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11 रेपिस्टों को रिहा करने के खिलाफ बिलकिस बानो सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं

बिलकिस ने कहा कि SC अपने फैसले पर फिर विचार करे और गैंगरेप के 11 दोषियों को फिर जेल भेजा जाए

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30 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 30 नवंबर 2022, 05:07 PM IST)
Bilkis Bano Rape Case supreme court
बिलकिस बानो. (फाइल फोटो)
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बिलकिस बानो (Bilkis Bano) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है. इसमें उन्होंने 2002 गुजरात दंगों में हत्या और गैंगरेप के 11 दोषियों को रिहा करने के फैसले को चुनौती दी है. बानो ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका भी दायर की है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि दोषियों को रिहा करने को लेकर राज्य सरकार विचार कर सकती है. 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस का सामूहिक बलात्कार हुआ था और उनके 7 परिवारजनों की हत्या कर दी गई थी.

लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिलकिस बानो की ओर से पेश हुईं वकील शोभा गुप्ता ने चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूण के सामने अपनी इस याचिका को रखा. गुप्ता ने कहा कि जस्टिस अजय रस्तोगी, जिन्होंने दोषियों की रिहाई पर विचार करने वाला आदेश पारित किया था, एक संविधान पीठ में व्यस्त हैं और हो सकता है कि वे इस मामले पर सुनवाई न कर पाएं.

इस पर सीजेआई चंद्रचूण ने कहा, 'पहले पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होनी चाहिए. इस मामले को भी जस्टिस रस्तोगी के समक्ष रखा जाए.' इस पर शोभा गुप्ता ने कहा, 'ये फैसला सिर्फ कोर्ट ही कर सकता है.'

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे मामले को देखेंगे और किस पीठ के सामने ये केस जाएगा, उसका फैसला करेंगे.

जस्टिस रस्तोगी की पीठ ने क्या कहा था?

मालूम हो कि इसी साल मई महीने में जस्टिस रस्तोगी की अगुवाई वाली पीठ ने फैसला दिया था कि गुजरात सरकार को ये अधिकार है कि वे दोषियों की रिहाई पर विचार कर सकते हैं. इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने कहा था कि रिहाई पर महाराष्ट्र सरकार को विचार करना चाहिए, क्योंकि इस केस का ट्रायल मुंबई में चला था, न कि गुजरात के किसी कोर्ट में.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ महीने बाद ही 15 अगस्त 2022 को बिलकिस बानो केस के सभी 11 दोषियों को रिहा कर दिया गया था. इतना ही नहीं, जेल से निकलते ही दोषियों का फूल-माला से स्वागत किया गया था. गोधरा के स्थानीय बीजेपी विधायक ने गैंगरेप के इन दोषियों को 'संस्कारी ब्राह्मण' कहा था.

गुजरात सरकार के इस फैसले का पुरजोर विरोध हो रहा है. दोषियों की रिहाई के कुछ दिन बाद ही माकपा नेता सुभाषिनी अली, पत्रकार रेवती लाल, टीएमसी सांसद महुआ मोईत्रा समेत कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि रिहाई के फैसले को तत्काल खारिज करते हुए दोषियों को जेल भेजा जाए.

इन याचिकाओं को लेकर गुजरात सरकार ने अपने एक हलफनामे में कहा कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही उन्होंने बिलकिस बानो मामले के दोषियों को रिहा किया है. उन्होंने कहा कि इन व्यक्तियों ने 14 साल की सजा पूरी कर ली है और जेल में उनका 'व्यवहार अच्छा रहा' था.

राज्य सरकार के हलफनामे के जरिये ये खुलासा हुआ कि सीबीआई और दोषी ठहराने वाले कोर्ट के जज ने बलात्कारियों को रिहा करने की इजाजत नहीं दी थी. गुजरात प्रशासन ने इन आपत्तियों को दरकिनार करते हुए 11 रेपिस्टों को जेल से बाहर कर दिया.

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