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डॉक्टर रेप केस वाले अस्पताल के खिलाफ एक और CBI जांच का आदेश, क्या मामला है?

कलकत्ता हाई कोर्ट ने RG Kar Medical College and Hospital में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंप दी है.

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23 अगस्त 2024 (पब्लिश्ड: 09:49 PM IST)
R G Kar Medical College and Hospital (Photo-India Today)
आर जी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (फोटो - इंडिया टुडे)
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कोलकाता रेप और मर्डर मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को कलकत्ता हाई कोर्ट से एक बार फिर झटका लगा है. कोर्ट ने 23 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है. अब तक इसकी जांच राज्य द्वारा गठित SIT कर रही थी.

इंडिया टुडे से जुड़ीं नलिनी शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक़, कलकत्ता हाई कोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली की याचिका के बाद ये आदेश दिया है. अख्तर अली ने आरोप लगाया कि साल 2000 से 2023 तक और कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के कार्यकाल के दौरान अस्पताल में लगातार वित्तीय अनियमितता और अनैतिक क्रियाकलाप हुए. अख्तर अली ने दावा किया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस में भी दर्ज कराई थी. उनके पास इस संबंध में सबूत के रूप में दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें मौद्रिक लाभ के लिए तरह-तरह की ‘अवैध’ कार्यों का विवरण है. लेकिन उनकी शिकायतों के बावजूद राज्य सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया और लंबे समय तक आरोपों पर चुप्पी साधे रखी.

याचिकाकर्ता अख्तर अली का कहना है कि जांच के लिए SIT के गठन में राज्य सरकार की देरी ने उनके दावों को और मजबूत किया है. अख्तर अली ने पुलिस पर आरोप लगाया कि लगातार शिकायतें दर्ज कराने और पुलिस सुरक्षा मांगने के बाद भी अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.

वहीं, राज्य सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है. इस पर सरकार की ओर से सफाई दी गई कि अख्तर अली की शिकायत पश्चिम बंगाल सरकार के परिवार और स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई थी. हालांकि सुनवाई में अदालत ने इस पर आशंका जताई. राज्य ने कोर्ट में यह भी कहा कि SIT का गठन एक स्वायत्त निर्णय था, जिसका अख्तर अली की शिकायत से कोई संबंध नहीं था. हालांकि, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने मामले को CBI को सौंपे जाने के आदेश पर कोई आपत्ति नहीं जताई.

हाई कोर्ट ने फैसला किया कि आरजी कर अस्पताल से जुड़े रेप-मर्डर केस की जांच CBI पहले से ही कर रही है. ऐसे में संस्थान की वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी CBI द्वारा की जानी चाहिए. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, 

“जांच को अलग-अलग एजेंसियों में विभाजित नहीं किया जा सकता है. CBI द्वारा जांच से निरंतरता सुनिश्चित होगी.”

रिपोर्ट के मुताबिक, कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI को तीन सप्ताह के भीतर प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी. कोर्ट 17 सितंबर को ही रिपोर्ट की समीक्षा करेगा. इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने 20 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए SIT का गठन किया था.

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