हां तो जैसा कहा जाता है. "सैनिकों को कुछ न कहना. फौजी हमारी रक्षा करते हैं. आपएसी कमरे में बैठे हैं क्योंकि वहां कोई जवान आपकी हिफाजत को खडा है. सरकार नेसर्जिकल स्ट्राइक किया. वाह सरकार, अच्छे दिन. अच्छी सरकार. ऐसा पहले पभी नहीं हुआ.येन-तेन-प्रकारेण" लेकिन सुनो सरकार सैनिकों के लिए कितनी संवेदनशील है. जियो सिमहोगी आपके पास? मुफ्त कॉल. मुफ्त इंटरनेट. ऐसा जुगाड़ लगा ही लिए होंगे. लेकिन आपकेबॉर्डर पर सैनिकों का क्या हाल है. सरहद पर जो सिपाही तैनात होता है, वो अपनेघरवालों से बात कैसे करता है? बीएसएनएल के सैटेलाईट फोन से. पांच साल पहले जबजवानों के लिए यह सुविधा शुरू हुई थी, तब एक कॉल एक रुपये की एक मिनट के होती थी.लेकिन इस साल से बीएसएनएल ने इसकी दर बढ़ाकर 5 रुपये 75 पैसे हर मिनट के हिसाब सेकर दी. ये जो सैटेलाईट फोन से कॉल किया जाता है, उसका खर्चा कौन देता है? वहीसैनिक. अब चाहे वो जंगल में हो बियाबान में हो, बर्फ में खपे, रेत में धंसे. उसेनेटवर्क तो मिलता नहीं. फौज की प्राइवेसी अलग, तो प्राइवेट कंपनी की हेल्प भी नहींली जा सकती. आपके जैसे वो सिम पोर्ट नहीं करा सकते. संदेशे आते हैं का ज़माना जब गयाऔर फोन हर हाथ आया तो सरकार ने सब्सिडी देकर बीएसएनएल की डीएसपीटी यानी डिजिटलसैटेलाईट फोन टर्मिनल शुरू की. अभी देश भर में इंटरनेशनल बॉर्डर के साथ ऐसी जगहजहां मोबाइल नेटवर्क नही हैं, वहां 400 डीएसपीटी सेट लगे हैं, जिसमें अकेले जैसलमेरसीमा पर 100 से ज्यादा डीएसपीटी सेट लगे हुए हैं. पहले रेट ठीक थे. फिर वो दिन आया.अप्रैल 2016. बीएसएनएल ने कहा कि अब सब्सिडी का टाइम खत्म हो गया. बीएसएनएल को बुतघाटा लग रहा है, इसलिए कॉल चार्ज बढ़ाए गए हैं. बीएसएफ के डीआईजी ने रिक्वेस्ट की.सैनिकों ने बॉर्डर पर पहुंचे गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी अपना दुःख बताया मगर अबतक कुछ नहीं हुआ.भारत माता की जय