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कलकत्ता HC ने बंगाल में लाखों OBC सर्टिफिकेट रद्द किए, ममता बोलीं- 'नहीं मानेंगे'

साल 2012 में एक कानून बनाकर कुछ समुदायों को OBC में जोड़ा गया था. कोर्ट के फैसले के बाद इन समुदायों को मिले ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द हो जाएंगे.

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OBC certificate West Bengal
ममता बनर्जी ने कहा कि कानून संविधान के तहत बना था. (फोटो- पीटीआई)
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साकेत आनंद
22 मई 2024 (अपडेटेड: 22 मई 2024, 08:06 PM IST)
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में कई समुदायों को मिले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सर्टिफिकेट्स को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने साल 2012 के कानून के तहत OBC में जोड़े गए इन समुदायों के आरक्षण को अवैध बताया है. हालांकि कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस कैटगरी के तहत पहले ही नौकरी ले चुका है या आरक्षण का लाभ ले चुका है, तो इस आदेश का उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार कर दिया है.

राज्य सरकार ने एक कानून के जरिये कुछ समुदायों को OBC में जोड़ा था. यह कानून है- 'पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के इतर) (सर्विस और पदों में वेकैंसी के लिए आरक्षण) कानून, 2012'. अब कोर्ट ने इसी कानून के तहत कुछ समुदायों को मिले OBC प्रमाणपत्रों को रद्द करने का आदेश दिया है. इस फैसले के बाद इन समुदायों को मिले OBC दर्जे को लेकर बहस चल पड़ी है. राज्य में ऐसे लोगों की संख्या करीब 5 लाख बताई जा रही है.

ये आदेश 2010 से जारी किए गए OBC सर्टिफिकेट्स पर लागू होगा. समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस राजशेखर मंथा की बेंच ने ये आदेश जारी किया है. बेंच ने स्पष्ट किया है कि 2010 से पहले OBC में कैटगराइज 66 समुदाय इससे प्रभावित नहीं होंगे. क्योंकि कोर्ट में इनके खिलाफ याचिका नहीं डाली गई थी. आदेश के मुताबिक, 5 मार्च 2010 से 11 मई 2012 तक जिन 42 समुदायों को OBC में जोड़ा गया, उनका दर्जा रद्द किया गया है.

2012 के कानून को खत्म करने के लिए उसी साल एक जनहित याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि टीएमसी सरकार का फैसला पश्चिम बंगाल पिछड़ा कल्याण आयोग अधिनियम 1993 के खिलाफ है.

कोर्ट ने अब अपने फैसले में कहा कि पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग अधिनियम-1993 के आधार पर नई लिस्ट तैयार की जाएगी. इस लिस्ट को बनाने का काम पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग करेगा.

ये भी पढ़ें- 'ममता बनर्जी का प्राइस' पूछने वाले BJP प्रत्याशी और पूर्व जज को EC ने बुरा सुनाया, कार्रवाई भी कर दी

हालांकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस फैसले को मानने से इनकार करते हुए कहा कि इसे संविधान के नियमों के तहत तैयार किया गया था. दमदम लोकसभा क्षेत्र में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ये OBC आरक्षण जारी रहेगा, सरकार ने सर्वे कराने के बाद कानून बनाया था. बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर इसे रोकने की साजिश कर रही है.

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