 6 घंटे के भीतर इंस्टीट्यूशनल FIR दर्ज करवानी होगी.

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16 अगस्त 2024 (अपडेटेड: 16 अगस्त 2024, 07:35 PM IST)
Centre asks heads of govt hospitals to file institutional FIR within 6 hours of incident of violence
केंद्रीय सरकारी अस्पतालों को ऐसी घटनाओं की रजिस्ट्री रखनी चाहिए. (फोटो- PTI)
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कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की घटना के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं. मेडिकल कॉलेज में भीड़ द्वारा तोड़फोड़ के बाद रेजिडेंट डॉक्टर के संगठन ने दोबारा हड़ताल भी शुरू कर दी. इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक आदेश जारी किया है. मंत्रालय के मुताबिक, केंद्र सरकार के तहत आने वाले सभी सरकारी अस्पतालों को हिंसा की घटनाओं पर 6 घंटे के भीतर इंस्टीट्यूशनल FIR दर्ज करवानी होगी. यानी हिंसा की किसी भी घटना पर अब केस दर्ज करवाना अस्पताल की जिम्मेदारी होगी.

इंडिया टुडे से जुड़े अमित भारद्वाज की रिपोर्ट के मुताबिक, डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) ने 16 अगस्त को एक नोटिस जारी किया. इसमें कहा गया है,

“हाल में ये देखा गया है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा आम हो गई है. कई कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी के दौरान शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ता है. कई लोगों को मौखिक रूप से धमकाया जाता है. इस तरह की ज्यादातर हिंसा या तो मरीज या मरीज के अटेंडेंट द्वारा की जाती है.” 

नोटिस में आगे लिखा गया है कि अगर ड्यूटी के दौरान किसी हेल्थ वर्कर के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा होती है, तो ये संस्थान प्रमुख की जिम्मेदारी होगी कि वे घटना के अधिकतम 6 घंटे के भीतर इंस्टीट्यूशनल FIR दर्ज करवाएं.

इससे पहले, 14 अगस्त को DGHS ने एक और आदेश जारी किया. इसमें कहा गया था कि सभी केंद्रीय सरकारी अस्पतालों को ऐसी हिंसक घटनाओं की रजिस्ट्री रखनी चाहिए. साथ ही ऐसी घटनाओं को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संज्ञान में लाना चाहिए.

ये भी पढ़ें- 'बंद कर दो अस्पताल...' RG Kar हॉस्पिटल में तोड़फोड़ पर हाई कोर्ट ने ममता सरकार को घेर लिया

हाल में, नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने भी कहा था कि हिंसा की किसी भी घटना के मामले में कॉलेज प्रबंधन द्वारा त्वरित जांच की जानी चाहिए. NMC ने कहा था कि ऐसे मामलों में पुलिस में FIR दर्ज की जानी चाहिए. और 24 घंटे के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट NMC को भेजी जानी चाहिए.

बता दें कि रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबे समय से ये मांग रही है, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था के बावजूद कई घटनाओं में FIR दर्ज नहीं की जाती है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर, ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सा कर्मियों के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट की भी मांग कर रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता में साल 2019 में एक डॉक्टर पर हमले के बाद इसी तरह के प्रदर्शन हुए थे. इसके बाद तैयार किए गए ड्राफ्ट में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के लिए 10 साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया था.

वीडियो: कोलकाता रेप-मर्डर केस में सामने आई ट्रेनी डॉक्टर की डायरी, नाइट शिफ्ट पर जाने से पहले क्या लिखा था?

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