'चुनाव जीतने के लिए बीजेपी निर्माणाधीन राम मंदिर पर बम फिंकवा सकती है': सत्यपाल मलिक
सत्यपाल मलिक का दावा, 2024 के चुनाव से पहले नूह हिंसा जैसी घटनाएं बढ़ेंगी.

‘चुनाव जीतने के लिए बीजेपी अपने किसी प्रमुख नेता की हत्या करवा सकती है या निर्माणाधीन राम मंदिर पर बम फिंकवा सकती है.’
ये बयान है जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का. उन्होंने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुए एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि हरियाणा के नूह में हुई हिंसा सुनियोजित थी और 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ऐसी घटनाएं बढ़ेंगी. उनके मुताबिक नूह में शुरू हुई और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फैली हिंसा अनायास नहीं थी. बल्कि, सांप्रदायिक तनाव पैदा करने के मकसद से सात से आठ अलग-अलग स्थानों पर हुए हमले सुनियोजित थे.
नूह हिंसा पर उन्होंने आगे कहा,
‘मैं, जाट एरिया से आता हूं, वहां जाट सांस्कृतिक तौर से आर्य समाज की जीवन शैली में विश्वास करते हैं और पारंपरिक तौर पर बहुत धार्मिक नहीं होते. न ही इस क्षेत्र के मुसलमान बहुत पारंपरिक दृष्टिकोण के होते हैं. उनमें कल दंगा हुआ जिनके बारे में ये कहा जाता है कि इनके बीच कोई सांप्रदायिकता नहीं है, इसलिए आजादी के बाद से कभी किसी ने इन दो समुदायों के बीच इस तरह से टकराव होते नहीं सुना. अब ये हो रहा है और ये दंगा जानबूझकर बढ़ाया गया है. और ये हमले 2024 तक और बढ़ेंगे. इसलिए जनता इन सब अप्रत्याशित चीज़ों के लिए तैयार हो जाए, ये सब आपको बेवकूफ बनाने हैं और ये वोट के लिए किया जा रहा है.’
मलिक ने आगे कहा कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है, अभी पता नहीं आगे क्या-क्या होगा. मालिक ने कहा कि उन्हें जानकारी है कि बीजेपी 2024 चुनाव से पहले कुछ न कुछ करेगी. ये इनकी आदत है, ये गुजरात में ऐसा करते रहे हैं, ये देश में ऐसा करते रहे हैं, चुनाव जीतने के लिए भी कुछ इसी तरह की योजना बनाई जा सकती है. सत्यपाल मलिक यहीं नहीं रुके, उन्होंने देश की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा,
‘NSA अजित डोभाल आजकल संयुक्त अरब अमीरात का दौरा क्यों कर रहे हैं? वे वहां पाकिस्तान के जनरल्स से बात करते हैं, और मिली-जुली कोशिश करेंगे कि हमारी सेना पाकिस्तान में घुसे तो वे जवाबी कार्रवाई न करें. वे कुछ दिन वहां रुकेंगे और वापस आकर चुनाव जीतने की उम्मीद करेंगे. लोगों को पता होना चाहिए कि वो क्या कर रहे हैं.’
इस कार्यक्रम में सत्यपाल मलिक ने पुलवामा हमले पर भी बात की, जिसको लेकर वो लगातार सरकार पर हमलावर रहे हैं. उन्होंने कहा,
‘पुलवामा के बाद मोदी ने चुनाव से पहले जनता से कहा कि जब वो वोट दें तो पुलवामा को याद रखें. मैं भी जनता से कहना चाहता हूं, कि इस बार वोट करते समय पुलवामा के शहीदों को याद रखें. उनकी लाशों पर बनी सरकार ने आजतक उस मामले पर कोई जांच नहीं की है.’
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली समिति को पुलवामा हमले की जांच करनी चाहिए. सत्यपाल मलिक के इन बयानों पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने द प्रिंट से कहा,
‘मलिक को नेटफ्लिक्स या हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफार्म से जुड़ जाना चाहिए. वो वहां बतौर कॉन्टेंट राइटर काम कर सकते हैं.’
खैर, सत्यपाल मलिक का केंद्र में तत्कालीन बीजेपी सरकार पर निशाना साधने का ये कोई पहला वाकया नहीं है. पहली बार अक्टूबर 2021 में सत्यपाल मलिक ने दावा किया था कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहते हुए उन्हें दो फाइलों की मंजूरी देने के लिए 300 करोड़ रुपये की रिश्वत ऑफर की गई थी. इनमें एक मामला अनिल अंबानी की रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी (RGIC) से जुड़ा हुआ था. मलिक ने आरोप लगाया था कि कश्मीर में कंपनी की बीमा योजना को लाने के लिए उन्हें घूस देने की कोशिश की गई थी. साथ ही RSS और बीजेपी नेता राम माधव ने उन पर दबाव बनाने की कोशिश की थी. मलिक ने कहा था कि उन्होंने इसे कैंसिल कर दिया था. बाद में CBI ने इस कंपनी के खिलाफ केस भी दर्ज किया था.
न्यूज वेबसाइट ‘द वायर’ को दिये इंटरव्यू में सत्यपाल मलिक ने नरेंद्र मोदी सरकार पर कई और गंभीर आरोप लगाए थे. इस इंटरव्यू में मलिक ने कहा था कि पुलवामा में CRPF के काफिले पर हमला (फरवरी 2019) हमारे सिस्टम और विशेष रूप से गृह मंत्रालय की लापरवाही का परिणाम था. उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा था कि CRPF ने अपने जवानों को ले जाने के लिए विमान की मांग की थी. लेकिन गृह मंत्रालय ने मांग को ठुकरा दिया था.
मलिक ने ये भी बताया था कि जिस रास्ते से CRPF को जाना था, उसका सैनिटाइजेशन प्रभावी ढंग से नहीं किया गया था. मलिक ने दावा किया था कि उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने ये मुद्दा उठाया तो प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे इस बारे में चुप रहने और किसी को नहीं बताने की बात कही थी.

