सपा नेता की बेटी से बेटे की शादी की तो BSP ने निकाला? मायावती तो कुछ और कह रहीं
BSP ने सुरेंद्र सागर पर "पार्टी विरोधी" गतिविधियों में शामिल होने और "अनुशासनहीनता" का आरोप लगाया है. लेकिन पार्टी पर आरोप लग रहा है कि सपा विधायक की बेटी के साथ अपने बेटे की शादी करने के कारण उन्हें निष्कासित किया गया.

बहुजन समाज पार्टी (BSP) पर आरोप लगा है कि पार्टी ने एक सीनियर नेता को इसलिए पार्टी से निष्कासित कर दिया, क्योंकि उन्होंने अपने बेटे की शादी समाजवादी पार्टी के विधायक की बेटी से करवाई है. पार्टी से निकाले गए नेता का नाम सुरेंद्र सागर है. वे पांच बार रामपुर के जिला अध्यक्ष रह चुके हैं. सुरेंद्र सागर पर "पार्टी विरोधी" गतिविधियों में शामिल होने और "अनुशासनहीनता" के आरोप लगाए गए. हालांकि, बसपा प्रमुख मायावती ने इन आरोपों से इनकार किया है कि शादी की वजह से उन्हें पार्टी से निकाला गया.
इंडिया टुडे से जुड़े कुमार अभिषेक की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेंद्र सागर ने अपने बेटे अंकुर की शादी सपा विधायक त्रिभुवन दत्त की बेटी से की है. हाल में सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी अंबेडकरनगर में दत्त के घर पहुंचे थे. रिपोर्ट बताती है कि सुरेंद्र सागर के अलावा रामपुर के जिला अध्यक्ष प्रमोद सागर को भी पद से हटा दिया गया है.
त्रिभुवन दत्त भी पहले बसपा में थे. पार्टी से लोकसभा सांसद भी रहे थे. अक्टूबर 2020 में वे सपा में शामिल हुए थे. 2022 में अंबेडकरनगर की आलापुर सीट से विधायक चुने गए थे.
सुरेंद्र सागर क्या बोले?रिपोर्ट के मुताबिक, सुरेंद्र सागर बरेली मंडल में बसपा के बड़े नेता माने जाते थे. वे कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके थे. 2022 में मिलक विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने चुनाव लड़ा था. अपने निष्कासन पर सुरेंद्र सागर ने कहा है,
"मैंने कोई अनुशासनहीनता नहीं की है. मैंने सिर्फ ये किया है कि अपने बेटे अंकुर की शादी सपा विधायक त्रिभुवन दत्त की बेटी से कराई."
सुरेंद्र सागर ने मीडिया से कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी को मजबूत करने का काम किया है. और किसी पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं रहे हैं.
इन दावों के बाद 6 दिसंबर को मायावती का एक बयान आया. उन्होंने एक्स पर लिखा है कि सुरेंद्र सागर और पार्टी अध्यक्ष प्रमोद कुमार का आपसी झगड़ा चरम पर था, जिससे पार्टी के काम पर असर पड़ रहा था. उन्होंने बताया कि इस वजह से दोनों को एक साथ निकाला गया, जिसका शादी-विवाह से कोई संबंध नहीं है. मायावती ने आगे लिखा है,
"कौन किस पार्टी के लोगों के साथ अपना रिश्ता बना रहा है, उसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है. लोग स्वतंत्र हैं, जहां चाहें वहां रिश्ता करें. यह सब उनकी सोच पर निर्भर करता है. लेकिन ऐसे लोगों से जरूर सर्तक रहें जो इसका भी गलत प्रचार कर रहे हैं."
बीते दिनों रामपुर में बसपा के भीतर काफी खींचतान देखने को मिली है. जिले के पूर्व प्रभारी जितेंद्र बाबू ने भी 5 दिसंबर को इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने इस्तीफा देते हुए लिखा कि मुरादाबाद मंडल में पार्टी को खत्म करने का काम किया जा रहा है. साथ ही मिशन मूवमेंट पर काम करने वाले युवाओं को दरकिनार किया जा रहा है. इसलिए वे पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं.
पहले भी ऐसा मामला आयाइसी तरह का फैसला बसपा ने पिछले महीने भी लिया था. 9 नवंबर को पार्टी ने मेरठ में तीन सीनियर नेताओं को निष्कासित कर दिया था क्योंकि वे सभी समाजवादी पार्टी के नेता सुम्बुल राणा के भाई फरमान अली की शादी में शामिल हुए थे. सुम्बुल राणा मीरापुर विधानसभा उपचुनाव में सपा की उम्मीदवार थीं. वो बसपा के सीनियर नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद मुनकाद अली की बेटी भी हैं.
बसपा ने उस मामले में भी कहा था कि वे सभी चेतावनी के बावजूद "पार्टी विरोधी गतिविधियों" में शामिल थे.
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